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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Basti News ›   Tarpan and Pind Daan are being performed at homes for ancestors, while elderly people living in old age homes await the return of their loved ones.

Basti News: पितृ विसर्जन पर पूर्वजों का तर्पण, वृद्धाश्रम में अपनों की राह देख रहे बुजुर्ग

Thu, 08 Oct 2026 02:22 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 08 Oct 2026 02:22 AM IST
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Tarpan and Pind Daan are being performed at homes for ancestors, while elderly people living in old age homes await the return of their loved ones.
फरेंदा। पितृ विसर्जन के दिनों में घरों में पूर्वजों की याद में तर्पण और पिंडदान किए जा रहे हैं। लोग दिवंगत माता-पिता और पूर्वजों को श्रद्धा से याद कर रहे हैं। वहीं, फरेंदा के गनेशपुर स्थित आधारशिला वृद्धाश्रम में रह रहे कुछ बुजुर्ग ऐसे भी हैं, जिन्हें जीते जी अपनों के हाथ से एक लोटा पानी तक नसीब नहीं हो रहा। पितृ विसर्जन के बीच इन बुजुर्गों की पीड़ा और गहरी हो गई है।
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वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों की निगाहें अक्सर दरवाजे पर टिकी रहती हैं। किसी को बेटे के आने की उम्मीद है तो कोई अपनों की आवाज सुनने का इंतजार कर रहा है। उम्र की झुर्रियों के बीच अपनों से दूरी का दर्द साफ दिखाई देता है। बुजुर्गों का कहना है कि जिन बच्चों को पालने में पूरी जिंदगी लगा दी, वही आज उनकी सुध नहीं लेते। उनका कहना है कि जीते जी सम्मान नहीं मिला तो मरने के बाद होने वाले तर्पण और पिंडदान का क्या अर्थ है।
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‘बेटे के आने के इंतजार में कटती है रात’
बरगदही राजमंदिर खुर्द निवासी 64 वर्षीय संतबली ने बताया कि वह 10 अगस्त 2024 से वृद्धाश्रम में रह रहे हैं। उनका एक बेटा है, लेकिन घर पर देखभाल नहीं हो पाती थी। पारिवारिक विवाद और आर्थिक तंगी के कारण उन्हें गांव में इधर-उधर से भोजन जुटाकर जीवन बिताना पड़ता था। अब वृद्धाश्रम में जिंदगी कट रही है। उन्होंने कहा कि आज भी बेटे के आने की उम्मीद में रात गुजरती है।
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‘बेटे ने जमीन बेचकर घर से निकाल दिया’
परसिया खुर्द निवासी 66 वर्षीय तुफानी ने बताया कि तीन दिन तक उन्हें भोजन नहीं मिला। बहू आए दिन प्रताड़ित करती थी। बेटे ने जमीन बेचकर रकम अपने पास रख ली और उन्हें घर से निकाल दिया। इसके बाद वह इधर-उधर भटकते रहे। मजबूर होकर वृद्धाश्रम पहुंचे। उनका कहना है कि कम से कम यहां बिना किसी विवाद के दो वक्त की रोटी मिल जाती है।
‘जीते जी पानी नहीं, मरने के बाद करेंगे तर्पण’
कोल्हुई के रायपुर पंडित निवासी 70 वर्षीय रामप्रकाश ने बताया कि शरीर में लकवा मार गया है और घर पर उचित देखभाल नहीं हो पा रही थी। उनका एक बेटा मुंबई में रहता है। घर पर उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। बेटे का फोन भी नहीं आता। उन्होंने कहा कि जीते जी बेटे के हाथ का भोजन और पानी नसीब नहीं हो रहा, लेकिन मरने के बाद वही पिंडदान और तर्पण करेगा।

‘बेटे से सम्मान पाने के लिए क्या मरना जरूरी है?’
मेहदावल निवासी 70 वर्षीय बेचन तीन वर्षों से वृद्धाश्रम में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनका एक बेटा है, लेकिन वह देखभाल नहीं करता था। जमीन बेचने के बाद उन्हें घर से निकाल दिया गया। किसी तरह वृद्धाश्रम पहुंचे। उन्होंने भावुक होकर कहा कि बेटे को पालने के लिए पूरी जिंदगी लगा दी, लेकिन वही बेटा आज सुध नहीं लेता। बेटे से सम्मान पाने के लिए क्या मरना जरूरी है?
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