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Basti News: किसान झेलते रहे ''किल्लत'' समितियों ने बेच डाली 531 प्रतिशत अधिक उर्वरक
Tue, 22 Aug 2023 11:35 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 22 Aug 2023 11:35 PM IST
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सजनाखोर साधन सहकारी समिति ने लक्ष्य से चार सौ चार प्रतिशत अधिक बेंच दिया है उर्वरक।
बस्ती। खरीफ फसलों को यूरिया की बुवाई के लिए पीक सीजन में किसानों काे खाद की किल्लत का सामना करना पड़ा। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई जब समितियों ने निर्धारित लक्ष्य से 531 प्रतिशत अधिक उर्वरक का वितरण कर दिया। इसका संज्ञान केंद्र सरकार ने लिया है। केंद्र से कृषि विभाग को जांच का निर्देश मिला है। अब अफसरों से हाथ पांव फूलने शुरू हो गए हैं।
उल्लेखनीय है कि जिले में बारिश की मिली-जुली स्थिति बनी हुई है। अगस्त के प्रथम सप्ताह में हुई बारिश के बाद फसलों में डालने के लिए यूरिया की मांग में तेजी आ गई। क्षेत्र में पीक सीजन में समितियों से यूरिया न मिलने पर हाहाकार मच गया। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रिजर्व स्टॉक से 33 प्रतिशत यूरिया निकालनी पड़ी। तब जाकर स्थिति में कुछ सुधार आया। जिले की 11 समितियों ने वितरण के निर्धारित लक्ष्य से 531 प्रतिशत तक ज्यादा उर्वरक खपा दी। इसके बाद भी खाद की किल्लत क्यों बनी रही। यह कृषि व सहकारिता विभाग के लिए जांच का विषय है।
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87 मीट्रिक टन सालभर का निर्धारित है लक्ष्य
- साधन सहकारी समितियां एक वित्तीय वर्ष में 87 मीट्रिक टन (एमटी) उर्वरक की ब्रिकी कर सकती हैं। यह लक्ष्य केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित किया गया है, जबकि जिले की 11 समितियों से लक्ष्य से कई सौ गुना ज्यादा उर्वरक वितरण कर दिया। इसके बावजूद पीक सीजन में खाद की किल्लत बनी रही। ऐसे में प्रश्न उठता है कि खाद आखिर कहां गई। इस बारे में अफसर कुछ भी बताने से बच रहे हैं।
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साधन सहकारी समितियों के नाम खपत की मात्रा (प्रतिशत में)
सहसराव 531
बसडीला 479
महुआडाबर 447
रुधौली 437
पीसीएफ पुरैना 423
सजनाखोर 404
बभनकटास 392
ऊभाई 334
पिपरा गौतम 337
महराजगंज 270
कप्तानगंज 267
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समितियों द्वारा निर्धारित लक्ष्य से अधिक उर्वरक वितरण का मामला सामने आया है। जांच की जा रही है। इस बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
-आशीष श्रीवास्तव, सहायक निबंधक सहकारिता।
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समितियों से अधिक उर्वरक वितरण का मामला सामने आया है। सहायक निबंधक सहकारिता से वितरण को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी गई है। जिसके आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
-मनीष कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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उल्लेखनीय है कि जिले में बारिश की मिली-जुली स्थिति बनी हुई है। अगस्त के प्रथम सप्ताह में हुई बारिश के बाद फसलों में डालने के लिए यूरिया की मांग में तेजी आ गई। क्षेत्र में पीक सीजन में समितियों से यूरिया न मिलने पर हाहाकार मच गया। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रिजर्व स्टॉक से 33 प्रतिशत यूरिया निकालनी पड़ी। तब जाकर स्थिति में कुछ सुधार आया। जिले की 11 समितियों ने वितरण के निर्धारित लक्ष्य से 531 प्रतिशत तक ज्यादा उर्वरक खपा दी। इसके बाद भी खाद की किल्लत क्यों बनी रही। यह कृषि व सहकारिता विभाग के लिए जांच का विषय है।
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87 मीट्रिक टन सालभर का निर्धारित है लक्ष्य
- साधन सहकारी समितियां एक वित्तीय वर्ष में 87 मीट्रिक टन (एमटी) उर्वरक की ब्रिकी कर सकती हैं। यह लक्ष्य केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित किया गया है, जबकि जिले की 11 समितियों से लक्ष्य से कई सौ गुना ज्यादा उर्वरक वितरण कर दिया। इसके बावजूद पीक सीजन में खाद की किल्लत बनी रही। ऐसे में प्रश्न उठता है कि खाद आखिर कहां गई। इस बारे में अफसर कुछ भी बताने से बच रहे हैं।
साधन सहकारी समितियों के नाम खपत की मात्रा (प्रतिशत में)
सहसराव 531
बसडीला 479
महुआडाबर 447
रुधौली 437
पीसीएफ पुरैना 423
सजनाखोर 404
बभनकटास 392
ऊभाई 334
पिपरा गौतम 337
महराजगंज 270
कप्तानगंज 267
समितियों द्वारा निर्धारित लक्ष्य से अधिक उर्वरक वितरण का मामला सामने आया है। जांच की जा रही है। इस बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
-आशीष श्रीवास्तव, सहायक निबंधक सहकारिता।
समितियों से अधिक उर्वरक वितरण का मामला सामने आया है। सहायक निबंधक सहकारिता से वितरण को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी गई है। जिसके आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
-मनीष कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी