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आठ वर्ष बाद भी तय नहीं हो सकी दुकान
basti
Updated Sat, 31 Mar 2018 11:33 PM IST
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गांव में जुटे लोग।
- फोटो : amar ujala
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गायघाट।
बहादुरपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत उमरिया में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकान का चयन आठ वर्ष बाद भी तय नहीं हो सका। हालांकि, इसे लेकर ग्राम पंचायत की छह बार खुली बैठक की जा चुकी है, मगर हर बार तकनीकी कारणों से स्थगित करना पड़ा। शनिवार को छठवीं बार खुली बैठक हुई, मगर फिर तमाम बाधाओं के चलते फिर बैठक स्थगित कर दी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही के चलते पीडीएस की दुकान तय नहीं हो पा रही है।
दुकान को लेकर जिला प्रशासन ने ग्राम पंचायत की खुली बैठक कर कोटेदार का चयन का निर्देश दिया था। इसके अनुपालन में पूर्व सूचना के आधार पर शनिवार को एडीओ पंचायत राम मनोहर मिश्र और ग्राम पंचायत अधिकारी लालजी कन्नौजिया गांव पहुंचे। यहां ग्राम प्रधान राजपती की अध्यक्षता में समय से बैठक शुरू हो गई। बैठक के दौरान कोटे की दुकान के लिए दो दावेदार मीना पत्नी विनोद कुमार तथा शोभा पत्नी रमेश का नाम आया। इसमें मीना ग्राम प्रधान राजपती की बहू हैं। इस कारण एडीओ पंचायत ने शासनादेेश का हवाला देकर उनका नाम निरस्त कर दिया। इसके बाद सभी सदस्यों ने ग्रामीणों की सहमति एसडीएम सदर को अपने स्तर से आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रस्ताव कर बैठक स्थगित कर दिया। ग्राम पंचायत के जयशंकर प्रसाद, शोभनाथ, चन्दन कन्नौजिया, रामसुरेश, राम प्रकाश, मधुबन, नवनीत, रामकुमार, दिलीप कुमार, बजरंगी पांडेय, बालकृष्ण, रामअचल, सुरेन्द्र कुमार, रामकृष्ण, जयप्रकाश आदि का कहना है कि ग्राम पंचायत उमरिया में कोटे की दुकान पिछले आठ वर्षों से दूसरे गांव से संबद्ध है। इसके पहले भी कोटे को लेकर ग्राम पंचायत की खुली बैठक पांच बार हो चुकी है। किन्तु विभागीय उदासीनता और अधिकारियों की लापरवाही के चलते पीडीएस दुकान का चयन आज आठ वर्ष बाद भी संभव नहीं हो सका। कहा कि राशन लेने के लिए ग्रामीणों को दूसरी ग्राम पंचायत में जाना पड़ता है। हर बार चयन के लिए बैठक होती है और फिर स्थगित हो जाती है। बैठक में सुरक्षा कारणों से उप निरीक्षक अनिल कुमार यादव, दिनेश कुमार सिंह, सिद्धनाथ यादव मयफोर्स उपस्थित रहे।
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बहादुरपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत उमरिया में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकान का चयन आठ वर्ष बाद भी तय नहीं हो सका। हालांकि, इसे लेकर ग्राम पंचायत की छह बार खुली बैठक की जा चुकी है, मगर हर बार तकनीकी कारणों से स्थगित करना पड़ा। शनिवार को छठवीं बार खुली बैठक हुई, मगर फिर तमाम बाधाओं के चलते फिर बैठक स्थगित कर दी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही के चलते पीडीएस की दुकान तय नहीं हो पा रही है।
दुकान को लेकर जिला प्रशासन ने ग्राम पंचायत की खुली बैठक कर कोटेदार का चयन का निर्देश दिया था। इसके अनुपालन में पूर्व सूचना के आधार पर शनिवार को एडीओ पंचायत राम मनोहर मिश्र और ग्राम पंचायत अधिकारी लालजी कन्नौजिया गांव पहुंचे। यहां ग्राम प्रधान राजपती की अध्यक्षता में समय से बैठक शुरू हो गई। बैठक के दौरान कोटे की दुकान के लिए दो दावेदार मीना पत्नी विनोद कुमार तथा शोभा पत्नी रमेश का नाम आया। इसमें मीना ग्राम प्रधान राजपती की बहू हैं। इस कारण एडीओ पंचायत ने शासनादेेश का हवाला देकर उनका नाम निरस्त कर दिया। इसके बाद सभी सदस्यों ने ग्रामीणों की सहमति एसडीएम सदर को अपने स्तर से आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रस्ताव कर बैठक स्थगित कर दिया। ग्राम पंचायत के जयशंकर प्रसाद, शोभनाथ, चन्दन कन्नौजिया, रामसुरेश, राम प्रकाश, मधुबन, नवनीत, रामकुमार, दिलीप कुमार, बजरंगी पांडेय, बालकृष्ण, रामअचल, सुरेन्द्र कुमार, रामकृष्ण, जयप्रकाश आदि का कहना है कि ग्राम पंचायत उमरिया में कोटे की दुकान पिछले आठ वर्षों से दूसरे गांव से संबद्ध है। इसके पहले भी कोटे को लेकर ग्राम पंचायत की खुली बैठक पांच बार हो चुकी है। किन्तु विभागीय उदासीनता और अधिकारियों की लापरवाही के चलते पीडीएस दुकान का चयन आज आठ वर्ष बाद भी संभव नहीं हो सका। कहा कि राशन लेने के लिए ग्रामीणों को दूसरी ग्राम पंचायत में जाना पड़ता है। हर बार चयन के लिए बैठक होती है और फिर स्थगित हो जाती है। बैठक में सुरक्षा कारणों से उप निरीक्षक अनिल कुमार यादव, दिनेश कुमार सिंह, सिद्धनाथ यादव मयफोर्स उपस्थित रहे।
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