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दर्जा आदर्श रेलवे स्टेशन का, सुविधाएं नाकाफी
basti
Updated Tue, 13 Mar 2018 11:00 PM IST
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खराब डिस्प्ले बोर्ड।
- फोटो : amar ujala
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बस्ती। आदर्श रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधाएं महज दिखावा साबित हो रही हैं। प्लेटफार्म एक पर बने वाटर पोस्ट पानी के बगैर मिले तो सीढ़ियों और किनारों पर पान, गुटकों के पीक से घिन पैदा हो रही है। शौचालय का भी यही हाल अमर उजाला टीम ने मंगलवार को देखा। रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म एक पर यात्री सुविधाओं के लिए डिस्प्ले बोर्ड से लेकर पेयजल की सुविधाएं तक हैं लेकिन वर्तमान में बेहाल हैं। सुरक्षा का आलम यह कि बहुत सारे लोग डिब्बों के बीच से उस पार जाते देखे जाते हैं।
बिन पानी सूना है वाटरपोस्ट
यात्रियों को पेयजल सुविधा मुहैया कराने के लिए बनाए गए वाटरपोस्टों में लगी टोटियों मं दो को छोड़कर किसी में दिन भर पानी ही नहीं आता है। शुद्ध पेयजल हो या शीतल पेयजल इसके लिए यात्रियों को जेब से पानी खरीदना होगा। यही हालत प्लेटफार्म दो व तीन पर भी है। मजबूरन यात्री वेंडर से पानी खरीदते हैं। ट्रेन के इंतजार में रहे घनश्याम, राम पदार्थ, राम जी, मनोज, पवन कुमार ने बताया कि इन दिनों सुविधा के नाम पर यात्रियों के साथ छलावा ही किया जा रहा है।
शौचालय भी लॉक किए गए हैं
प्लेटफार्म पर बनाए गए शौचालयों पर भी भरोसा नहीं किया जा सकता है। टीम की पड़ताल में शौचालयों की हालत अजीबोगरीब दिखी। इसमें ताला नहीं लगा था बल्कि उसे लॉक नए आइडिया से किया गया है। कुंडी को कील से ही जड़ दिया गया है, जिससे वह बंद रहता है। ताला नहीं देखकर शौच के लिए यात्री पहुंचते हैं लेकिन कील से लॉक देखकर वापस आ जाते हैं। इसके लिए यात्री मजबूरन इधर-उधर शौचालय के लिए भटकते हैं। महिलाओं को काफी दिक्कत होती है।
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स्वच्छता अभियान का फर्क नहीं
स्वच्छता के लिए अकेले सफाई कर्मी दोषी नहीं हैं। यहां प्लेटफार्म पर कूडे़दान तो अधिकांश रखे मिल जाते हैं लेकिन इधर-उधर गंदगी फेंक देते हैं। कूड़े का ढेर रेलवे पटरी के बीच में ही पड़ा दिखा। उसे किसी ने उठाकर कूडे़दान तक में रखना मुनासिब नहीं समझा। यात्रियों के बैठने के लिए बनाई गई बेंच नाली के बगल है। इसके वजह से अधिकतर यात्री इस बेंच पर बैठकर भी उठ जाते हैं। ट्रेनों का इंतजार करने वाले यात्री पेड़ के टूटे चबूतरे पर बैठने के लिए विवश हैं।
डिस्प्ले बोर्ड भी तीन माह से खराब
यात्रियों की सुविधा के लिए स्टेशन पर इलेक्ट्रानिक डिस्प्ले बोर्ड जरूर लगा है लेकिन अब यात्रियों को इससे कोई फायदा नहीं है। ट्रेनों की छोटी सी छोटी सूचना के लिए अब यात्रियों को पूछताछ के लिए काउंटर का चक्कर लगाना पड़ता है। विभाग के लोगों के मुताबिक करीब तीन महीने से यह डिस्टर्ब है। सूचना न मिलने के चलते यात्रियों को ट्रेनों के आने और जाने के संबंध में जानकारी लेने के लिए परेशान होना पड़ता है। कभी-कभी तो जानकारी के अभाव में ट्रेन छूट जाती है।
जिम्मेदार की भी सुनिए
रेलवे स्टेशन अधीक्षक विश्वंभर चौधरी का कहना है कि शौचालय का ठेका हुआ है। ठेकेदार की ओर से बंद किया गया होगा। ठेकेदार को बुलाकर जानकारी इस मामले में मैं उससे जानकारी लूंगा। वैसे साफ-सफाई के लिए यात्रियों का सहयोग भी जरूरी होता है। डिस्प्ले बोर्ड खराब होने की बाबत स्टेशन मास्टर कहते हैं कि ठीक कराने की जिम्मेदारी टेलीकॉम विभाग की है। इसके लिए कई बार पत्र व्यवहार किया जा चुका है। फिर से विभाग को दिक्कत की जानकारी दी जाएगी।
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बिन पानी सूना है वाटरपोस्ट
यात्रियों को पेयजल सुविधा मुहैया कराने के लिए बनाए गए वाटरपोस्टों में लगी टोटियों मं दो को छोड़कर किसी में दिन भर पानी ही नहीं आता है। शुद्ध पेयजल हो या शीतल पेयजल इसके लिए यात्रियों को जेब से पानी खरीदना होगा। यही हालत प्लेटफार्म दो व तीन पर भी है। मजबूरन यात्री वेंडर से पानी खरीदते हैं। ट्रेन के इंतजार में रहे घनश्याम, राम पदार्थ, राम जी, मनोज, पवन कुमार ने बताया कि इन दिनों सुविधा के नाम पर यात्रियों के साथ छलावा ही किया जा रहा है।
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शौचालय भी लॉक किए गए हैं
प्लेटफार्म पर बनाए गए शौचालयों पर भी भरोसा नहीं किया जा सकता है। टीम की पड़ताल में शौचालयों की हालत अजीबोगरीब दिखी। इसमें ताला नहीं लगा था बल्कि उसे लॉक नए आइडिया से किया गया है। कुंडी को कील से ही जड़ दिया गया है, जिससे वह बंद रहता है। ताला नहीं देखकर शौच के लिए यात्री पहुंचते हैं लेकिन कील से लॉक देखकर वापस आ जाते हैं। इसके लिए यात्री मजबूरन इधर-उधर शौचालय के लिए भटकते हैं। महिलाओं को काफी दिक्कत होती है।
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स्वच्छता अभियान का फर्क नहीं
स्वच्छता के लिए अकेले सफाई कर्मी दोषी नहीं हैं। यहां प्लेटफार्म पर कूडे़दान तो अधिकांश रखे मिल जाते हैं लेकिन इधर-उधर गंदगी फेंक देते हैं। कूड़े का ढेर रेलवे पटरी के बीच में ही पड़ा दिखा। उसे किसी ने उठाकर कूडे़दान तक में रखना मुनासिब नहीं समझा। यात्रियों के बैठने के लिए बनाई गई बेंच नाली के बगल है। इसके वजह से अधिकतर यात्री इस बेंच पर बैठकर भी उठ जाते हैं। ट्रेनों का इंतजार करने वाले यात्री पेड़ के टूटे चबूतरे पर बैठने के लिए विवश हैं।
डिस्प्ले बोर्ड भी तीन माह से खराब
यात्रियों की सुविधा के लिए स्टेशन पर इलेक्ट्रानिक डिस्प्ले बोर्ड जरूर लगा है लेकिन अब यात्रियों को इससे कोई फायदा नहीं है। ट्रेनों की छोटी सी छोटी सूचना के लिए अब यात्रियों को पूछताछ के लिए काउंटर का चक्कर लगाना पड़ता है। विभाग के लोगों के मुताबिक करीब तीन महीने से यह डिस्टर्ब है। सूचना न मिलने के चलते यात्रियों को ट्रेनों के आने और जाने के संबंध में जानकारी लेने के लिए परेशान होना पड़ता है। कभी-कभी तो जानकारी के अभाव में ट्रेन छूट जाती है।
जिम्मेदार की भी सुनिए
रेलवे स्टेशन अधीक्षक विश्वंभर चौधरी का कहना है कि शौचालय का ठेका हुआ है। ठेकेदार की ओर से बंद किया गया होगा। ठेकेदार को बुलाकर जानकारी इस मामले में मैं उससे जानकारी लूंगा। वैसे साफ-सफाई के लिए यात्रियों का सहयोग भी जरूरी होता है। डिस्प्ले बोर्ड खराब होने की बाबत स्टेशन मास्टर कहते हैं कि ठीक कराने की जिम्मेदारी टेलीकॉम विभाग की है। इसके लिए कई बार पत्र व्यवहार किया जा चुका है। फिर से विभाग को दिक्कत की जानकारी दी जाएगी।