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Basti News: वो वतन बेचकर मुस्कुराते रहे, हम वतन के लिए सिर कटाते रहे

Wed, 20 Dec 2023 11:36 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Wed, 20 Dec 2023 11:36 PM IST
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A poetess reciting poetry in the poet's conference organized in the Shaheed Fair going on in Nagar Panchayat Nagar.
नगर पंचायत नगर में चल रहे शहीद मेले में आयोजित कवि सम्मेलन में कविता पाठ करती कवयित्री
नगर बाजार (बस्ती)। नगर महोत्सव एवं शहीद मेले में मंगलवार की रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन को समर्पित रही। संचालन कर रहे वरिष्ठ कवि डॉ. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ की सरस्वती वंदना ‘‘ वीणा वादिनी मां जापे दृष्टि परि गयो, कोटि मूरख कैं कालिदास सा बनावत हैं’’ से शुरू हुई काव्य श्रंखला आधी रात तक चली। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. ज्ञानेंद्र द्विवेदी दीपक ने की। कवि सम्मेलन के आरम्भ में कार्यक्रम संयोजक भारतीय जनता पार्टी नेता राना दिनेश प्रताप सिंह व नगर पंचायत अध्यक्ष नीलम सिंह राना ने कवियों, शायरों को अंग वस्त्र भेंट कर उनका अभिनन्दन किया। कड़ाके की ठंड के बावजूद कवियों की रचनाओं से मंत्रमुग्ध श्रोता देर रात तक टस से मस नहीं हुए।
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ओज के वरिष्ठ कवि भूषण त्यागी ने ‘‘वो वतन बेंचकर मुस्कुराते रहे, हम वतन के लिये सर कटाते रहे’ पर देर तक तालियों से पंडाल गूंज उठा। डा. सत्यमवदा शर्मा ने एक दरिया को समुन्दर भी बना सकती हूं। प्यार, मनुहार का मंजर भी बना सकती हूं’ सुनाकर मंच को नई दिशा दी। रूचि द्विवेदी की रचना ‘‘ मेरे हक में हो फैसला भी तो कैसे, मुकदमा भी तेरा, अदालत भी तेरी’ ने युगीन सत्य को स्वर दिया। डा. हेमा पाण्डेय ने श्रंगार पर कुछ यूं कहा ‘ प्यार का रस फिजा में उतर जायेगा, चांदी में नहा कर निखर जायेगा। हास्य कवि ताराचंद तनहा की रचनाओं पर खूब ठहाके लगे ‘ मैं मन में था जिनके लिये श्रद्धा लिये हुये, एक दिन मिले वो हाथ में अद्धा लिये हुये’’। ओज के सशक्त हस्ताक्षर डा. ओपी वर्मा ओम ने ‘भारती पुकारती, कहती है बार-बार, एक-एक पुत्र बोल वंदे मातरम, राग, द्वेष, भेद भाव, धर्म जाति छोड़कर, प्रेम रस राष्ट्र का घोले वंदे मातरम’ सुनाकर राष्ट्रबोध को जागृत कराया। महेश प्रताप श्रीवास्तव की पंक्तियां ‘ जंग फिर हम हार बैठे हैं, तो लड़ना बंद कर दें..? आसमा से आ गिरे भू-पर तो उड़ना बंद कर दें’’ के द्वारा प्रश्न खड़े किये।
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बिहार से पधारे हास्य कवि नन्द जी नन्दा ने श्रोताओं को खूब हंसाया। विनोद उपाध्याय हर्षित की रचना ‘ बस्ती मण्डल की गाथा को विशेष सराहना मिली। संचालन कर रहे डा. रामकृष्ण लाल जगमग ने श्रोताओं को जहां अपने हास्य व्यंग्य की रचनाओं से हंसाया, वहीं गंभीर रचनाओं से सोचने समझने को विवश किया।
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अध्यक्षता कर रहे डा. ज्ञानेन्द्र द्विवेदी ‘दीपक’ ने आयोजन की सराहना करते हुये कुंछ यू कहा- ऐ अब्र हमें तू बार-बार सैलाब की धमकी देता है, हम तो दरिया की छाती पर तरबूज की खेती करते हैं’ के द्वारा हौसलों को उडान दिया। इसी क्रम में अर्चना श्रीवास्तव, काजी अनवार पारसा, अजय श्रीवास्तव ‘अश्क’, डा. अफजल हुसेन अफजल, दीपक सिंह ‘प्रेमी, जगदम्बा प्रसाद भावुक, रहमान अली ‘रहमान’, अजीत श्रीवास्तव ‘राज’, चन्द्रमती चतुर्वेदी आदि की रचनायें सराही गई।
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