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सामूहिक दुष्कर्म में तीन दस वर्ष की सजा

Fri, 06 Jul 2018 10:56 PM IST
Updated Fri, 06 Jul 2018 10:56 PM IST
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सामूहिक दुष्कर्म में तीन दस वर्ष की सजा
सामूहिक दुष्कर्म में तीन को दस वर्ष की सजा
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फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम का फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। अपर सत्र न्यायाधीश व त्वरित न्यायालय प्रथम के न्यायाधीश हर्ष अग्रवाल ने सामूहिक दुष्कर्म के एक मामले में तीन लोगों को 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक पर तीस-तीस हजार रुपये अर्थदंड भी लगा है। इसे अदा न करने पर एक-एक वर्ष की अतिरिक्त कारावास भुगतनी होगी। अर्थदंड से प्राप्त धनराशि में से तीस हजार पीड़िता को प्राप्त होगा।
सहायक शासकीय अधिवक्ता जय गोविंद सिंह ने कोर्ट में घटना का विवरण रखा। बताया कि गौर थाना क्षेत्र के एक गांव के पीड़िता की मां ने 20 मार्च 2008 को रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसकी 14 वर्षीय नाबालिग पुत्री को गांव का खुद्दूर सब्जी लेने के बहाने बाजार ले गया, लेकिन शाम तक वह वापस नहीं लौटी। शाम को वादी के जेठ सब्जी का झोला लाकर घर में दिए और बताया कि खुद्दूर के साथ लड़की बाजार में है। जब वह रात में भी नहीं लौटी तो मां को शक हो गया कि खुद्दूर उसे लेकर फरार हो गया। इसके बाद जब बेटी की तलाश करने में जुटी तो पता चला कि खुद्दूर के दो मामा अनिल कुमार व श्रवण कुमार भी इस साजिश में शामिल हैं। घटना के पांच दिन बाद लड़की असहज स्थिति में घर पहुंची। मां से सारी बात कह सुनाई। यह भी बताया कि उसके साथ तीन दिनों तक सामूहिक दुष्कर्म किया गया। पीड़िता के बयान व मेडिकल परीक्षण के पश्चात कोर्ट में खुद्दूर के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल हुआ, जबकि अनिल व श्रवण को कोर्ट ने तलब कर उनके खिलाफ भी आरोप तय किए। अभियोजन की ओर से पीड़िता और उसकी मां सहित सात गवाहों के बयान हुए। बचाव पक्ष से झूठा व रंजिशन फंसाए जाने का तर्क दिया गया। गवाहों के बयान और साक्ष्यों के अवलोकन के पश्चात कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाया।
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गैर इरादतन हत्या में एक को आठ वर्ष की सजा
जिला जज न्यायालय का फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयशील पाठक ने गैर इरादतन हत्या के जुर्म में दोषी करार देते हुए एक को आठ वर्ष की सजा सुनाई है। इस मामले में चार आरोपी को साक्ष्य के अभाव में कोर्ट ने बरी कर दिया। दोषी को 20 हजार रुपये अर्थदंड भी अदा करना होगा। इसे अदा न करने पर छह माह की अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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शासकीय अधिवक्ता आलोक कुमार सिंह, जय गोविंद सिंह व अधिवक्ता विजय तिवारी ने कोर्ट में घटना का विवरण रखा। बताया कि सोनहा थाना क्षेत्र के भानपुर निवासी राजेश गुप्ता ने रिपोर्ट दर्ज कराई। कहा कि उनके भाई विमल कुमार को कन्हैया लाल अग्रहरि सात जून 2014 को अपने घर खाने पर बुलाए और वहीं उसकी परिवार के साथ मिलकर हत्या कर दी। इसकी सूचना मृतक की प्रेमिका ने दी। इस मामले में राजेश ने कन्हैया, कमलेश अग्रहरि, दुर्गेश, राधेश्याम व गौरा निवासी प्रेम कुमार अग्रहरि के खिलाफ मुकदमा दर्ज होकर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल हुआ। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश ने कन्हैया को दोषी मानते हुए सजा सुनाई, जबकि कमलेश अग्रहरि, दुर्गेश, राधेश्याम व गौरा निवासी प्रेम कुमार अग्रहरि को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
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