फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Basti News ›   80 private hospitals have lost their registration and are operating OPD and IPD for 37 days.

Basti News: 80 निजी अस्पतालों का खत्म हुआ पंजीकरण, 37 दिन से ओपीडी-आईपीडी कर रहे संचालित

Mon, 08 Jun 2026 12:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Mon, 08 Jun 2026 12:31 AM IST
विज्ञापन
80 private hospitals have lost their registration and are operating OPD and IPD for 37 days.
- आवेदन करके सिर्फ पूरा कर लिया कोरम, विभाग ने भौतिक जांच तक नहीं कराया
विज्ञापन

बस्ती। जिले में 80 से अधिक निजी अस्पताल 37 दिन से लाइसेंस का नवीनीकरण कराए बिना संचालित हो रहे हैं। इन अस्पतालों में ओपीडी के साथ आईपीडी भी चल रही है। मरीज भी वहां पहुंचकर इलाज करा रहे हैं। वहीं, 40 अस्पताल ऐसे हैं, जिन्होंने नवीनीकरण के लिए आवेदन किया है। यानि बाकी बचे 40 अस्पताल खुलेआम मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। हालांकि, एक घटना के बाद मुंडेरवा में पंजीकरण समाप्त हो चुके अमृत अस्पताल को सील कर दिया गया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग अन्य अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा है।
गौरतलब है कि, जिले में कुल 325 से अधिक निजी अस्पताल पंजीकृत हैं। सूत्रों के अनुसार, अधिकांश निजी अस्पताल संचालक किराये पर डॉक्टरों की डिग्री लगाकर पंजीकरण कराते हैं और फिर झोलाछाप से मरीजों का इलाज कराकर जान जोखिम में डालते हैं। बीते वर्ष शासन ने पांच वर्ष के लिए नवीनीकरण का आदेश दिया था और मानक भी निर्धारित किए थे। इसके बावजूद अधिकारियों ने अमानक अस्पतालों का नवीनीकरण नहीं किया और न हीं उन्हें बंद कराया।
विज्ञापन

चालू सत्र में नर्सिंग होम, क्लीनिक, एक्स-रे, पैथोलॉजी के लिए विभाग के पोर्टल पर 325 आवेदन आए थे। जांच में कई मानक के अनुसार नहीं होने पर आवेदन निरस्त करते हुए दोबारा आवेदन मांगे गए थे। विभाग के अनुसार, 325 में 240 अस्पतालों का पंजीकरण हुआ था। इधर, 30 अप्रैल 2026 तक 80 अस्पतालों का पंजीयन खत्म हो गया है। ये अस्पताल एक साल के लिए पंजीकृत हुए थे। बताया गया कि इनमें से 40 आवेदन अभी तक आए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

विभागीय ढिलाई के चलते अभी तक इन अस्पतालों की भौतिक जांच तक नहीं हुई है, इससे पंजीयन लटका हुआ है। वहीं, संचालक भी बेखौफ अस्पताल और क्लिनिक संचालित कर रहे हैं। इसी में मुंडेरवा का अमृत अस्पताल भी शामिल है, जिसका पंजीयन खत्म हो चुका है और अस्पताल संचालित होता रहा। विभाग ने उसे तब सील किया जब एक महिला की जान चली गई। बताते चलें कि ये 80 अस्पताल लिखा-पढ़ी में हैं लेकिन पचपेड़िया, महिला अस्पताल के सामने, जिला अस्पताल गेट, कैली रोड, मालवीय रोड व ब्लॉक रोड समेत टीबी अस्पताल के पास मानक विहीन अस्पताल संचालित हो रहे हैं।

मुंडेरवा में घट चुकी है घटना, फिर भी संजीदा नहीं विभाग
सफेद पोशाक और गले में एप्रेन लटकाए स्वास्थ्य कर्मी ही नर्सिंग होम में डॉक्टर बनकर बैठे हैं। मरीज भी क्या जाने, वह तो डॉक्टर समझ जांच कराने पहुंच जा रहा है। विभाग के इस ढिलाई का फायदा कथित दलाल और बिचौलिए उठा रहे हैं। कुछ, ऐसा ही मामला मुंडेरवा में आ चुका है। यहां अमृत अस्पताल का पंजीयन 30 अप्रैल को खत्म होने के बाद भी संचालन होता रहा और अप्रशिक्षित कर्मी की लापवाही के चलते महिला मरीज की जान चली गई।
महिला को 14 मई की रात में भर्ती कराया गया, खुजली की शिकायत थी। डॉक्टर की गैर मौजूदगी में तीन इंजेक्शन लगा दिए। तहरीर में पीड़ित ने बताया है कि गलत इंजेक्शन के चलते मरीज की जान गई, जबकि जिस महिला डॉ. प्रतिभा शर्मा की डिग्री पर अमृत अस्पताल का पंजीयन हुआ है, वह भी मौके पर नहीं थीं।
सूत्रों के अनुसार, सुदूर से डिग्री लेकर अस्पताल का पंजीयन करा लिया जाता है। स्वास्थ्य विभाग बताने को तैयार नहीं है कि डॉक्टर के अलावा स्टाफ में कौन-कौन कार्यरत था। इसे लेकर शक और गहराता जा रहा है। नामजद प्राथमिकी में शामिल अस्पताल के संचालक डॉ. मनीष भाग गया है जबकि चिकित्सक ने अपना बयान सीएमओ कार्यालय में दर्ज नहीं कराया है।


मानक न संसाधन, दे दिया पांच साल का पंजीकरण
सूत्रों के अनुसार, जिगिना रोड स्थित मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल मानक के अनुरूप नहीं है, फिर भी उसका पंजीयन पांच साल तक कर दिया गया है। पूर्व में अस्पताल बिना पंजीकरण के संचालित था। उस समय भी एक बच्चे की मौत हुई थी, तब मामला पकड़ में आया। इस बार मामला उजागर हुआ लेकिन विभाग ने सिर्फ अस्पताल की ओपीडी और आईपीडी को सील किया है। विभाग यहां तक नहीं बता पा रहा है कि हॉस्पिटल का पंजीकरण किस चिकित्सक के नाम पर है।



ये एनओसी होना अनिवार्य
अग्निशमन विभाग की एनओसी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी, अन्य आवश्यक लाइसेंस, भवन मानचित्र स्वीकृति, नारकोटिक्स व ड्रग लाइसेंस जरूरी हैं।

बिना वैध पंजीयन के संचालित अस्पतालों की जांच कराई जाएगी। यदि, वे खुले पाए गए तो कार्रवाई होगी। जिन 40 अस्पतालों के आवेदन आए हैं, उनकी भौतिक जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने पर नियमानुसार पंजीकरण किया जाएगा।
- डॉ. राजीव निगम, सीएमओ, बस्ती।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed