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गौर में मिले एईएस के तीन मरीज
Updated Sat, 15 Sep 2018 11:58 PM IST
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गौर में मिले एईएस के तीन मरीज
सभी का बस्ती जिला अस्पताल में इलाज
अमर उजाला ब्यूरो
गौर। सरकार की ओर से इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण के लिए कई तरह के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। बावजूद गांवों में यह बीमारी रुकने का नाम नहीं ले रही है। क्षेत्र के अलग-अलग गांवों में तीन बच्चों में संभावित एईएस की पुष्टि हुई है। जिनका इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौर अंतर्गत ग्राम सभा तरैनी में अलकाश (6) हरदी बाबू की नाजिया खातून (3) एवं सिटकोहर गांव की सुहानी (10) को पहले बुखार की समस्या से जूझना पड़ा। बच्चों की स्थिति गंभीर देखकर परिवार के लोग जिला अस्पताल में भर्ती कराए। जहां पर तीनों बच्चों में एईएस पुष्टि हुई। जबकि तरैनी गांव में बुधवार रात सचिन कुमार (10) को पेट में दर्द होने के बाद अस्पताल ले जाया जा रहा था लेकिन बेलवाराजा गांव के पास दम तोड़ दिया था। इतना सब कुछ होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। जब दोबारा इसी गांव के एक बच्चे को एईएस की पुष्टि हुई तो विभाग में हड़कंप मच गया।
जागा स्वास्थ्य महकमा
10 वर्षीय सचिन की मौत के बाद अब एईएस की पुष्टि हुई तो आनन-फानन शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम तरैनी गांव पहुंची। छिड़काव कराकर लोगों में दवा वितरण किया गया। स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी रामआसरे सरोज ने बताया कि बच्चों की जांच रिपोर्ट में संभावित इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई है। जिसमें नाजिया खातून और सुहानी इलाज कराकर घर आ गए हैं। जबकि अलकाश का अस्पताल में इलाज चल रहा है। गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजी गई है। दस्तक अभियान के तहत पहले ही जागरूक किया गया है। फिर भी यदि कहीं पर इस तरह की बीमारी सामने आती है तो उस पर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
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सभी का बस्ती जिला अस्पताल में इलाज
अमर उजाला ब्यूरो
गौर। सरकार की ओर से इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण के लिए कई तरह के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। बावजूद गांवों में यह बीमारी रुकने का नाम नहीं ले रही है। क्षेत्र के अलग-अलग गांवों में तीन बच्चों में संभावित एईएस की पुष्टि हुई है। जिनका इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौर अंतर्गत ग्राम सभा तरैनी में अलकाश (6) हरदी बाबू की नाजिया खातून (3) एवं सिटकोहर गांव की सुहानी (10) को पहले बुखार की समस्या से जूझना पड़ा। बच्चों की स्थिति गंभीर देखकर परिवार के लोग जिला अस्पताल में भर्ती कराए। जहां पर तीनों बच्चों में एईएस पुष्टि हुई। जबकि तरैनी गांव में बुधवार रात सचिन कुमार (10) को पेट में दर्द होने के बाद अस्पताल ले जाया जा रहा था लेकिन बेलवाराजा गांव के पास दम तोड़ दिया था। इतना सब कुछ होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। जब दोबारा इसी गांव के एक बच्चे को एईएस की पुष्टि हुई तो विभाग में हड़कंप मच गया।
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जागा स्वास्थ्य महकमा
10 वर्षीय सचिन की मौत के बाद अब एईएस की पुष्टि हुई तो आनन-फानन शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम तरैनी गांव पहुंची। छिड़काव कराकर लोगों में दवा वितरण किया गया। स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी रामआसरे सरोज ने बताया कि बच्चों की जांच रिपोर्ट में संभावित इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई है। जिसमें नाजिया खातून और सुहानी इलाज कराकर घर आ गए हैं। जबकि अलकाश का अस्पताल में इलाज चल रहा है। गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजी गई है। दस्तक अभियान के तहत पहले ही जागरूक किया गया है। फिर भी यदि कहीं पर इस तरह की बीमारी सामने आती है तो उस पर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
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