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माधव बाबू ने लिया था राष्ट्र सेवा का संकल्प

Sun, 10 Sep 2017 11:24 PM IST
Updated Sun, 10 Sep 2017 11:24 PM IST
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माधव बाबू ने लिया था राष्ट्र सेवा का संकल्प
माधव बाबू ने लिया था राष्ट्र सेवा का संकल्प
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बस्ती।
भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य और भाजपा के उत्तर प्रदेश के प्रथम अध्यक्ष माधव प्रसाद त्रिपाठी ‘माधव बाबू’ समाज और संगठन के प्रति आजीवन समर्पित रहे। वर्ष 1940 में नानाजी देशमुख की प्रेरणा से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सदस्यता ग्रहण करने के बाद परिवार का मोह त्याग कर राष्ट्र सेवा का व्रत ले लिया।
माधव बाबू का जन्म अविभाजित बस्ती जिले के बांसी तहसील के तिवारीपुर गांव में वर्ष 1917 में सुरेश्वर प्रसाद त्रिपाठी के घर हुआ। इनके दो बड़े और एक छोटे भाई भी थे। बड़े भाई कमलादत्त त्रिपाठी ने डॉक्टरी की पढ़ाई करने के बाद बस्ती में चिकित्सा सेवा शुरू की तो दूसरे भाई वशिष्ठ दत्त त्रिपाठी ने व्यवसाय। छोटे भाई उमेश मणि त्रिपाठी ने काशी को अपनी कर्म भूमि बनाई वहीं, वे संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में उपाचार्य बने।
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माधव बाबू ने काशी विश्वविद्यालय से स्नातक और विधि स्नातक की उपाधि हासिल की। बाद में बस्ती में वकालत शुरू कर दी। घुड़सवारी के शौकीन माधव बाबू की 1940 में आरएसएस गोरखपुर के विभाग प्रचार प्रमुख नानाजी देशमुख से हुई। नानाजी की प्रेरणा से संघ में शामिल हुए और 1941 में नगर संघ चालक बना दिया गया। कुछ ही वर्षों में जिला संघ चालक जैसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी गई। संगठन के प्रति निष्ठा से प्रभावित होकर 1951-52 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पं. दीनदयाल उपाध्याय ने अपनी टीम में शामिल कर लिया। पहले आम चुनाव में वे भारतीय जनसंघ से चुनाव मैदान में उतरे, मगर वे चुनाव जीत नहीं सके लेकिन 1958 में उन्हें विधान परिषद सदस्य चुना गया। वर्ष 1962 में वे पहली बार विधायक बने। सरकार में वह एक बार कृषि मंत्री भी रहे। आपातकाल के दौरान उन्हें करीब 19 माह तक जेल में गुजारना पड़ा। आपातकाल के बाद भारतीय जनसंघ और जनता पार्टी का विलय हुआ तो वे 1977 में डुमरियागंज के सांसद चुने गए। छह अप्रैल 1980 में जब भाजपा का गठन हुआ तो शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष की कमान सौंप दी। वर्ष 1984 में जन्माष्टमी के दिन संगठन के कार्यक्रम में जाते समय लखनऊ में उनकी मौत हुई।
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घर रहते हुए मुलाकात नहीं
माधव बाबू के साथ रहने वाली भतीजी 84 वर्षीय उषा देवी शुक्ला और 74 वर्षीय सुधा द्विवेदी कहती हैं कि हम सभी एक ही घर में रहकर महीनों उनसे मुलाकात नहीं कर पाते थे। क्योंकि वह ज्यादातर समय संगठन और सामाजिक कार्य में देते थे। आरएसएस के प्रति समर्पित होकर चाचा जी ने जिस तरह घर परिवार का मोह छोड़ बैरागी जीवन अपना लिया उससे तो शुरुआती दौर में हम परिवार के लोगों को थोड़ा दुख हुआ, मगर समाज और राष्ट्र के प्रति उनकी सेवा और त्याग की भावना आज भी हमें और हमारे परिवार की प्रेरणा है।

जन्मशताब्दी पर 12 को होंगे विविध कार्यक्रम
आरएसएस के पुरोधा और भाजपा के प्रथम प्रदेश अध्यक्ष माधव बाबू की जयंती 12 सितंबर को शहर के रोडवेज स्थित एक मैरेज हाल में शाम साढ़े चार बजे शताब्दी समारोह का आयोजन किया गया है। यह जानकारी स्व. त्रिपाठी के नाती और भाजपा नेता अमित शुक्ल ने दी है।
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