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उपनिरीक्षक समेत छह पुलिसकर्मियों पर केस
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दरोगा समेत छह पुलिसकर्मियों पर केस
बस्ती। वर्ष 2012 में मुंडेरवा थाने में कच्ची शराब की फर्जी बरामदगी दिखाने का प्रकरण प्रकाश में आया है। भ्रष्टाचार निवारण संगठन इकाई गोरखपुर के निरीक्षक चंद्रेश यादव ने इस संबंध में रविवार को तत्कालीन थानाध्यक्ष गजेंद्र राय सहित सभी छह पुलिस कर्मियों पर मुंडेरवा थाने में मुकदमा दर्ज कराया है जिसमें गलत तरीके से फंसाना, लोक सेवक का विधि विरुद्ध आचरण, मिथ्या साक्ष्य, गलत तरीके से संपत्ति जब्त करने सहित अन्य आरोप लगाए गए हैं।
12 जून 2012 को हटवा गांव में पुलिस ने दबिश देकर कच्ची शराब की बरामदगी की थी। जिसके संबंध में आबकारी एक्ट का मुकदमा पंजीकृत किया गया। बाद में भ्रष्टाचार निवारण संगठन इकाई गोरखपुर में शिकायत की गई कि फर्जी मुचलका तैयार कर सादे कागज पर आरोपियों का हस्ताक्षर बनवा लिया गया और थाने से छोड़ने के नाम पर छह हजार रुपये लिए गए। विजिलेंस के निरीक्षक चंद्रेश यादव ने जो तहरीर दी, उसमें आरोप है कि गाजीपुर जिले के थाना भावरकोल के नकटी निवासी गजेंद्र राय तत्कालीन थानाध्यक्ष थे। गजेंद्र राय के अलावा एसआई पारसनाथ सिंह यादव, आरक्षी राजमंगल यादव, जयप्रकाश राय, रिक्रूट आरक्षी श्रवण कुमार और एसआई योगेश कुमार सिंह ने मिलकर फर्जी तरीके से कार्रवाई की। शुरुआती छानबीन में आरोप सही पाए जाने पर मुकदमा दर्ज कराया गया। यहां बता दें कि आरोपी गजेंद्र राय वर्तमान में संतकबीरनगर जिले में तैनात हैं। मुंडेरवा के प्रभारी निरीक्षक सुशील कुमार शुक्ल ने बताया कि इसकी तफ्तीश में सही और गलत का फर्क सामने आ जाएगा।
इस संबंध में एसपी हेमराज मीणा का कहना है कि सात साल से अधिक पुराना मामला है। जिसके खिलाफ केस दर्ज हुआ था उसकी शिकायत पर कार्रवाई हुई है। तफ्तीश में सब कुछ साफ हो जाएगा।
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बस्ती। वर्ष 2012 में मुंडेरवा थाने में कच्ची शराब की फर्जी बरामदगी दिखाने का प्रकरण प्रकाश में आया है। भ्रष्टाचार निवारण संगठन इकाई गोरखपुर के निरीक्षक चंद्रेश यादव ने इस संबंध में रविवार को तत्कालीन थानाध्यक्ष गजेंद्र राय सहित सभी छह पुलिस कर्मियों पर मुंडेरवा थाने में मुकदमा दर्ज कराया है जिसमें गलत तरीके से फंसाना, लोक सेवक का विधि विरुद्ध आचरण, मिथ्या साक्ष्य, गलत तरीके से संपत्ति जब्त करने सहित अन्य आरोप लगाए गए हैं।
12 जून 2012 को हटवा गांव में पुलिस ने दबिश देकर कच्ची शराब की बरामदगी की थी। जिसके संबंध में आबकारी एक्ट का मुकदमा पंजीकृत किया गया। बाद में भ्रष्टाचार निवारण संगठन इकाई गोरखपुर में शिकायत की गई कि फर्जी मुचलका तैयार कर सादे कागज पर आरोपियों का हस्ताक्षर बनवा लिया गया और थाने से छोड़ने के नाम पर छह हजार रुपये लिए गए। विजिलेंस के निरीक्षक चंद्रेश यादव ने जो तहरीर दी, उसमें आरोप है कि गाजीपुर जिले के थाना भावरकोल के नकटी निवासी गजेंद्र राय तत्कालीन थानाध्यक्ष थे। गजेंद्र राय के अलावा एसआई पारसनाथ सिंह यादव, आरक्षी राजमंगल यादव, जयप्रकाश राय, रिक्रूट आरक्षी श्रवण कुमार और एसआई योगेश कुमार सिंह ने मिलकर फर्जी तरीके से कार्रवाई की। शुरुआती छानबीन में आरोप सही पाए जाने पर मुकदमा दर्ज कराया गया। यहां बता दें कि आरोपी गजेंद्र राय वर्तमान में संतकबीरनगर जिले में तैनात हैं। मुंडेरवा के प्रभारी निरीक्षक सुशील कुमार शुक्ल ने बताया कि इसकी तफ्तीश में सही और गलत का फर्क सामने आ जाएगा।
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इस संबंध में एसपी हेमराज मीणा का कहना है कि सात साल से अधिक पुराना मामला है। जिसके खिलाफ केस दर्ज हुआ था उसकी शिकायत पर कार्रवाई हुई है। तफ्तीश में सब कुछ साफ हो जाएगा।
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