{"_id":"597c77054f1c1bb7118b46f0","slug":"51501329157-basti-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो वीडीओ के खिलाफ दर्ज होगा केस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो वीडीओ के खिलाफ दर्ज होगा केस
Updated Sat, 29 Jul 2017 05:22 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बस्ती। मृत्यु प्रमाण-पत्र में छेड़छाड़ करना विक्रमजोत ब्लॉक के ग्राम पंचायत नटौवा के दो ग्राम विकास अधिकारियों को मंहगा पड़ा। एसडीएम हर्रैया की जांच में दोनों के दोषी पाए जाने पर डीपीआरओ गोपालजी ओझा ने बीडीओ विक्रमजोत को सेक्रेटरियों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज कराने को लिखा है। साथ जिला विकास अधिकारी से दोनों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की सिफारिश की है। यह कार्रवाई एक साल पहल जांच रिपोर्ट के आधार पर हुई।
ग्राम चिरिहिया निवासी बद्री प्रसाद एवं दुखहरन पिता-पुत्र के फर्जी मृत्यु प्रमाण-पत्र के बारे एडीएम से शिकायत की गई। जांच हर्रैया के एसडीएम ने की। जांच में जो तथ्य सामने आए वह काफी चौकाने वाले रहे। मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी करने की तिथि 22 अक्टूबर 1954 जांच में पाई गई, जबकि विक्रमजोत ब्लॉक का गठन दो फरवरी 1972 को हुई। इस तरह ब्लॉक गठन होने के 18 साल पहले मृत्यु प्रमाण-पत्र बना दिया। अभिलेखों से भी पता चला कि मृत्यु प्रमाण-पत्र फर्जी है। जांच 28 जुुलाई 2016 को हुई। डीपीआरओ ने बताया कि एसडीएम की जांच रिपोर्ट में ग्राम विकास अधिकारी विमलचंद्र मिश्र एवं अजय कुमार शुक्ल को दोषी बताया गया और कार्रवाई करने की संस्तुति की गई। बताया कि चूंकि दोनों सचिव विकास विभाग के हैं, इस लिए मुकदमा और अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति बीडीओ व्रिकमजोत और जिला विकास अधिकारी से की गई है।
विज्ञापन
ग्राम चिरिहिया निवासी बद्री प्रसाद एवं दुखहरन पिता-पुत्र के फर्जी मृत्यु प्रमाण-पत्र के बारे एडीएम से शिकायत की गई। जांच हर्रैया के एसडीएम ने की। जांच में जो तथ्य सामने आए वह काफी चौकाने वाले रहे। मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी करने की तिथि 22 अक्टूबर 1954 जांच में पाई गई, जबकि विक्रमजोत ब्लॉक का गठन दो फरवरी 1972 को हुई। इस तरह ब्लॉक गठन होने के 18 साल पहले मृत्यु प्रमाण-पत्र बना दिया। अभिलेखों से भी पता चला कि मृत्यु प्रमाण-पत्र फर्जी है। जांच 28 जुुलाई 2016 को हुई। डीपीआरओ ने बताया कि एसडीएम की जांच रिपोर्ट में ग्राम विकास अधिकारी विमलचंद्र मिश्र एवं अजय कुमार शुक्ल को दोषी बताया गया और कार्रवाई करने की संस्तुति की गई। बताया कि चूंकि दोनों सचिव विकास विभाग के हैं, इस लिए मुकदमा और अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति बीडीओ व्रिकमजोत और जिला विकास अधिकारी से की गई है।
विज्ञापन