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संशोधित ---प्रभारी मंत्री के जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल
Updated Thu, 29 Nov 2018 12:17 AM IST
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प्रभारी मंत्री के जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल
जिला व महिला अस्पताल में नहीं हो रहा अल्ट्रासाउंड
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। सरकार भले ही स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर हो, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते शासन की मंशा पर पानी फिर रहा है। जिले के सरकारी अस्पतालों में पहुंच कर मरीज खुद को ठगा महसूस कर रहा है। जबकि इस जिले के स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रभारी मंत्री के रूप में सिद्धार्थनाथ सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है। बावजूद इसके जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है।
महिला चिकित्सालय का आलम यह है कि यहां कई महीने से अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लगा हुआ है, सूत्रों के अनुसार यहां तैनात चिकित्सक छुट्टी पर चल रहे हैं। इस वजह से लोगों को ओपेक चिकित्सालय कैली जाना पड़ता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को काफी असुविधा हो रही है, यदि वे बाहर अल्ट्रासाउंड कराती हैं तो उन्हें इसके बदलें में छह से सात सौ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यही स्थिति जिला अस्पताल की भी है, यहां पर अल्ट्रासाउंड के लिए डॉक्टर ही नहीं है। थाइरॉइड की जांच की यदि बात करें तो यह जांच जिला महिला अस्पताल में है ही नहीं, जबकि लगभग 90 प्रतिशत महिलाओं को डाक्टर थाइरॉइड जांच लिखते हैं। जिला अस्पताल में यह जांच पहले होती थी, लेकिन कई महीने से मशीन खराब होने के कारण यह व्यवस्था ठप पड़ी है, इसके लिए भी इन्हें ओपेक चिकित्सालय कैली जाना पड़ता है। यदि बाहर पैथॉलजी से वे जांच कराती हैं तो इसके लिए उन्हें पांच से सात सौ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। टीवी अस्पताल में पिछले कई दिनों से एक्सरे की जांच ठप है, कारण कि एक्स-रे प्लेट ही यहां नहीं हैं। ऐसे में इन अस्पतालों में पहुंचकर मरीज खुद को ठगा महसूस करता है। शहर की अपर्णा मिश्रा कहती हैं सरकारी अस्पतालों में सारी सुविधाएं मौजूद हैं इसका दवा किया जाता है लेकिन पहुंचने पर कुछ और ही नजर आता है। यहां डॉक्टर जहां बाहर की दवा लिखते हैं, वहीं, खून की जांच के लिए प्राइवेट पैथॉलजी पर जाना पड़ता है। बबिता शुक्ला कहती हैं कि जब भी वे महिला अस्पताल आती हैं अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लगा मिलता है, कहा कि मजबूरन प्राइवेट अल्ट्रासाउंड सेंटर पर जाना पड़ता है। प्रीती सिंह रावत व नीतू श्रीवास्तव ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार तो हुआ है, लेकिन जितने की अपेक्षा थी, वह अभी बाकी है। बताईं कि अस्पताल में थाइरॉइड की जांच सुविधा जरूरती हैं क्योंकि यह बीमारी महिलाओं में अधिक होती है।
अधिकारियों की सुनिए
एडी हेल्थ डॉ रंजगी दूबे कहते हैं कि मुझे इसकी जानकारी नहीं है, निरीक्षण कर स्थित का जायजा लूंगा। वहीं, एसआईसी महिला अस्पताल डॉ एके सिंह ने कहा कि डॉक्टर छुट्टी पर हैं, इस वजह से अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा है। कहा कि हमारे यहां थाइरॉइड की जांच नहीं होती है, इसके लिए जिला अस्पताल या फिर ओपेक चिकित्सालय कैली में जांच करा लें। जिला अस्पताल के प्रभारी एसआईसी डॉ राम प्रकाश कहते हैं कि चिकित्सक न होने से यहां अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहा है, कहा कि थाइरॉइड जांच हो रही थी।
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जिला व महिला अस्पताल में नहीं हो रहा अल्ट्रासाउंड
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। सरकार भले ही स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर हो, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते शासन की मंशा पर पानी फिर रहा है। जिले के सरकारी अस्पतालों में पहुंच कर मरीज खुद को ठगा महसूस कर रहा है। जबकि इस जिले के स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रभारी मंत्री के रूप में सिद्धार्थनाथ सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है। बावजूद इसके जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है।
महिला चिकित्सालय का आलम यह है कि यहां कई महीने से अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लगा हुआ है, सूत्रों के अनुसार यहां तैनात चिकित्सक छुट्टी पर चल रहे हैं। इस वजह से लोगों को ओपेक चिकित्सालय कैली जाना पड़ता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को काफी असुविधा हो रही है, यदि वे बाहर अल्ट्रासाउंड कराती हैं तो उन्हें इसके बदलें में छह से सात सौ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यही स्थिति जिला अस्पताल की भी है, यहां पर अल्ट्रासाउंड के लिए डॉक्टर ही नहीं है। थाइरॉइड की जांच की यदि बात करें तो यह जांच जिला महिला अस्पताल में है ही नहीं, जबकि लगभग 90 प्रतिशत महिलाओं को डाक्टर थाइरॉइड जांच लिखते हैं। जिला अस्पताल में यह जांच पहले होती थी, लेकिन कई महीने से मशीन खराब होने के कारण यह व्यवस्था ठप पड़ी है, इसके लिए भी इन्हें ओपेक चिकित्सालय कैली जाना पड़ता है। यदि बाहर पैथॉलजी से वे जांच कराती हैं तो इसके लिए उन्हें पांच से सात सौ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। टीवी अस्पताल में पिछले कई दिनों से एक्सरे की जांच ठप है, कारण कि एक्स-रे प्लेट ही यहां नहीं हैं। ऐसे में इन अस्पतालों में पहुंचकर मरीज खुद को ठगा महसूस करता है। शहर की अपर्णा मिश्रा कहती हैं सरकारी अस्पतालों में सारी सुविधाएं मौजूद हैं इसका दवा किया जाता है लेकिन पहुंचने पर कुछ और ही नजर आता है। यहां डॉक्टर जहां बाहर की दवा लिखते हैं, वहीं, खून की जांच के लिए प्राइवेट पैथॉलजी पर जाना पड़ता है। बबिता शुक्ला कहती हैं कि जब भी वे महिला अस्पताल आती हैं अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लगा मिलता है, कहा कि मजबूरन प्राइवेट अल्ट्रासाउंड सेंटर पर जाना पड़ता है। प्रीती सिंह रावत व नीतू श्रीवास्तव ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार तो हुआ है, लेकिन जितने की अपेक्षा थी, वह अभी बाकी है। बताईं कि अस्पताल में थाइरॉइड की जांच सुविधा जरूरती हैं क्योंकि यह बीमारी महिलाओं में अधिक होती है।
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अधिकारियों की सुनिए
एडी हेल्थ डॉ रंजगी दूबे कहते हैं कि मुझे इसकी जानकारी नहीं है, निरीक्षण कर स्थित का जायजा लूंगा। वहीं, एसआईसी महिला अस्पताल डॉ एके सिंह ने कहा कि डॉक्टर छुट्टी पर हैं, इस वजह से अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा है। कहा कि हमारे यहां थाइरॉइड की जांच नहीं होती है, इसके लिए जिला अस्पताल या फिर ओपेक चिकित्सालय कैली में जांच करा लें। जिला अस्पताल के प्रभारी एसआईसी डॉ राम प्रकाश कहते हैं कि चिकित्सक न होने से यहां अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहा है, कहा कि थाइरॉइड जांच हो रही थी।
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