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47 गांवों में इंसेफेलाइटिस का दंश

Sun, 13 Aug 2017 11:27 PM IST
Updated Sun, 13 Aug 2017 11:27 PM IST
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47 गांवों में इंसेफेलाइटिस का दंश
47 गांवों में इंसेफेलाइटिस का दंश
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बस्ती। जिले के 47 जेई, एईएस प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग फॉगिंग और एंटी लार्वा छिड़काव की औपचारिकता पूरी कर चुका है। एक पखवारे में छह बच्चे एईएस की चपेट में आए हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में दो बच्चों की मौत दो दिन पहले तथा एक की एक हफ्ते पहले हुई है।
जुुलाई और अगस्त इंसेफेलाइटिस के लिए संवेदनशील हैं। गांवों में गंदगी है लेकिन स्वास्थ्य महकमा कहता है कि सरकारी विद्यालयों में प्रार्थना स्थल पर भी सफाई का संकल्प दिलाया जा रहा है। जागरूकता के लिए पर्चे आदि भी बांटे जा रहे हैं। बहादुरपुर प्रतिनिधि के मुताबिक नगर थाना क्षेत्र के रौसिंघपर गांव में उमाकांत की 10 वर्षीय बेटी सीमा को मस्तिष्क बुखार होने से जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर किया गया है। जबकि जयकरन की 13 वर्षीय अनुराधा की मौत करीब एक सप्ताह पहले मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में हो गई। बावजूद साफ-सफाई की स्थिति बदतर है। यहां छिड़काव भी नहीं किया गया है।
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घोषणा की लेकिन धरातल पर नहीं
बभनान प्रतिनिधि के मुताबिक गौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सुजिया गांव में 2015 में जेई से तीन वर्षीय अब्दुल रब, चार वर्षीय समीर अहमद व पांच वर्षीय समीर पुत्र अब्दुल साजिद की मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में मौत हो गई थी। तब स्वास्थ्य महकमे केो जिम्मेदारों ने वादा किया कि गांव में स्वच्छ जल के लिए टंकी और घरों के आसपास नालियों का निर्माण होगा। पानी टंकी का निर्माण हुआ जरूर, मगर इससे एक बूंद पानी की आपूर्ति नहीं की जा सकी। अब्दुल कलाम का कहना है कि ठेकेदारों ने आनन-फानन कमीशनबाजी के चक्कर में छोटी टंकी का निर्माण तो कर दिया लेकिन उसे चलाने के लिए मोटर और टोटी नहीं लगाई गई। सात माह पहले पैकोलिया गांव के यश पुत्र रामसिंह व ग्राम सूअर बरवा की ज्योति मौर्य का भी जेई से गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कालेज में मौत हो गई थी। यहां भी स्वास्थ्य सुविधाएं नदारद हैं। गांव वालों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग कभी-कभार गांव में दवा का वितरण करा देते हैं।
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गौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी राम आसरे सरोज का कहना है कि जेई-एईएस को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्कता बरत रहा है। बभनान बीआरसी पर अध्यापकों के साथ बैठक कर उन्हें जागरूक भी किया गया। ब्लॉक पर एएनएम, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सफाई कर्मियों को बीमारियों के बारे में प्रशिक्षित किया गया।
अन्य विभाग निभाएं जिम्मेदारी: सीएमओ
सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग तो अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है, मगर इससे जुड़े अन्य विभागों को भी सक्रिय होना होगा। केवल उपचार, फॉगिंग और एंटी लार्वा का छिड़काव कर सकता है, मगर पेयजल, सफाई का शौचालय के लिए अन्य विभाग को पहल करनी चाहिए। अगस्त में जिले के किसी भी अस्पताल में कोई मौत नहीं हुई है।

स्वाइन फ्लू की दस्तक
जेई, एईएस के बाद स्वाइन फ्लू ने भी दस्तक दी है। शहर के पिकौरा बक्स निवासी 70 वर्षीय वीरेंद्र श्रीवास्तव की लखनऊ मेडिकल कॉलेज में दो दिन पहले मौत हो चुकी है। जबकि इस बीमारी की चपेट में एक व्यक्ति का इलाज केजीएमयू में चल रहा है। सीएमओ डॉ. कुशवाहा ने कहा कि बीमारी के संज्ञान में आने के बाद टीम उक्त मोहल्ले में पहुंची थी। परिवार के सदस्यों की जांच आदि की, मगर सभी स्वस्थ पाए गए।

बंद मिला एएमए की मोबाइल
जेई प्रभावित गांवों में जिला पंचायत ने क्या किया? यह जानने के लिए जब मोबाइल नंबर 8601804922 पर अपर मुख्य अधिकारी यूएस सिंह से बात करने का प्रयास किया गया तो वह बंद मिला।
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