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हत्या के जुर्म में दो महिलाओं को उम्रकैद

Mon, 30 Jul 2018 11:57 PM IST
Updated Mon, 30 Jul 2018 11:57 PM IST
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हत्या के जुर्म में दो महिलाओं को उम्रकैद
हत्या के जुर्म में दो महिलाओं को उम्रकैद
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12 वर्ष पूर्व हर्रैया में हुई थी अधिवक्ता की हत्या
फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय ने सुनाया फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक द्वितीय कविता मिश्रा ने अधिवक्ता की हत्या के जुर्म में दोषी करार देते हुए परिवार की दो महिलाओं को उम्र कैद की सजा सुनाई है। प्रत्येक पर 15-15 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जिसे न अदा करने पर डेढ़ वर्ष अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
सहायक शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) राम अनुज भाष्कर ने कोर्ट में घटना का विवरण रखा। बताया कि घटना हर्रैया थाना क्षेत्र के मुरादीपुर की है। इसकी रिपोर्ट बेटे दिनेश कुमार तिवारी ने थाने में दर्ज कराई। इसमें कहा गया कि मुरादीपुर गांव के वेद प्रकाश सिंह नशा करते थे। घर की जमीन बेच रहे थे। और जमीन न बिके इसके लिए वेद प्रकाश की पत्नी बीना सिंह ने अधिवक्ता राम ललित तिवारी से संपर्क किया। इस कार्य में अधिवक्ता ने 25 हजार रुपये अपने पास से भी खर्च करने की बात कही थी। उसी रुपये की मांग के लिए बराबर तकादा किया करते थे। इससे मनमुटाव हो गया था। अधिवक्ता की राइस मिल मुरादीपुर में थी, जहां रखवाली के लिए रात में आ जाते थे। 10 जुलाई 2006 को सुबह छह बजे मुरादीपुर के ध्रुव सिंह ने बताया कि वेद प्रकाश के घर के पीछे वकील साहब की लाश पड़ी है। मुकदमा दर्ज होने के बाद वेद प्रकाश सिंह उनकी पत्नी बीना सिंह और निर्मला सिंह पत्नी प्रेम प्रकाश सिंह समेत तीन पर आरोप पत्र दाखिल हुआ। मुकदमे के दौरान वेद प्रकाश सिंह की मौत हो गई। वादी और गवाहों के बयान के बाद बचाव पक्ष से विषैला पदार्थ खाने से मौत तथा रंजिशन फंसाए जाने की बात कही गई। गवाहों के बयान तथा सबूतों के आधार पर न्यायाधीश ने हत्या के जुर्म में दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।
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सहारा इंडिया को पौने आठ लाख भुगतान का आदेश
बस्ती। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष राम दरश व सदस्य महादेव प्रसाद दुबे ने एक मामले में सहारा इंडिया को ग्राहक के पक्ष में सात लाख 76 हजार 500 रुपये देने का आदेश दिया है। इसके अलावा मुकदमे का खर्च और मानसिक कष्ट के लिए आठ हजार रुपये हर्जाना भी लगाया है।
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नगर पंचायत हर्रैया के हरिरहिया नगर वार्ड पांच के हरिराम सिंह ने फोरम में अधिवक्ता रविशरण सिंह के माध्यम से परिवाद दाखिल किया। कहा कि सेक्टर मैनेजर सहारा इंडिया शाखा हर्रैया में यूनीक स्कीम के तहत वर्ष 2007 की विभिन्न तिथियों में 10 वर्ष के लिए रकम जमा की। जिसकी परिपक्वता सात लाख 76 हजार 500 रुपये थी। अवधि पूरी होने के बावजूद कंपनी की ओर से भुगतान करने में हीलाहवाली की जाती रही है। मजबूरन कानूनी नोटिस देकर भुगतान न होने पर सेक्टर मैनेजर हर्रैया तथा सहारा इंडिया कामर्शियल कमांड ऑफिस लखनऊ के खिलाफ परिवाद दाखिल किया। विपक्षी का कहना था कि सेवा में कोई कमी नहीं थी। न ही रकम देने में हीलाहवाली की गई। पक्षों को सुनने के बाद फोरम ने परिवाद स्वीकार कर उक्त रकम के भुगतान आदेश के 60 दिन के भीतर करने के निर्देश दिए हैं। समय से भुगतान नहीं करने पर सात प्रतिशत ब्याज भी अदा करना होगा।
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