{"_id":"5b48e0c14f1c1b52748b468f","slug":"181531502785-basti-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकार के प्रतिबंध क्रियान्वयन को बाजार तैयार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकार के प्रतिबंध क्रियान्वयन को बाजार तैयार
Updated Fri, 13 Jul 2018 11:11 PM IST
विज्ञापन
नगर पालिका पहुचे पॉलीथिन व्यापारी।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बस्ती। सरकार प्रदेश को पॉलीथिन मुक्त करने की घोषणा कर चुकी है। प्रथम चरण में 50 माइक्रान के नीचे के सभी पॉलीथिन बैग 15 जुलाई से प्रतिबंधित कर दिए जाएंगे। पर्यावरण के लिए घातक साबित हो रहे इन पॉलीथिन बैगों पर प्रतिबंध का समर्थन आम लोगों के साथ इसके व्यापार से जुड़े व इसके प्रयोग करने वाले व्यापारी भी हैं।
शहर में 50 माइक्रान से कम मोटाई के पॉलीथिन की खपत करीब चार से पांच टन है। इसके अलावा जिले में इसके 30 टन का व्यवसाय हर दिन होता है। वैसे तो अपने जिले में इसकी कोई फैक्ट्री नहीं है, मगर इसके थोक व्यापारी जरूर हैं, जो कानपुर से माल लेकर आते हैं और फिर फुटकर व्यवसाय करते हैं।
शुक्रवार को अमर उजाला टीम जब पॉलीथिन पर प्रतिक्रिया को निकली तो नगर पालिका में इस व्यवसाय से जुड़े पुरानी बस्ती के थोक व्यापारियों ने दो टूक कहा कि देश व पर्यावरण हित से कोई समझौता नहीं है। इसके लिए चाहे जो भी नुकसान उठाना पड़े हम तैयार हैं।
विज्ञापन
पुरानी बस्ती के पॉलीथिन के थोक व्यापारी बृजकिशोर कहते हैं कि जब योगी सरकार ने इसके 15 जुलाई से बंदी की घोषणा की थी उसी दिन से कारोबार ठप कर दिया। जो माल रखा है उसकी खपत कैसे होगी इसकी चिंता नहीं है, बल्कि उसको कैसे डिस्पोज आफ करना है। इसे समझने पालिका के जिम्मेदारों के पास पहुंचे हैं।
पॉलीथिन के थोक व्यवसायी संतोष कुमार, अंकुर गुप्ता, अनूप कुमार, सचिन भाटिया और सतनरायन गुप्ता आदि कहते हैं कि सभी जीते तो वर्तमान में हैं, मगर भविष्य के लिए सब कुछ एकत्रित करते हैं, अब जब सरकार की मंशा पर्यावरण को सुरक्षित करने की है और उसमें पॉलीथिन के कारोबारियों की भागीदारी जरूरी है, मगर पिछली सरकार की तरह ही इस बार न हो जाए कि हम तो कारोबार बंद कर दें, मगर फैक्ट्रियां रन करती रहें। बाजार में बाहर से माल आए और हम सड़क पर घूमे। व्यापारियों ने सलाह दी है कि सरकार को सबसे पहले फैक्ट्रियों पर ताला लगवाना चाहिए, जिससे बाजार में यह पहुंच ही न सके। पॉलीथिन का प्रयोग करने वाले व्यापारी धीरज सचदेवा कहते हैं कि प्रतिबंध जरूरी है मगर छोटे व्यापारियों पर इसे लादने के बजाय फैक्ट्री पर प्रतिबंध लगाना होगा। ज्यादातर व्यापारी जागरूक हैं। पॉलीथिन का प्रयोग पूरी तरह बंद कर चुके हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीके श्रीवास्तव कहते हैं कि सरकार का यह निर्णय समाज हित में है। इससे स्वच्छता के साथ स्वास्थ्य को भी लाभ मिलेगा। क्योंकि जो पॉलीथिन प्रयोग में है उससे तमाम गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। पर्यावरण तो दूषित होता ही है, धरती भी बंजर हो रही है।
चौपाल में पॉलीथिन बंदी के लिए किया जागरूक
रुधौली। 14 जुलाई की मध्यरात्रि से प्रदेश में 50 माइक्रॉन से कम के पॉलीथिन के प्रयोग पर प्रतिबंध लग जाएगा। इसे सफल बनाने के लिए रुधौली चेयरमैन धीरसेन तीन दिनों से लगातार चौपाल लगाकर लोगों की समस्याएं सुन रहे और पॉलीथिन बंदी के लिए जागरूक कर रहे हैं।
नगरा पंचायत के अंबेडकर नगर वार्ड में बृहस्पतिवार देर शाम चौपाल लगाई गई। यहां नगर पंचायत अध्यक्ष जहां समस्याओं से रूबरू हुए, वहीं पालीथिन के प्रतिबंध के लिए जागरूक किया। इसी प्रकार शुक्रवार सुबह शहीद कीर्तिकर निषाद नगर वार्ड में चौपाल लगाकर लोगों को पॉलीथिन के बंदी के प्रति जागरूक किया गया। लोगों का आह्वान किया गया कि वे खरीदारी के लिए घर से झोला लेकर जाएं। इस दौरान जागरूकता अभियान में वार्ड सदस्य चंदशेखर निषाद, विवेक सिंह, प्रतिनिधि गिरीश चंद्र गुड्डू, लिपिक श्याम बाबू श्रीवास्तव, मोहन श्रीवास्तव, हरेंद्र श्रीवास्तव और राज सिंह आदि उपस्थित थे।
विज्ञापन
शहर में 50 माइक्रान से कम मोटाई के पॉलीथिन की खपत करीब चार से पांच टन है। इसके अलावा जिले में इसके 30 टन का व्यवसाय हर दिन होता है। वैसे तो अपने जिले में इसकी कोई फैक्ट्री नहीं है, मगर इसके थोक व्यापारी जरूर हैं, जो कानपुर से माल लेकर आते हैं और फिर फुटकर व्यवसाय करते हैं।
विज्ञापन
शुक्रवार को अमर उजाला टीम जब पॉलीथिन पर प्रतिक्रिया को निकली तो नगर पालिका में इस व्यवसाय से जुड़े पुरानी बस्ती के थोक व्यापारियों ने दो टूक कहा कि देश व पर्यावरण हित से कोई समझौता नहीं है। इसके लिए चाहे जो भी नुकसान उठाना पड़े हम तैयार हैं।
विज्ञापन
पुरानी बस्ती के पॉलीथिन के थोक व्यापारी बृजकिशोर कहते हैं कि जब योगी सरकार ने इसके 15 जुलाई से बंदी की घोषणा की थी उसी दिन से कारोबार ठप कर दिया। जो माल रखा है उसकी खपत कैसे होगी इसकी चिंता नहीं है, बल्कि उसको कैसे डिस्पोज आफ करना है। इसे समझने पालिका के जिम्मेदारों के पास पहुंचे हैं।
पॉलीथिन के थोक व्यवसायी संतोष कुमार, अंकुर गुप्ता, अनूप कुमार, सचिन भाटिया और सतनरायन गुप्ता आदि कहते हैं कि सभी जीते तो वर्तमान में हैं, मगर भविष्य के लिए सब कुछ एकत्रित करते हैं, अब जब सरकार की मंशा पर्यावरण को सुरक्षित करने की है और उसमें पॉलीथिन के कारोबारियों की भागीदारी जरूरी है, मगर पिछली सरकार की तरह ही इस बार न हो जाए कि हम तो कारोबार बंद कर दें, मगर फैक्ट्रियां रन करती रहें। बाजार में बाहर से माल आए और हम सड़क पर घूमे। व्यापारियों ने सलाह दी है कि सरकार को सबसे पहले फैक्ट्रियों पर ताला लगवाना चाहिए, जिससे बाजार में यह पहुंच ही न सके। पॉलीथिन का प्रयोग करने वाले व्यापारी धीरज सचदेवा कहते हैं कि प्रतिबंध जरूरी है मगर छोटे व्यापारियों पर इसे लादने के बजाय फैक्ट्री पर प्रतिबंध लगाना होगा। ज्यादातर व्यापारी जागरूक हैं। पॉलीथिन का प्रयोग पूरी तरह बंद कर चुके हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीके श्रीवास्तव कहते हैं कि सरकार का यह निर्णय समाज हित में है। इससे स्वच्छता के साथ स्वास्थ्य को भी लाभ मिलेगा। क्योंकि जो पॉलीथिन प्रयोग में है उससे तमाम गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। पर्यावरण तो दूषित होता ही है, धरती भी बंजर हो रही है।
चौपाल में पॉलीथिन बंदी के लिए किया जागरूक
रुधौली। 14 जुलाई की मध्यरात्रि से प्रदेश में 50 माइक्रॉन से कम के पॉलीथिन के प्रयोग पर प्रतिबंध लग जाएगा। इसे सफल बनाने के लिए रुधौली चेयरमैन धीरसेन तीन दिनों से लगातार चौपाल लगाकर लोगों की समस्याएं सुन रहे और पॉलीथिन बंदी के लिए जागरूक कर रहे हैं।
नगरा पंचायत के अंबेडकर नगर वार्ड में बृहस्पतिवार देर शाम चौपाल लगाई गई। यहां नगर पंचायत अध्यक्ष जहां समस्याओं से रूबरू हुए, वहीं पालीथिन के प्रतिबंध के लिए जागरूक किया। इसी प्रकार शुक्रवार सुबह शहीद कीर्तिकर निषाद नगर वार्ड में चौपाल लगाकर लोगों को पॉलीथिन के बंदी के प्रति जागरूक किया गया। लोगों का आह्वान किया गया कि वे खरीदारी के लिए घर से झोला लेकर जाएं। इस दौरान जागरूकता अभियान में वार्ड सदस्य चंदशेखर निषाद, विवेक सिंह, प्रतिनिधि गिरीश चंद्र गुड्डू, लिपिक श्याम बाबू श्रीवास्तव, मोहन श्रीवास्तव, हरेंद्र श्रीवास्तव और राज सिंह आदि उपस्थित थे।