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बस्ती में मिला प्रोजेरिया का रोगी बच्चा
Updated Fri, 28 Jul 2017 11:31 PM IST
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बस्ती। अभिताभ बच्चन ने अपनी बहुचर्चित फिल्म ‘पा’ में जिस प्रोजेरिया नामक बीमारी के बारे से परिचित करा कर मेडिकल साइंस की दुनिया में हलचल मचा दी थी उसी बीमारी से पीड़ित एक बच्चा बस्ती में भी मिला है। हालांकि डॉक्टर इसे प्रथम दृष्टया तो प्रोजीरिया रोगी मान रहे हैं, मगर अभी इसके जीन की जांच के लिए पीजीआई रेफर कर दिया है। डॉक्टर का मानना है कि जो लक्षण इस बच्चे में हैं। वह वास्तव में प्रोजीरिया के रोगियों में पाए जाते हैं।
चाइल्ड लाइन ने बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीके श्रीवास्तव से संपर्क किया। इसके बाद शहर में रहने वाले परिवार के लोग बच्चे को लेकर पहुंचे। जांच के बाद डॉक्टर ने इसे उक्त रोग से पीड़ित होने का अनुमान लगाकर एक वर्षीय बच्चे के जीन जांच के लिए पीजीआई लखनऊ भेजा है। डॉक्टर बताते हैं कि अभी जांच रिपोर्ट नहीं आई है, मगर जो लक्षण इस बच्चे में पाए गए हैं। वह प्रोजीरिया के ही हैं। डॉक्टर ने कहा कि जब तक पूरी तरह पुष्टि न हो जाए तब तक इसे संदिग्ध प्रोजीरिया का मानकर इलाज किया जा रहा है। डॉक्टर कहते हैं कि मेडिकल सर्वे में यह बात सामने आई है कि दुनिया में इस रोग के अब तक कुल 137 बच्चे पाए गए हैं।
क्या है प्रोजीरिया
यह फिजियोलॉजी की बीमारी है। इसमें हर एक वर्ष की उम्र पर आठ वर्ष की तेजी से शरीर में बदलाव आता है। सिर्फ दस वर्ष की आयु में पीड़ित के शरीर में 50-60 वर्ष की उम्र जैसे बदलाव आ जाते हैं। शरीर का विकास नहीं होता है। जबकि बाल झड़ने, चमड़े में झुर्रियां व दांतों के गिरने के साथ बुढ़ापे के लक्षण तेजी से आते हैं। हड्डियां गलने लगती हैं। हालांकि इन मरीजों के दिमाग में लेप्रनिन नामक प्रोटीन बनता रहता है, ऐसे में दिमाग संतुलित रहता है, लेकिन अन्य अंग बुढ़ापे की वजह से तेजी से बढ़ते हैं। इन मरीजों की पैदाइश बिल्कुल सामान्य होती है, जबकि बड़े होने पर बीमारी के लक्षण अचानक उभरते हैं।
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चाइल्ड लाइन ने बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीके श्रीवास्तव से संपर्क किया। इसके बाद शहर में रहने वाले परिवार के लोग बच्चे को लेकर पहुंचे। जांच के बाद डॉक्टर ने इसे उक्त रोग से पीड़ित होने का अनुमान लगाकर एक वर्षीय बच्चे के जीन जांच के लिए पीजीआई लखनऊ भेजा है। डॉक्टर बताते हैं कि अभी जांच रिपोर्ट नहीं आई है, मगर जो लक्षण इस बच्चे में पाए गए हैं। वह प्रोजीरिया के ही हैं। डॉक्टर ने कहा कि जब तक पूरी तरह पुष्टि न हो जाए तब तक इसे संदिग्ध प्रोजीरिया का मानकर इलाज किया जा रहा है। डॉक्टर कहते हैं कि मेडिकल सर्वे में यह बात सामने आई है कि दुनिया में इस रोग के अब तक कुल 137 बच्चे पाए गए हैं।
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क्या है प्रोजीरिया
यह फिजियोलॉजी की बीमारी है। इसमें हर एक वर्ष की उम्र पर आठ वर्ष की तेजी से शरीर में बदलाव आता है। सिर्फ दस वर्ष की आयु में पीड़ित के शरीर में 50-60 वर्ष की उम्र जैसे बदलाव आ जाते हैं। शरीर का विकास नहीं होता है। जबकि बाल झड़ने, चमड़े में झुर्रियां व दांतों के गिरने के साथ बुढ़ापे के लक्षण तेजी से आते हैं। हड्डियां गलने लगती हैं। हालांकि इन मरीजों के दिमाग में लेप्रनिन नामक प्रोटीन बनता रहता है, ऐसे में दिमाग संतुलित रहता है, लेकिन अन्य अंग बुढ़ापे की वजह से तेजी से बढ़ते हैं। इन मरीजों की पैदाइश बिल्कुल सामान्य होती है, जबकि बड़े होने पर बीमारी के लक्षण अचानक उभरते हैं।
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