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Basti News: उल्टी-दस्त व तेज बुखार के 170 मरीज भर्ती... पहुंचे कमिश्नर और सीएमओ
Wed, 21 Jun 2023 12:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 21 Jun 2023 12:31 AM IST
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बस्ती। भीषण गर्मी के चलते अस्पतालों में मरीजों का दबाव कम नहीं हुआ है। पिछले चौबीस घंटे में जिला अस्पताल में 80 और महर्षि वशिष्ठ मेडिकल काॅलेज के ओपेक चिकित्सालय कैली में 90 मिलाकर उल्टी-दस्त के कुल 170 मरीज भर्ती किए गए। मंगलवार को मंडलायुक्त अखिलेश सिंह ने जिला अस्पताल और सीएमओ आरपी मिश्र ने ओपेक कैली में चिकित्सा व्यवस्था का जायजा लिया। पिछले चौबीस घंटे में किसी मरीज की मौत की खबर नहीं मिली। केवल जिला अस्पताल से एक मरीज रेफर पाया गया। टीम ने दोनों अस्पतालों की पड़ताल की।
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जिला अस्पताल, समय- 12.40 बजे
आयुक्त अखिलेश सिंह जिला अस्पताल पहुंचे। इमरजेंसी में भर्ती मरीजों के बारे में जानकारी लेकर मेडिकल वार्ड की ओर बढ़ गए। अस्पताल के अधिकारी और स्टाॅफ उनके आगे-पीछे लगा रहा। मेडिकल काॅलेज के दोनों वार्डों में मरीजों की तादाद बढ़ी रही। अधिकतर मरीज उल्टी-दस्त, पेट दर्द और तेज बुखार के बताए गए। कमिश्नर ने वार्ड के एक-एक मरीज का हाल पूछा। अस्पताल की ओर से मिलने वाली दवाएं एवं अन्य सुविधाओं के बारे में पूछताछ की। एक-एक कर मरीजों ने जब सच उजागर किया तो कमिश्नर भी दंग रह गए। मरीजों की तरफ से बताया गया कि उपचार के लिए आवश्यक दवाएं बाहर से मंगानी पड़ रही है। यह सुनकर वहां मौजूद अस्पताल के जिम्मेदार अफसर बंगले झांकने लगे। कमिश्नर ने नाराजगी जाहिर की। सख्त हिदायत दी कि एसआईसी और सभी चिकित्सक मरीजों को लेकर संवेदनशील बनें। भीषण गर्मी से होने वाली बीमारी से संबंधित सभी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए। किसी भी मरीज को बाहर से दवा लाने के लिए न कहा जाए।
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ऐसे बिगड़ा मामला
मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीज रेनू, ममता, रुखसाना आदि ने जिला अस्पताल के अफसरों की मौजूदगी में कमिश्नर के पूछने पर कहा कि उन्हें बाहर से दवाएं खरीदकर लानी पड़ रही हैं। स्टाफ रूम से दवा उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें पर्ची थमाई जा रही है। प्राइवेट अस्पताल की तरह यहां भी इलाज महंगा पड़ रहा है। इस पर कमिश्नर बिफर पड़े। निर्देश दिए कि ऐसी परंपरा पर अंकुश लगाई जाए। वरना जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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एक चिकित्सक ने बताया कि दवाओं की उपलब्धता से मेरा कोई लेना देना नहीं होता है। इस समय हीट स्ट्रोक के मरीजों को तत्काल गुणवत्तापरक दवाओं की जरूरत है। तभी उन्हें ठीक किया जा सकता है। हमारी मजबूरी है, बाहर से दवाएं मंगाना, वरना मरीजों की हालत और बिगड़ जाएगी।
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80 मरीज हुए थे भर्ती, एक रेफर
जिला अस्पताल में चौबीस घंटे के भीतर 80 मरीज भर्ती किए गए थे। सभी उल्टी-दस्त, पेट दर्द और तेज बुखार के बताए गए। इन मरीजों को प्राथमिक उपचार के तत्काल बाद वार्डों में शिफ्ट कर दिया जा रहा था। ताकि नए मरीजों के लिए इमरजेंसी में बेड खाली रहे। यहां रात में तेज बुखार से पीड़ित एक मरीज को रेफर कर दिया गया। यहां वातानुकूलित इमरजेंसी वार्ड में मरीज और तीमारदार काफी राहत महसूस कर रहे थे। वहीं मेडिकल काॅलेज में केवल पंखा होने से मरीजों को गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।
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ओपेक चिकित्सालय कैली, समय- 11.30 बजे
महर्षि वशिष्ठ मेडिकल काॅलेज के ओपेक चिकित्सालय कैली के इमरजेंसी वार्ड में मरीजों की भीड़ मंगलवार को भी देखने को मिली। यहां चौबीस घंटे में 90 मरीज भर्ती किए गए थे। इमरजेंसी के दोनों वार्ड मरीजों से भरे थे। तीमारदारों का आना-जाना लगा हुआ था। इसी बीच मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ. आरपी मिश्र भी यहां पहुंच गए। उन्होंने इमरजेंसी में भर्ती मरीजों का हाल जाना। बताया गया कि अबतक कोई क्रिटिकल मरीज नहीं आया है। उल्टी-दस्त, पेट दर्द और बुखार के मरीज हैं। उपचार से उनकी स्थिति में सुधार है। सीएमओ ने कहा कि मरीजों को अनावश्यक रेफर न किया जाए। जरूरी ट्रीटमेंट प्रत्येक मरीज को हर हाल में उपलब्ध कराया जाए। यदि कहीं कोई समस्या है तो तत्काल जिला प्रशासन एवं विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत कराएं। स्थिति दिखने में सामान्य भले ही थी, लेकिन मरीजों के लगातार भर्ती होने से अस्पताल प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें खिंची हुई थीं। अस्पताल में मरीज बढ़ने से स्थिति कहीं बिगड़ न जाए, यह आशंका बनी हुई है।
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आयुक्त के निरीक्षण में मरीजों के पास मिलीं बाहर की ये दवाएं
बस्ती। जिला अस्पताल के मंडलायुक्त अखिलेश सिंह के मेडिकल वार्ड में निरीक्षण के दौरान मरीजों के पास डायजीन, लाइसोनो प्लस, डिटोनिन तथा ओजेड दवाएं मिलीं, जिसे मरीजों से बाहर से मंगाया गया था। इन दवाओं की उपलब्धता के सवाल पर एसआईसी डॉ. आलोक वर्मा ने कमिश्नर को बताया कि अस्पताल में सभी दवाएं उपलब्ध हैं। दवाओं के नाम भले ही अलग हो सकते हैं। ये दवाएं कारपोरेशन की ओर से मिलती हैं। इन दिनों सभी दवाओं की उपलब्धता अस्पताल में है।
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बोले एसआईसी
एसआईसी डॉ. आलोक वर्मा ने कहा कि चिकित्सालय में सभी आवश्यक दवाएं उपलब्ध हैं। जिस भी चिकित्सक ने बाहर की दवाएं लिखी हैं। इसकी जांच करा कर संबंधित चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। किसी को शासनादेश के खिलाफ कुछ भी करने का अधिकार नहीं है। कहा कि जो दवाएं बाहर से लिखी गई हैं, वे सीरप फार्म में नहीं, बल्कि टेबलेट व कैपसूल फार्म में उपलब्ध हैं।
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इमरजेंसी सेवा काफी दुरूस्त है। उल्टी-दस्त, पेट दर्द और तेज बुखार के मरीजों के उपचार को लेकर ओपीडी और इमरजेंसी दोनों को अलर्ट मोड में रखा गया है। चिकित्सक भी मेहनत कर रहे हैं। मरीज को तत्काल अटेंड कर उनका जरूरी उपचार किया जा रहा है। यहां स्थिति सामान्य बनी हुई है। -डाॅ.मनोज कुमार, प्राचार्य, महर्षि वशिष्ठ मेडिकल काॅलेज, बस्ती।
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जिला अस्पताल, समय- 12.40 बजे
आयुक्त अखिलेश सिंह जिला अस्पताल पहुंचे। इमरजेंसी में भर्ती मरीजों के बारे में जानकारी लेकर मेडिकल वार्ड की ओर बढ़ गए। अस्पताल के अधिकारी और स्टाॅफ उनके आगे-पीछे लगा रहा। मेडिकल काॅलेज के दोनों वार्डों में मरीजों की तादाद बढ़ी रही। अधिकतर मरीज उल्टी-दस्त, पेट दर्द और तेज बुखार के बताए गए। कमिश्नर ने वार्ड के एक-एक मरीज का हाल पूछा। अस्पताल की ओर से मिलने वाली दवाएं एवं अन्य सुविधाओं के बारे में पूछताछ की। एक-एक कर मरीजों ने जब सच उजागर किया तो कमिश्नर भी दंग रह गए। मरीजों की तरफ से बताया गया कि उपचार के लिए आवश्यक दवाएं बाहर से मंगानी पड़ रही है। यह सुनकर वहां मौजूद अस्पताल के जिम्मेदार अफसर बंगले झांकने लगे। कमिश्नर ने नाराजगी जाहिर की। सख्त हिदायत दी कि एसआईसी और सभी चिकित्सक मरीजों को लेकर संवेदनशील बनें। भीषण गर्मी से होने वाली बीमारी से संबंधित सभी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए। किसी भी मरीज को बाहर से दवा लाने के लिए न कहा जाए।
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मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीज रेनू, ममता, रुखसाना आदि ने जिला अस्पताल के अफसरों की मौजूदगी में कमिश्नर के पूछने पर कहा कि उन्हें बाहर से दवाएं खरीदकर लानी पड़ रही हैं। स्टाफ रूम से दवा उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें पर्ची थमाई जा रही है। प्राइवेट अस्पताल की तरह यहां भी इलाज महंगा पड़ रहा है। इस पर कमिश्नर बिफर पड़े। निर्देश दिए कि ऐसी परंपरा पर अंकुश लगाई जाए। वरना जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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एक चिकित्सक ने बताया कि दवाओं की उपलब्धता से मेरा कोई लेना देना नहीं होता है। इस समय हीट स्ट्रोक के मरीजों को तत्काल गुणवत्तापरक दवाओं की जरूरत है। तभी उन्हें ठीक किया जा सकता है। हमारी मजबूरी है, बाहर से दवाएं मंगाना, वरना मरीजों की हालत और बिगड़ जाएगी।
80 मरीज हुए थे भर्ती, एक रेफर
जिला अस्पताल में चौबीस घंटे के भीतर 80 मरीज भर्ती किए गए थे। सभी उल्टी-दस्त, पेट दर्द और तेज बुखार के बताए गए। इन मरीजों को प्राथमिक उपचार के तत्काल बाद वार्डों में शिफ्ट कर दिया जा रहा था। ताकि नए मरीजों के लिए इमरजेंसी में बेड खाली रहे। यहां रात में तेज बुखार से पीड़ित एक मरीज को रेफर कर दिया गया। यहां वातानुकूलित इमरजेंसी वार्ड में मरीज और तीमारदार काफी राहत महसूस कर रहे थे। वहीं मेडिकल काॅलेज में केवल पंखा होने से मरीजों को गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।
ओपेक चिकित्सालय कैली, समय- 11.30 बजे
महर्षि वशिष्ठ मेडिकल काॅलेज के ओपेक चिकित्सालय कैली के इमरजेंसी वार्ड में मरीजों की भीड़ मंगलवार को भी देखने को मिली। यहां चौबीस घंटे में 90 मरीज भर्ती किए गए थे। इमरजेंसी के दोनों वार्ड मरीजों से भरे थे। तीमारदारों का आना-जाना लगा हुआ था। इसी बीच मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ. आरपी मिश्र भी यहां पहुंच गए। उन्होंने इमरजेंसी में भर्ती मरीजों का हाल जाना। बताया गया कि अबतक कोई क्रिटिकल मरीज नहीं आया है। उल्टी-दस्त, पेट दर्द और बुखार के मरीज हैं। उपचार से उनकी स्थिति में सुधार है। सीएमओ ने कहा कि मरीजों को अनावश्यक रेफर न किया जाए। जरूरी ट्रीटमेंट प्रत्येक मरीज को हर हाल में उपलब्ध कराया जाए। यदि कहीं कोई समस्या है तो तत्काल जिला प्रशासन एवं विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत कराएं। स्थिति दिखने में सामान्य भले ही थी, लेकिन मरीजों के लगातार भर्ती होने से अस्पताल प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें खिंची हुई थीं। अस्पताल में मरीज बढ़ने से स्थिति कहीं बिगड़ न जाए, यह आशंका बनी हुई है।
आयुक्त के निरीक्षण में मरीजों के पास मिलीं बाहर की ये दवाएं
बस्ती। जिला अस्पताल के मंडलायुक्त अखिलेश सिंह के मेडिकल वार्ड में निरीक्षण के दौरान मरीजों के पास डायजीन, लाइसोनो प्लस, डिटोनिन तथा ओजेड दवाएं मिलीं, जिसे मरीजों से बाहर से मंगाया गया था। इन दवाओं की उपलब्धता के सवाल पर एसआईसी डॉ. आलोक वर्मा ने कमिश्नर को बताया कि अस्पताल में सभी दवाएं उपलब्ध हैं। दवाओं के नाम भले ही अलग हो सकते हैं। ये दवाएं कारपोरेशन की ओर से मिलती हैं। इन दिनों सभी दवाओं की उपलब्धता अस्पताल में है।
बोले एसआईसी
एसआईसी डॉ. आलोक वर्मा ने कहा कि चिकित्सालय में सभी आवश्यक दवाएं उपलब्ध हैं। जिस भी चिकित्सक ने बाहर की दवाएं लिखी हैं। इसकी जांच करा कर संबंधित चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। किसी को शासनादेश के खिलाफ कुछ भी करने का अधिकार नहीं है। कहा कि जो दवाएं बाहर से लिखी गई हैं, वे सीरप फार्म में नहीं, बल्कि टेबलेट व कैपसूल फार्म में उपलब्ध हैं।
इमरजेंसी सेवा काफी दुरूस्त है। उल्टी-दस्त, पेट दर्द और तेज बुखार के मरीजों के उपचार को लेकर ओपीडी और इमरजेंसी दोनों को अलर्ट मोड में रखा गया है। चिकित्सक भी मेहनत कर रहे हैं। मरीज को तत्काल अटेंड कर उनका जरूरी उपचार किया जा रहा है। यहां स्थिति सामान्य बनी हुई है। -डाॅ.मनोज कुमार, प्राचार्य, महर्षि वशिष्ठ मेडिकल काॅलेज, बस्ती।