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डेंगू की चपेट में आई बालिका की मौत
Updated Sat, 02 Sep 2017 11:28 PM IST
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डेंगू की चपेट में आई बालिका की मौत
बस्ती।
मौसम के चलते जहां जेई-एईएस का खतरा है, वहीं, मच्छर जनित डेंगू भी जान लेेने पर आमादा है। इस बीमारी से तीन दिन पूर्व जिले में एक बालिका की मौत हुई है। इसका इलाज लखनऊ के केजीएमयू में चल रहा था। मौत की सूचना के बाद संक्रामक रोग विभाग ने संबंधित गांव में निरोधात्मक कार्रवाई पूरी कर ली है।
मच्छर जनित डेंगू ने जिले में पांव पसार लिया है। पिछले जुलाई माह में यहां सात मरीज आए, जिनमें से एक की मौत तीन दिन पूर्व हुई है। हालांकि, डेंगू जैसे घातक बीमारी को लेकर स्वास्थ्य विभाग तमाम अभियान चला रहा है, बावजूद इसके डेंगू पर नियंत्रण नहीं हो पाया है। पिछले आंकड़ों को खंगाला जाए तो जिला चिकित्सालय में शहर के पिकौरा शिवगुलाम निवासी विकास डेंगू की चपेट में आए। इसके बाद लबनापार निवासी शैला त्रिपाठी, वाल्टरगंज के मझौवा खजुरी निवासी अंकुर कुमार, बहादुरपुर के मल्हऔरा निवासी शंभूनाथ पांडेय, हर्रैया के गांधी नगर निवासी कांती, रुधौली के परसा तिवारी गांव निवासी राहुल के बाद सांऊघाट के जमोहरा गांव निवासी बरीरा खातून डेंगू की चपेट में आए। इसमें बरीरा की मौत 28 अगस्त की रात केजीएमयू में हो गई है। संक्रामक रोग प्रभारी डॉ. राकेश मणि त्रिपाठी ने कहा कि बरीरा खातून की मौत की सूचना केजीएमयू से आने के बाद गांव में छिड़काव और फॉगिंग कराई गई है। इसके अलावा ग्रामीणों में दवाएं भी वितरित की गईं।
उधार के डॉक्टरों पर एसएनसीयू
बस्ती।
गोलमाल के बाद सुर्खियों में आए महिला अस्पताल के एसएनसीयू में वर्ष 2013 से एक भी डॉक्टर की तैनाती नहीं है। जो डॉक्टर यहां के एसएनसीयू को संचालित कर रहे हैं वह वास्तव में संबद्ध हैं। लेकिन चार वर्ष की अवधि में यहां के एसएनसीयू को प्रदेश स्तर का बना दिया है।
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अभी हाल ही में इस एसएनसीयू को प्रदेश की टॉप फाइव की सूची में पाया गया। तब शासन ने यहां के दोनों चिकित्सकों सहित पूरे स्टाफ को लखनऊ में सम्मानित किया। दूसरी ओर यहां आज तक जिस भी डॉक्टर की तैनाती की गई वह या तो आया नहीं यदि आ गया तो चंद रोज में ही जैसे-तैसे अवकाश अथवा स्थानांतरण करा कर चला गया।
जी हां हम बात कर रहे हैं उस चिकित्सालय के सिक बार्न बेबी केयर यूनिट यानी एसएनसीयू की। यहां सीमित संसाधनों के अलावा नियतन के अनुरूप चिकित्सक भी नहीं हैं। बावजूद इसके यह पटरी पर दौड़ रहा है। हालांकि, चंद रोज पहले इसको छेड़ने की कोशिश की गई। मगर सीएमओ की पहल ने स्थिति संभाल ली। अब पूर्व की भांति एसएनसीयू संचालित हो रहा है।
चिकित्सालय की इस यूनिट के लिए संसाधनों के नाम पर छोटे और मझोले ऑक्सीजन सिलेंडर सहित वेंटीलेटर, वार्मर व अन्य उपकरण मौजूद हैं। इसके अलावा दवाएं भी भरपूर रहती हैं। यूनिट की देखरेख के लिए दो चिकित्सक डॉ. पीके श्रीवास्तव व डॉ. तैयब अंसारी 24 घंटे की सेवा देते हैं। यह अलग बात है कि इसके लिए नियतन पांच स्थायी डॉक्टरों का है। मगर सख्त ड्यूटी और जिम्मेदारी के चलते यहां शासन के प्रयास के बाद भी कोई डॉक्टर नहीं आया। फिलहाल, एक डॉक्टर दिन सुबह पांच बजे से शाम तक तो दूसरे पूरी रात ड्यूटी करते हैं। सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा ने कहा कि एसएनसीयू को और सुसज्जित करने की योजना बन रही है। इसके लिए सभी आवश्यक उपकरणों को जल्द से जल्द स्थापित कराया जाएगा।
पगार पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
महराजगंज। स्वाइन फ्लू से हुई महिला की मौत के बाद स्वास्थ्य प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। शनिवार को दोपहर स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंच गई। यहां फॉगिंग और ग्रामीणों को दवाइयां दी। कप्तानगंज ब्लॉक के पगार गांव में 25 वर्षीय सुमन पत्नी रवींद्र कुमार की स्वाइन फ्लू से पीड़ित थी। इलाज के दौरान गोरखपुर में उनकी शुक्रवार को मौत हो गई थी। स्वाइन फ्लू से हुई मौत को संज्ञान में लेकर सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा के निर्देश पर कप्तानगंज के सीएचसी प्रभारी डॉ. विनोद कुमार टीम के साथ पगार गांव पहुंचे। यहां सुमन के परिवार वालों से मिले। गांव में फॉगिंग आदि कराने के बाद रोग से बचाने के लिए ग्रामीणों को उपाय बताए। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में चारों ओर गंदगी और जल जमाव होने से संक्रामक रोग फ़ैल रहा है।
डॉ. विनोद कुमार ने ग्रामीणों को सुझाया कि वे अपने घरों के आस पास जल जमाव और गंदगी न होने दें। डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि गांव में गंदगी मिली है। रोगों से बचाव के लोगों को जागरूक किया गया है। दो दिन बाद गांव में एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जाएगा।
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बस्ती।
मौसम के चलते जहां जेई-एईएस का खतरा है, वहीं, मच्छर जनित डेंगू भी जान लेेने पर आमादा है। इस बीमारी से तीन दिन पूर्व जिले में एक बालिका की मौत हुई है। इसका इलाज लखनऊ के केजीएमयू में चल रहा था। मौत की सूचना के बाद संक्रामक रोग विभाग ने संबंधित गांव में निरोधात्मक कार्रवाई पूरी कर ली है।
मच्छर जनित डेंगू ने जिले में पांव पसार लिया है। पिछले जुलाई माह में यहां सात मरीज आए, जिनमें से एक की मौत तीन दिन पूर्व हुई है। हालांकि, डेंगू जैसे घातक बीमारी को लेकर स्वास्थ्य विभाग तमाम अभियान चला रहा है, बावजूद इसके डेंगू पर नियंत्रण नहीं हो पाया है। पिछले आंकड़ों को खंगाला जाए तो जिला चिकित्सालय में शहर के पिकौरा शिवगुलाम निवासी विकास डेंगू की चपेट में आए। इसके बाद लबनापार निवासी शैला त्रिपाठी, वाल्टरगंज के मझौवा खजुरी निवासी अंकुर कुमार, बहादुरपुर के मल्हऔरा निवासी शंभूनाथ पांडेय, हर्रैया के गांधी नगर निवासी कांती, रुधौली के परसा तिवारी गांव निवासी राहुल के बाद सांऊघाट के जमोहरा गांव निवासी बरीरा खातून डेंगू की चपेट में आए। इसमें बरीरा की मौत 28 अगस्त की रात केजीएमयू में हो गई है। संक्रामक रोग प्रभारी डॉ. राकेश मणि त्रिपाठी ने कहा कि बरीरा खातून की मौत की सूचना केजीएमयू से आने के बाद गांव में छिड़काव और फॉगिंग कराई गई है। इसके अलावा ग्रामीणों में दवाएं भी वितरित की गईं।
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उधार के डॉक्टरों पर एसएनसीयू
बस्ती।
गोलमाल के बाद सुर्खियों में आए महिला अस्पताल के एसएनसीयू में वर्ष 2013 से एक भी डॉक्टर की तैनाती नहीं है। जो डॉक्टर यहां के एसएनसीयू को संचालित कर रहे हैं वह वास्तव में संबद्ध हैं। लेकिन चार वर्ष की अवधि में यहां के एसएनसीयू को प्रदेश स्तर का बना दिया है।
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अभी हाल ही में इस एसएनसीयू को प्रदेश की टॉप फाइव की सूची में पाया गया। तब शासन ने यहां के दोनों चिकित्सकों सहित पूरे स्टाफ को लखनऊ में सम्मानित किया। दूसरी ओर यहां आज तक जिस भी डॉक्टर की तैनाती की गई वह या तो आया नहीं यदि आ गया तो चंद रोज में ही जैसे-तैसे अवकाश अथवा स्थानांतरण करा कर चला गया।
जी हां हम बात कर रहे हैं उस चिकित्सालय के सिक बार्न बेबी केयर यूनिट यानी एसएनसीयू की। यहां सीमित संसाधनों के अलावा नियतन के अनुरूप चिकित्सक भी नहीं हैं। बावजूद इसके यह पटरी पर दौड़ रहा है। हालांकि, चंद रोज पहले इसको छेड़ने की कोशिश की गई। मगर सीएमओ की पहल ने स्थिति संभाल ली। अब पूर्व की भांति एसएनसीयू संचालित हो रहा है।
चिकित्सालय की इस यूनिट के लिए संसाधनों के नाम पर छोटे और मझोले ऑक्सीजन सिलेंडर सहित वेंटीलेटर, वार्मर व अन्य उपकरण मौजूद हैं। इसके अलावा दवाएं भी भरपूर रहती हैं। यूनिट की देखरेख के लिए दो चिकित्सक डॉ. पीके श्रीवास्तव व डॉ. तैयब अंसारी 24 घंटे की सेवा देते हैं। यह अलग बात है कि इसके लिए नियतन पांच स्थायी डॉक्टरों का है। मगर सख्त ड्यूटी और जिम्मेदारी के चलते यहां शासन के प्रयास के बाद भी कोई डॉक्टर नहीं आया। फिलहाल, एक डॉक्टर दिन सुबह पांच बजे से शाम तक तो दूसरे पूरी रात ड्यूटी करते हैं। सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा ने कहा कि एसएनसीयू को और सुसज्जित करने की योजना बन रही है। इसके लिए सभी आवश्यक उपकरणों को जल्द से जल्द स्थापित कराया जाएगा।
पगार पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
महराजगंज। स्वाइन फ्लू से हुई महिला की मौत के बाद स्वास्थ्य प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। शनिवार को दोपहर स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंच गई। यहां फॉगिंग और ग्रामीणों को दवाइयां दी। कप्तानगंज ब्लॉक के पगार गांव में 25 वर्षीय सुमन पत्नी रवींद्र कुमार की स्वाइन फ्लू से पीड़ित थी। इलाज के दौरान गोरखपुर में उनकी शुक्रवार को मौत हो गई थी। स्वाइन फ्लू से हुई मौत को संज्ञान में लेकर सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा के निर्देश पर कप्तानगंज के सीएचसी प्रभारी डॉ. विनोद कुमार टीम के साथ पगार गांव पहुंचे। यहां सुमन के परिवार वालों से मिले। गांव में फॉगिंग आदि कराने के बाद रोग से बचाने के लिए ग्रामीणों को उपाय बताए। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में चारों ओर गंदगी और जल जमाव होने से संक्रामक रोग फ़ैल रहा है।
डॉ. विनोद कुमार ने ग्रामीणों को सुझाया कि वे अपने घरों के आस पास जल जमाव और गंदगी न होने दें। डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि गांव में गंदगी मिली है। रोगों से बचाव के लोगों को जागरूक किया गया है। दो दिन बाद गांव में एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जाएगा।