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नरकटहा गो आश्रय स्थल की व्यवस्था के लिए एसडीएम से गुहार--
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नरकटहा गो आश्रय स्थल की व्यवस्था के लिए एसडीएम से गुहार
पशुओं की अधिक संख्या होने से भूसा, पानी के लिए संकट
बिना बाउंड्रीवाल रोकना मुश्किल, ग्राम प्रधान ने मांगा धन
अमर उजाला ब्यूरो
भानपुर। रामनगर ब्लॉक के नरकटहा में संचालित गोवंश आश्रय स्थल में पशुओं की संख्या 110 से अधिक हो गई है। दाना, भूसा, पानी आदि व्यवस्था के लिए संकट खड़ा हो गया है। ग्राम प्रधान ने एसडीएम से अतिरिक्त धन के लिए गुहार की है।
ग्राम प्रधान श्यामादेवी ने व्यवस्था सुधार के लिए पत्र लिखकर एसडीएम राजेश सिंह से अतिरिक्त धन की गुहार लगाई है। प्रधान की ओर से एसडीएम को दिए गए पत्र में कहा गया है कि गोवंश आश्रय स्थल पर पशुुओं की संख्या दिन-प्रति-दिन बढ़ती जा रही है। इसके चलते पशुओं को बिना बाउंड्रीवाल के रोक पाना मुश्किल होता जा रहा है। इतना ही नहीं भूसा भंडारण का स्टोर न होने के कारण पशुओं के भूसे और चारे का संरक्षण नहीं किया जा सकता। पशुओं की संख्या के अनुसार टिन शेड और नाद की अतिरिक्त व्यवस्था आवश्यक है। वहीं, पशुओं के संरक्षण के लिए ग्राम पंचायत की ओर से कार्य कर रहे 12 श्रमिकों के मजदूरी के लिए भी धन देने की अपील की है। कहा है कि ग्राम पंचायत में धन न होने के कारण पशुओं को खिलाने में असुविधा हो रही है। कहा है कि यदि व्यवस्था में शीघ्र सुधार नहीं हुआ तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी। एसडीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बीडीओ रामनगर को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
संयुक्त निदेशक की टीम ने जांचा गोआश्रय स्थलों का हाल
लखनऊ की टीम ने गोशाला का किया निरीक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। लखनऊ की टीम ने मंगलवार को कप्तानगंज और दुबौलिया ब्लॉक की गोशाला का निरीक्षण का निरीक्षण किया। पशु पालन विभाग के संयुक्त निदेशक नियोजन डॉ. अविनाश चंद्र सचान के नेतृत्व में पहुंचे जांच दल ने हालात जांचने के बाद शासन को रिपोर्ट भेजी है।
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कप्तानगंज क्षेत्र के पोखरा गांव में स्थित गोशाला पर मंगलवार को दोपहर दो बजे संयुक्त निदेशक नियोजन डॉ. सचान पहुंचे। यहां नौ गोवंशीय पशु गोशाला में मिले। इनके रखरखाव से वे संतुष्ट दिखे। इसके बाद टीम नयकापार गांव में बनी गोशाला का निरीक्षण करने पहुंचे। यहां 12 गोवंशीय पशु मिले। ब्लॉक के मनोरमा नदी के तट पर बरहटा गांव में बने गोशाला को देखकर वह नाराज हुए। इसके बाद टीम ने दुबौलिया ब्लॉक के रमना तौफिर में स्थापित वृहद गोशाला स्थली पर नजर डाली। वहां अधिकारी ने व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए। संयुक्त निदेशक डॉ. अविनाश चन्द्र सचान ने कहा कि गोशाला में किसी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी। बताया कि मनोरमा नदी के किनारे बने बरहटा गांव में गोशाला में बड़ी लापरवाही पाई गई है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। टीम के साथ डॉ. अनिल कुमार राय, आरडी लाल श्रीवास्तव, राहुल शुक्ला, अतुल पांडेय, संजय कुमार, जितेंद्र कुमार, राकेश सिंह, सुरेश चौधरी सहित कई लोग मौजूद रहे।
फोटो सहित लगाने का अनुरोध है
बेजुबानों की संरक्षा को आगे आए पूर्व एमएलसी
पर्यावरण की दिशा में भी डा.वाई डी सिंह आगे
अमर उजाला ब्यूरो
दुबौलिया। बेसहारा जानवरों को आसरा देने के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के पूर्व बाल रोग विभागाध्यक्ष पूर्व एमएलसी डॉ. वाईडी सिंह आगे आए हैं। उन्होंने लगभग तीन एकड़ जमीन अपने गांव दुबौलिया ब्लॉक के छपिया गांव में गोशाला को दान दी है।
गांव में जमीन मिली तो ग्राम प्रधान उमाशंकर सिंह ने उसी तीन एकड़ जमीन पर गोशाला निर्माण के लिए सहयोग किया। इसके बाद गांव में निर्माण शुरू हुआ और 26 मई को गोशाला का शुभारंभ हो गया। प्रधान संतोष पाठक, मखंचू यादव आदि ने भी गोशाला संचालन का भरोसा दिया।
डॉ. वाईडी सिंह पर्यावरण के प्रहरी भी हैं। छपिया गांव में बड़ी मात्रा में इन्होंने पौधरोपण कर रखा है। डॉ. सिंह ने मनोरमा नदी की सफाई के लिए काफी प्रयास किया और करीब तीन किलोमीटर तक नदी की सफाई कराई थी। कई वर्ष से गांव पर शनिवार व रविवार को बच्चों का मुफ्त इलाज करते हैं। डॉ. सिंह कहते हैं कि जिला प्रशासन के सहयोग से गोशाला निर्माण हो गया। पशुओं को रखकर जनसहयोग से सेवा किया जा रहा है। अब मुख्यमंत्री से मिलकर सहायता के लिए अनुरोध करूंगा।
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नरकटहा गो आश्रय स्थल की व्यवस्था के लिए एसडीएम से गुहार
पशुओं की अधिक संख्या होने से भूसा, पानी के लिए संकट
बिना बाउंड्रीवाल रोकना मुश्किल, ग्राम प्रधान ने मांगा धन
अमर उजाला ब्यूरो
भानपुर। रामनगर ब्लॉक के नरकटहा में संचालित गोवंश आश्रय स्थल में पशुओं की संख्या 110 से अधिक हो गई है। दाना, भूसा, पानी आदि व्यवस्था के लिए संकट खड़ा हो गया है। ग्राम प्रधान ने एसडीएम से अतिरिक्त धन के लिए गुहार की है।
ग्राम प्रधान श्यामादेवी ने व्यवस्था सुधार के लिए पत्र लिखकर एसडीएम राजेश सिंह से अतिरिक्त धन की गुहार लगाई है। प्रधान की ओर से एसडीएम को दिए गए पत्र में कहा गया है कि गोवंश आश्रय स्थल पर पशुुओं की संख्या दिन-प्रति-दिन बढ़ती जा रही है। इसके चलते पशुओं को बिना बाउंड्रीवाल के रोक पाना मुश्किल होता जा रहा है। इतना ही नहीं भूसा भंडारण का स्टोर न होने के कारण पशुओं के भूसे और चारे का संरक्षण नहीं किया जा सकता। पशुओं की संख्या के अनुसार टिन शेड और नाद की अतिरिक्त व्यवस्था आवश्यक है। वहीं, पशुओं के संरक्षण के लिए ग्राम पंचायत की ओर से कार्य कर रहे 12 श्रमिकों के मजदूरी के लिए भी धन देने की अपील की है। कहा है कि ग्राम पंचायत में धन न होने के कारण पशुओं को खिलाने में असुविधा हो रही है। कहा है कि यदि व्यवस्था में शीघ्र सुधार नहीं हुआ तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी। एसडीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बीडीओ रामनगर को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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संयुक्त निदेशक की टीम ने जांचा गोआश्रय स्थलों का हाल
लखनऊ की टीम ने गोशाला का किया निरीक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। लखनऊ की टीम ने मंगलवार को कप्तानगंज और दुबौलिया ब्लॉक की गोशाला का निरीक्षण का निरीक्षण किया। पशु पालन विभाग के संयुक्त निदेशक नियोजन डॉ. अविनाश चंद्र सचान के नेतृत्व में पहुंचे जांच दल ने हालात जांचने के बाद शासन को रिपोर्ट भेजी है।
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कप्तानगंज क्षेत्र के पोखरा गांव में स्थित गोशाला पर मंगलवार को दोपहर दो बजे संयुक्त निदेशक नियोजन डॉ. सचान पहुंचे। यहां नौ गोवंशीय पशु गोशाला में मिले। इनके रखरखाव से वे संतुष्ट दिखे। इसके बाद टीम नयकापार गांव में बनी गोशाला का निरीक्षण करने पहुंचे। यहां 12 गोवंशीय पशु मिले। ब्लॉक के मनोरमा नदी के तट पर बरहटा गांव में बने गोशाला को देखकर वह नाराज हुए। इसके बाद टीम ने दुबौलिया ब्लॉक के रमना तौफिर में स्थापित वृहद गोशाला स्थली पर नजर डाली। वहां अधिकारी ने व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए। संयुक्त निदेशक डॉ. अविनाश चन्द्र सचान ने कहा कि गोशाला में किसी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी। बताया कि मनोरमा नदी के किनारे बने बरहटा गांव में गोशाला में बड़ी लापरवाही पाई गई है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। टीम के साथ डॉ. अनिल कुमार राय, आरडी लाल श्रीवास्तव, राहुल शुक्ला, अतुल पांडेय, संजय कुमार, जितेंद्र कुमार, राकेश सिंह, सुरेश चौधरी सहित कई लोग मौजूद रहे।
फोटो सहित लगाने का अनुरोध है
बेजुबानों की संरक्षा को आगे आए पूर्व एमएलसी
पर्यावरण की दिशा में भी डा.वाई डी सिंह आगे
अमर उजाला ब्यूरो
दुबौलिया। बेसहारा जानवरों को आसरा देने के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के पूर्व बाल रोग विभागाध्यक्ष पूर्व एमएलसी डॉ. वाईडी सिंह आगे आए हैं। उन्होंने लगभग तीन एकड़ जमीन अपने गांव दुबौलिया ब्लॉक के छपिया गांव में गोशाला को दान दी है।
गांव में जमीन मिली तो ग्राम प्रधान उमाशंकर सिंह ने उसी तीन एकड़ जमीन पर गोशाला निर्माण के लिए सहयोग किया। इसके बाद गांव में निर्माण शुरू हुआ और 26 मई को गोशाला का शुभारंभ हो गया। प्रधान संतोष पाठक, मखंचू यादव आदि ने भी गोशाला संचालन का भरोसा दिया।
डॉ. वाईडी सिंह पर्यावरण के प्रहरी भी हैं। छपिया गांव में बड़ी मात्रा में इन्होंने पौधरोपण कर रखा है। डॉ. सिंह ने मनोरमा नदी की सफाई के लिए काफी प्रयास किया और करीब तीन किलोमीटर तक नदी की सफाई कराई थी। कई वर्ष से गांव पर शनिवार व रविवार को बच्चों का मुफ्त इलाज करते हैं। डॉ. सिंह कहते हैं कि जिला प्रशासन के सहयोग से गोशाला निर्माण हो गया। पशुओं को रखकर जनसहयोग से सेवा किया जा रहा है। अब मुख्यमंत्री से मिलकर सहायता के लिए अनुरोध करूंगा।