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सहकारी केंद्रों पर किसानों का ढाई करोड़ बकाया
Updated Mon, 26 Jun 2017 06:27 PM IST
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मूल्य समर्थन योजना में सरकार का स्पष्ट निर्देश था कि किसानों के उत्पाद का तत्काल भुगतान किया जाए। बावजूद इसके सहकारी समितियों पर बेचे गए गेहूं की कीमत अब तक किसानों को नहीं मिल सकी है।
पीसीएफ की ओर से संचालित इन केंद्रों पर किसानों का ढाई करोड़ रुपये बकाया है। यह अलग बात है कि इस बार खरीद का ग्राफ पिछले चार सालों का रिकार्ड तोड़ दिया, मगर इस बकाया के चलते किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है। इस बार 15 जून तक मूल्य समर्थन योजना में किसानों से गेहूं खरीदने की व्यवस्था सरकार ने बनाई थी। अपने यहां खाद्य विभाग के अलावा कर्मचारी कल्याण निगम, एफसीआई व पीसीएफ ने खरीद की। मंडल के तीनों जिलों में खाद्य विभाग ने 1.35 लाख मीट्रिक टन की खरीद की, जबकि पीसीएफ की सहकारी समितियां दूसरे नबंर पर रहीं। खरीद के बाद तत्काल भुगतान की जो व्यवस्था राज्य सरकार ने बनाई थी उसके तहत खाद्य विभाग ने मंडल के 24898 किसानों को 2.20 अरब रुपये का भुगतान खरीद के बाद कर दिया है, जबकि पीसीएफ के भुगतान की गति बेहद धीमी रही। इसके पीछे विभागीय जानकार रुपयों की कमी को जिम्मेदार बताते हैं।
आरएफसी रवि कुमार ने कहा कि किसानों के भुगतान के अलावा केंद्रीय पूल में गेहूं उतार को लेकर विभाग पूरी ताकत लगाए हुए है, मगर उतार की गति बेहद धीमी है। यह सही है कि पीसीएफ पर करीब ढाई करोड़ रुपये खरीद के बकाया हैं। इसके लिए पीसीएफ के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। जल्द से जल्द भुगतान कराया जाएगा।
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पीसीएफ की ओर से संचालित इन केंद्रों पर किसानों का ढाई करोड़ रुपये बकाया है। यह अलग बात है कि इस बार खरीद का ग्राफ पिछले चार सालों का रिकार्ड तोड़ दिया, मगर इस बकाया के चलते किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है। इस बार 15 जून तक मूल्य समर्थन योजना में किसानों से गेहूं खरीदने की व्यवस्था सरकार ने बनाई थी। अपने यहां खाद्य विभाग के अलावा कर्मचारी कल्याण निगम, एफसीआई व पीसीएफ ने खरीद की। मंडल के तीनों जिलों में खाद्य विभाग ने 1.35 लाख मीट्रिक टन की खरीद की, जबकि पीसीएफ की सहकारी समितियां दूसरे नबंर पर रहीं। खरीद के बाद तत्काल भुगतान की जो व्यवस्था राज्य सरकार ने बनाई थी उसके तहत खाद्य विभाग ने मंडल के 24898 किसानों को 2.20 अरब रुपये का भुगतान खरीद के बाद कर दिया है, जबकि पीसीएफ के भुगतान की गति बेहद धीमी रही। इसके पीछे विभागीय जानकार रुपयों की कमी को जिम्मेदार बताते हैं।
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आरएफसी रवि कुमार ने कहा कि किसानों के भुगतान के अलावा केंद्रीय पूल में गेहूं उतार को लेकर विभाग पूरी ताकत लगाए हुए है, मगर उतार की गति बेहद धीमी है। यह सही है कि पीसीएफ पर करीब ढाई करोड़ रुपये खरीद के बकाया हैं। इसके लिए पीसीएफ के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। जल्द से जल्द भुगतान कराया जाएगा।
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