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शिक्षकों की कमी से पठन-पाठन प्रभावित
Updated Wed, 01 Aug 2018 12:26 AM IST
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शिक्षकों की कमी से पठन-पाठन प्रभावित
राजकीय माध्यमिक विद्यालय का हाल
शिक्षकों की कमी से नामांकन से कतराते हैं अभिभावक
सात पदों के सापेक्ष मात्र दो की तैनाती
बभनान। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत मेहंदिया खडग बहादुर शाही में स्थापित राजकीय माध्यमिक विद्यालय में पठन-पाठन प्रभावित है। इसका कारण संसाधन नहीं बल्कि शिक्षकों की कमी है। यहां सात पदों के सापेक्ष मात्र दो शिक्षकों की तैनाती है। इसके चलते विद्यालय अपने उद्देश्यों को प्राप्त नहीं कर पा रहा है।
वर्ष 2012 में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत चार कमरे, विज्ञान प्रयोगशाला, ऑफिस, प्रधानाचार्य कक्ष, निर्माण शुरू हुआ। लोगों को यह उम्मीद जगी कि अब गांव के पास ही बच्चों को बेहतर व गुणवत्तायुक्त शिक्षा मिल सकेगी। वर्ष 2015 में भवन तैयार हो गया और दो शिक्षकों की तैनाती भी हुई। इसी के सहारे स्कूल में शिक्षा की गाड़ी दौड़ दी गई। यहां तय हुआ था कि ग्रामीण क्षेत्र में 14-16 वर्ष आयु वर्ग के कक्षा नौ के 80 व दस के इतने ही छात्रों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा दी जाएगी, लेकिन सोच के विपरीत यहां कक्षा नौ में मात्र आठ छात्र तो कक्षा दस में 18 छात्र नामांकित हैं। प्रधानाचार्य सत्येंद्र पांडेय ने बताया कि विद्यालय में सात शिक्षकों के पद हैं। इसके सापेक्ष अब तक केवल दो ही शिक्षक यहां पठन-पाठन का दायित्व उठा रहे हैं। गुणवत्तायुक्त विद्यालय भवन में संसाधनों की कोई कमी नहीं है, मगर शिक्षक न होने के कारण अभिभावक अपने बच्चों का यहां नामांकन कराने से कतराते हैं। इसके लिए कई बार पत्र लिखा जा चुका है।
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राजकीय माध्यमिक विद्यालय का हाल
शिक्षकों की कमी से नामांकन से कतराते हैं अभिभावक
सात पदों के सापेक्ष मात्र दो की तैनाती
बभनान। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत मेहंदिया खडग बहादुर शाही में स्थापित राजकीय माध्यमिक विद्यालय में पठन-पाठन प्रभावित है। इसका कारण संसाधन नहीं बल्कि शिक्षकों की कमी है। यहां सात पदों के सापेक्ष मात्र दो शिक्षकों की तैनाती है। इसके चलते विद्यालय अपने उद्देश्यों को प्राप्त नहीं कर पा रहा है।
वर्ष 2012 में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत चार कमरे, विज्ञान प्रयोगशाला, ऑफिस, प्रधानाचार्य कक्ष, निर्माण शुरू हुआ। लोगों को यह उम्मीद जगी कि अब गांव के पास ही बच्चों को बेहतर व गुणवत्तायुक्त शिक्षा मिल सकेगी। वर्ष 2015 में भवन तैयार हो गया और दो शिक्षकों की तैनाती भी हुई। इसी के सहारे स्कूल में शिक्षा की गाड़ी दौड़ दी गई। यहां तय हुआ था कि ग्रामीण क्षेत्र में 14-16 वर्ष आयु वर्ग के कक्षा नौ के 80 व दस के इतने ही छात्रों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा दी जाएगी, लेकिन सोच के विपरीत यहां कक्षा नौ में मात्र आठ छात्र तो कक्षा दस में 18 छात्र नामांकित हैं। प्रधानाचार्य सत्येंद्र पांडेय ने बताया कि विद्यालय में सात शिक्षकों के पद हैं। इसके सापेक्ष अब तक केवल दो ही शिक्षक यहां पठन-पाठन का दायित्व उठा रहे हैं। गुणवत्तायुक्त विद्यालय भवन में संसाधनों की कोई कमी नहीं है, मगर शिक्षक न होने के कारण अभिभावक अपने बच्चों का यहां नामांकन कराने से कतराते हैं। इसके लिए कई बार पत्र लिखा जा चुका है।
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