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जेल अधीक्षक संतलाल ने संभाला कामकाज
Updated Mon, 25 Sep 2017 11:23 PM IST
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जेल अधीक्षक संतलाल ने संभाला कामकाज
बस्ती।
जनपद कारागार के अधीक्षक की पांच वर्ष से खाली कुर्सी पर सोमवार को अफसर की तैनाती हो गई। मेरठ जेल से स्थानांतरित होकर संतलाल यादव ने यहां के जेल अधीक्षक का पद भार ग्रहण किया। 2012 में जेल के अंदर बवाल और फायरिंग के बाद निलंबित किए गए तत्कालीन अधीक्षक आरके केसरवानी के हटने के बाद से यहां किसी की तैनाती नहीं हो सकी।
नए सुपरिंटेंडेंट ने चार्ज लेने के बाद जेल के भीतर बैरकों व अन्य स्थानों का भ्रमण कर व्यवस्था का जायजा लिया। बंदियों को पहले से बेहतर भोजन व्यवस्था करने का आश्वासन दिया। जेल में ओवर क्राउडिंग को बड़ी समस्या करार देते हुए बताया कि अवांछनीय गतिविधियों पर रोक लगाएंगे।
याद आया 10 मार्च 2012 का दृश्य
दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से सुसाइड करके खुद की इहलीला समाप्त करने वाले तत्कालीन जेल अधीक्षक आरके केसरवानी के बाद सोमवार को जब नए अधिकारी ने चार्ज संभाला तो 10 मार्च 2012 की याद सबके जेहन में एक बार फिर ताजा हो गई। उस दिन जेल अधिकारी के खिलाफ हमला करने की साजिश के आरोप में तीन बदमाशों को पुलिस ने जेल भेजा। आरोप लगा कि उनके दाखिल होते ही अधीक्षक ने जेल के सिपाहियों से उनकी पिटाई करवाई, जिससे बाकी बंदी भड़क गए। जेल प्रशासन ने ज्यादा सख्ती की तो बंदियों ने किचेन से सिलेंडर लाकर जेल में आग लगाने का प्रयास किया। भीतर के दो गेट तोड़ कर ढाई-तीन सौ बंदी मेन गेट तोड़ने लगे। हालात काबू से बाहर होते देख तत्कालीन जेल अधीक्षक केसरवानी ने दोनों हाथ में पिस्टल लेकर फायरिंग करना शुरू की। तमाम बंदियों को गोली लगी और एक की मौत भी हो गई थी। उच्चस्तरीय जांच के बाद केसरवानी निलंबित कर दिए गए। तब से जेल अधीक्षक का चार्ज एसडीएम सदर के पास रहा। पिछले हफ्ते मेरठ जेल में तैनात संतलाल यादव को यहां पोस्ट किया गया।
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बस्ती।
जनपद कारागार के अधीक्षक की पांच वर्ष से खाली कुर्सी पर सोमवार को अफसर की तैनाती हो गई। मेरठ जेल से स्थानांतरित होकर संतलाल यादव ने यहां के जेल अधीक्षक का पद भार ग्रहण किया। 2012 में जेल के अंदर बवाल और फायरिंग के बाद निलंबित किए गए तत्कालीन अधीक्षक आरके केसरवानी के हटने के बाद से यहां किसी की तैनाती नहीं हो सकी।
नए सुपरिंटेंडेंट ने चार्ज लेने के बाद जेल के भीतर बैरकों व अन्य स्थानों का भ्रमण कर व्यवस्था का जायजा लिया। बंदियों को पहले से बेहतर भोजन व्यवस्था करने का आश्वासन दिया। जेल में ओवर क्राउडिंग को बड़ी समस्या करार देते हुए बताया कि अवांछनीय गतिविधियों पर रोक लगाएंगे।
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याद आया 10 मार्च 2012 का दृश्य
दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से सुसाइड करके खुद की इहलीला समाप्त करने वाले तत्कालीन जेल अधीक्षक आरके केसरवानी के बाद सोमवार को जब नए अधिकारी ने चार्ज संभाला तो 10 मार्च 2012 की याद सबके जेहन में एक बार फिर ताजा हो गई। उस दिन जेल अधिकारी के खिलाफ हमला करने की साजिश के आरोप में तीन बदमाशों को पुलिस ने जेल भेजा। आरोप लगा कि उनके दाखिल होते ही अधीक्षक ने जेल के सिपाहियों से उनकी पिटाई करवाई, जिससे बाकी बंदी भड़क गए। जेल प्रशासन ने ज्यादा सख्ती की तो बंदियों ने किचेन से सिलेंडर लाकर जेल में आग लगाने का प्रयास किया। भीतर के दो गेट तोड़ कर ढाई-तीन सौ बंदी मेन गेट तोड़ने लगे। हालात काबू से बाहर होते देख तत्कालीन जेल अधीक्षक केसरवानी ने दोनों हाथ में पिस्टल लेकर फायरिंग करना शुरू की। तमाम बंदियों को गोली लगी और एक की मौत भी हो गई थी। उच्चस्तरीय जांच के बाद केसरवानी निलंबित कर दिए गए। तब से जेल अधीक्षक का चार्ज एसडीएम सदर के पास रहा। पिछले हफ्ते मेरठ जेल में तैनात संतलाल यादव को यहां पोस्ट किया गया।
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