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प्राणघातक हमले के दो को चार वर्ष की सजा
Updated Thu, 29 Nov 2018 10:27 PM IST
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प्राणघातक हमले के आरोपी को चार वर्ष की सजा
रुधौली थाना क्षेत्र की घटना
एडीजे प्रथम कोर्ट ने सुनाया फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मदन लाल निगम की अदालत ने प्राण घातक हमला कर चोट पहुंचाने के मामले में सगे भाइयों को चार-चार वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई। प्रत्येक पर छह-छह हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है। इसे न अदा करने पर दो माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
एडीजीसी क्रिमिनल राघवेश प्रसाद पांडेय ने कोर्ट में घटना का विवरण रखा। बताया कि रुधौली क्षेत्र के अठदेवरा निवासी अब्दुल करीम ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि वह बाहर रहता है। 24 मार्च 2008 शाम छह बजे गांव के अब्दुल अजीज की बकरियां उसके खेत में बरसीम चर रही थीं, इसका उलाहना देने पर उसके पिता अब्दुल वहाव अजीज के घर पहुंच गए। इसी बात से नाराज अजीज, अब्दुल मजीद व सईद एकजुट होकर गाली व जान से मारने की धमकी देते हुए मारने-पीटने लगे। शोर सुनकर उसकी मां साहिदा व बहन साफिया पहुंची तो उस पर भी आरोपियों नेे हमला कर दिया। इससे तीनों को गंभीर चोट आई। जिला अस्पताल में इलाज के लिए उन्हें भर्ती कराया गया, जहां सिर में गंभीर चोट व फ्रैक्चर के चलते अब्दुल वहाब को मेडिकल कॉलेज लखनऊ रेफर कर दिया गया। रिपोर्ट के आधार पर एनसीआर दर्ज हुआ। मेडिकल रिपोर्ट व एक्सरे के बाद कोर्ट के आदेश पर प्राणघातक हमला व गंभीर चोट की धाराएं पुलिस ने बढ़ाई। तीनों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल हुआ। घटना के समय सईद नाबालिग था। इसलिए उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड को संदर्भित कर दिया गया। अभियोजन की ओर से वादी व चोटिल सहित दस गवाहों के बयान हुए। इसी आधार पर न्यायालय ने अब्दुल अजीज व अब्दुज मजीद को सजा सुनाई।
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रुधौली थाना क्षेत्र की घटना
एडीजे प्रथम कोर्ट ने सुनाया फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मदन लाल निगम की अदालत ने प्राण घातक हमला कर चोट पहुंचाने के मामले में सगे भाइयों को चार-चार वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई। प्रत्येक पर छह-छह हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है। इसे न अदा करने पर दो माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
एडीजीसी क्रिमिनल राघवेश प्रसाद पांडेय ने कोर्ट में घटना का विवरण रखा। बताया कि रुधौली क्षेत्र के अठदेवरा निवासी अब्दुल करीम ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि वह बाहर रहता है। 24 मार्च 2008 शाम छह बजे गांव के अब्दुल अजीज की बकरियां उसके खेत में बरसीम चर रही थीं, इसका उलाहना देने पर उसके पिता अब्दुल वहाव अजीज के घर पहुंच गए। इसी बात से नाराज अजीज, अब्दुल मजीद व सईद एकजुट होकर गाली व जान से मारने की धमकी देते हुए मारने-पीटने लगे। शोर सुनकर उसकी मां साहिदा व बहन साफिया पहुंची तो उस पर भी आरोपियों नेे हमला कर दिया। इससे तीनों को गंभीर चोट आई। जिला अस्पताल में इलाज के लिए उन्हें भर्ती कराया गया, जहां सिर में गंभीर चोट व फ्रैक्चर के चलते अब्दुल वहाब को मेडिकल कॉलेज लखनऊ रेफर कर दिया गया। रिपोर्ट के आधार पर एनसीआर दर्ज हुआ। मेडिकल रिपोर्ट व एक्सरे के बाद कोर्ट के आदेश पर प्राणघातक हमला व गंभीर चोट की धाराएं पुलिस ने बढ़ाई। तीनों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल हुआ। घटना के समय सईद नाबालिग था। इसलिए उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड को संदर्भित कर दिया गया। अभियोजन की ओर से वादी व चोटिल सहित दस गवाहों के बयान हुए। इसी आधार पर न्यायालय ने अब्दुल अजीज व अब्दुज मजीद को सजा सुनाई।
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