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फोटो... हवा में किसानों के अच्छे दिनों की योजनाएं
Updated Tue, 04 Sep 2018 11:46 PM IST
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हवा में किसानों के अच्छे दिनों की योजनाएं
सिर्फ रजिस्ट्रेशन तक ही सीमित रह गए किसान
उद्यान और कृषि संवर्धन से आय बढ़ाने की कोशिश
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। कृषि वानिकी और औद्यानिक फसल को बढ़ावा देने के नाम पर भारी भरकम खर्च के बावजूद किसानों के अच्छे दिन सिर्फ दिवास्वप्न हैं। मिशन चलाने के बावजूद किसान अब भी गेहूं, धान, गन्ने की खेती पर निर्भर है। बिक्री-विपणन के हालात से सब परिचित हैं। उद्यान विभाग की ओर से संचालित योजनाएं सिर्फ रजिस्ट्रेशन तक ही सिमट कर रह गईं। उद्यान विभाग की ओर से वर्तमान में पांच योजनाएं चल रही हैं। इसमें एकीकृत बागवानी विकास मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, अनुसूचित औद्योगिक विकास योजना और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना जिले में लागू हैं। किसानों को इसका फायदा तो दूर, योजना की जानकारी ही नहीं है।
भानपुर तहसील के साड़ी कल्प ग्राम पंचायत के प्रधान श्रीराम पांडेय का कहना है कि साल भर पहले उनके गांव में मिट्टी जांच करने टीम गई थी। नमूना भी लेकर गए लेकिन परिणाम नहीं बताए। बहादुरपुर ब्लॉक के प्रगतिशील किसान अवधेश मिश्र का कहना है कि कृषि और औद्यानिक विभाग में योजनाओं की भरमार है। मगर किसानों को आज भी पारंपरिक तौर तरीकों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। डीएम डॉ. राजशेखर का कहना है कि कृषि वानिकी और औद्यानिक मुद्दे पर काफी सुधार किया जा रहा है। किसानों को समृद्ध बनाने की किसी भी योजना का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा।
प्रोत्साहन के स्कीम तमाम
कृषि के अतिरिक्त किसान के अन्य आय के साधनों जैसे पशुपालन, मुर्गीपालन, मधुमक्खीपालन, मछलीपालन एवं डेयरी के विकास की विभिन्न योजनाएं लागू हैं। राष्ट्रीय पशुधन मिशन, गोकुल मिशन, नीली क्रांति, मधुमक्खी पालन, मुर्गी पालन आदि बहुत सी योजनाएं हैं। कृषि मशीनीकरण, सिंचाई, बीज, कीटनाशकों, उर्वरकों, विपणन, शोध एवं विकास, ऋण, जैविक खेती, सूचना प्रौद्योगिकी एवं विस्तार जैसे विभिन्न मुद्दों पर गंभीरता तो दिखी मगर काम नहीं हो सका।
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मजबूरन चहेतों को रेवड़ी
प्रदेश और केंद्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन की समयबद्धता विभागीय जिम्मेदारों को तोड़ देती है लेकिन कार्य संस्कृति विकसित न हो पाने से मजबूर हैं। सूत्र बताते हैं कि कई बार कालम पूरा करने के लिए मजबूरन रेवड़ी बांटनी पड़ती है।
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हवा में किसानों के अच्छे दिनों की योजनाएं
सिर्फ रजिस्ट्रेशन तक ही सीमित रह गए किसान
उद्यान और कृषि संवर्धन से आय बढ़ाने की कोशिश
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। कृषि वानिकी और औद्यानिक फसल को बढ़ावा देने के नाम पर भारी भरकम खर्च के बावजूद किसानों के अच्छे दिन सिर्फ दिवास्वप्न हैं। मिशन चलाने के बावजूद किसान अब भी गेहूं, धान, गन्ने की खेती पर निर्भर है। बिक्री-विपणन के हालात से सब परिचित हैं। उद्यान विभाग की ओर से संचालित योजनाएं सिर्फ रजिस्ट्रेशन तक ही सिमट कर रह गईं। उद्यान विभाग की ओर से वर्तमान में पांच योजनाएं चल रही हैं। इसमें एकीकृत बागवानी विकास मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, अनुसूचित औद्योगिक विकास योजना और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना जिले में लागू हैं। किसानों को इसका फायदा तो दूर, योजना की जानकारी ही नहीं है।
भानपुर तहसील के साड़ी कल्प ग्राम पंचायत के प्रधान श्रीराम पांडेय का कहना है कि साल भर पहले उनके गांव में मिट्टी जांच करने टीम गई थी। नमूना भी लेकर गए लेकिन परिणाम नहीं बताए। बहादुरपुर ब्लॉक के प्रगतिशील किसान अवधेश मिश्र का कहना है कि कृषि और औद्यानिक विभाग में योजनाओं की भरमार है। मगर किसानों को आज भी पारंपरिक तौर तरीकों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। डीएम डॉ. राजशेखर का कहना है कि कृषि वानिकी और औद्यानिक मुद्दे पर काफी सुधार किया जा रहा है। किसानों को समृद्ध बनाने की किसी भी योजना का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा।
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प्रोत्साहन के स्कीम तमाम
कृषि के अतिरिक्त किसान के अन्य आय के साधनों जैसे पशुपालन, मुर्गीपालन, मधुमक्खीपालन, मछलीपालन एवं डेयरी के विकास की विभिन्न योजनाएं लागू हैं। राष्ट्रीय पशुधन मिशन, गोकुल मिशन, नीली क्रांति, मधुमक्खी पालन, मुर्गी पालन आदि बहुत सी योजनाएं हैं। कृषि मशीनीकरण, सिंचाई, बीज, कीटनाशकों, उर्वरकों, विपणन, शोध एवं विकास, ऋण, जैविक खेती, सूचना प्रौद्योगिकी एवं विस्तार जैसे विभिन्न मुद्दों पर गंभीरता तो दिखी मगर काम नहीं हो सका।
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मजबूरन चहेतों को रेवड़ी
प्रदेश और केंद्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन की समयबद्धता विभागीय जिम्मेदारों को तोड़ देती है लेकिन कार्य संस्कृति विकसित न हो पाने से मजबूर हैं। सूत्र बताते हैं कि कई बार कालम पूरा करने के लिए मजबूरन रेवड़ी बांटनी पड़ती है।