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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Year Ender 2023 Neither train nor bus came on the convenient track in Bareilly

Year Ender 2023: बरेली में सहूलियत के ट्रैक पर न ट्रेन आई... न बस; जानें परिवहन और रेल यातायात का हाल

Sat, 30 Dec 2023 03:46 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 30 Dec 2023 03:46 PM IST
सार

एक साल में ट्रेनों और रोडवेज बसों से यात्रियों के आवागमन में करीब 10 फीसदी इजाफा हुआ है। दूसरी ओर जंक्शन और रोडवेज बस अड्डों पर यात्री सुविधाओं में वृद्धि का इंतजार ही पूरा नहीं हुआ। 

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Year Ender 2023 Neither train nor bus came on the convenient track in Bareilly
बरेली जंक्शन पर खड़े यात्री - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली में आवागमन की राह 2023 में भी सुगम नहीं हो सकीं। ट्रेनों की वेटिंग यात्रा में बाधा बनती रही। बरेली से दक्षिण भारत के लिए रेल सेवाओं की वर्षों पुरानी मांग रेलवे बोर्ड में जाने के बाद लटक गई। मुंबई के लिए रेलवे सेवाओं के विस्तार और सांसदों, मंत्रियों के प्रस्तावों को भी गति नहीं मिली। वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन दिल्ली-लखनऊ रेल रूट की रफ्तार बढ़ाने के अधूरे काम में फंस गया। बस सेवा में भी अपेक्षित सुविधाओं की बढ़ोतरी नहीं हुई। सेटेलाइट और पुराना बस अड्डा पर यात्री सुविधाओं की बेहतरी की योजनाएं आगे नहीं बढ़ सकीं। जाम की समस्या से भी निजात नहीं मिली। आइए जानते हैं क्या रहा परिवहन व यातायात सेवा का हाल...

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न दौड़ी वंदे भारत, न रोडवेज सेवाओं में हुआ सुधार
एक साल में ट्रेनों और रोडवेज बसों से यात्रियों के आवागमन में करीब 10 फीसदी इजाफा हुआ है। दूसरी ओर जंक्शन और रोडवेज बस अड्डों पर यात्री सुविधाओं में वृद्धि का इंतजार ही पूरा नहीं हुआ। त्योहार और सहालग के दिनों में जंक्शन पर आने-जाने वाले यात्रियों का आंकड़ा 40-45 और रोडवेज के दोनों बस अड्डों का 30-35 हजार रोजाना पहुंचता है। रोडवेज के दोनों बस अड्डों पर 15 हजार और जंक्शन पर 25 हजार यात्रियों के लिहाज से यात्री सुविधाएं हैं। जंक्शन और रोडवेज बस अड्डों पर यात्री सुविधाओं की बेहतरी के लिए पूरे साल कोई काम ही नहीं हुए।
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सिटी बसों की मिली सौगात, संख्या बढ़ने का इंतजार
2023 में शहर को सिटी बस सेवा की सौगात मिली। हालांकि, साल के पहले तीन महीने तो सिटी बसें घाटे में दौड़ती रहीं। इसके बाद सिटी बसों का दायरा बढ़ाकर फरीदपुर, फतेहगंज पूर्वी, शीशगढ़, शेरगढ़ और आंवला तक कर दिया गया। इससे घाटा तो कम हुआ, लेकिन शहर में सिटी बसों की संख्या कम हो गई। अब सिटी बसों का बेड़ा 50 से बढ़ाकर 100 किया जाना है। सिटी बस डिपो के बेड़े में नए साल के पहले छह महीने में 10 नई ई-बसें शामिल होने की उम्मीद है।

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सड़क हादसों में 27.25 तो मरने वालों की संख्या में 6.94 फीसदी इजाफा
साल 2023 में बदहाल परिवहन सेवाओं संग सड़कों के गड्ढे और ब्लैक स्पॉट जान के दुश्मन बने रहे। 2022 के मुकाबले 2023 में जहां सड़क हादसों में 27.25 फीसदी इजाफा हुआ वहीं हादसों में मरने वालों की संख्या में 6.94 और घायलों की संख्या में 22.41 फीसदी तक इजाफा हुआ। 2023 में हुए 1158 सड़क हादसों ने 457 लोगों की जान ले ली। वहीं 980 लोग घायल भी हुए। इसके बाद भी हादसे रोकने के लिए किए जाने वाले जरूरी इंतजाम आगे नहीं बढ़ सके।

बजट मिलने के बाद भी शुरू नहीं हो सका दो अंडरपास का निर्माण
सिटी श्मशान और डीआरएम रेलवे क्रॉसिंग पर प्रस्तावित अंडरपास का निर्माण बजट जारी होने के बाद भी 2023 में शुरू नहीं हो सका। सिटी श्मशान अंडरपास का निर्माण कार्य गलत मानचित्र के कारण रुक गया। वहीं डीआरएम अंडरपास का निर्माण उत्तर प्रदेश स्टेट हाईवे अथॉरिटी और रेलवे के बीच नैनीताल हाईवे की खोदाई को लेकर विवाद में फंस गया। 30 करोड़ के दोनों प्रोजेक्ट मार्च 2024 तक पूरे होने थे। हालांकि, अब फिर से काम शुरू कराने की कवायद तेज हो गई है।

पूरे साल चले उच्चीकरण के काम  नहीं बढ़ सकी ट्रैक पर रफ्तार
दिल्ली-लखनऊ के बीच साल 2023 में रेलवे ट्रैक उच्चीकरण, यार्ड रिमॉडलिंग, इंटरलॉकिंग, नई लूप लाइन समेत कई काम हुए। इसके बाद भी रोजा-लखनऊ के बीच करीब 168 किमी रेल खंड में रेलवे ट्रैक की औसत स्पीड को बढ़ाकर 120 किमी प्रति घंटा नहीं किया जा सका। ऐसे में बरेली होते हुए वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन भी शुरू नहीं हो सका। रेलखंड की औसत स्पीड न बढ़ने के कारण पूरे साल रेल यात्रियों को ट्रेनों की लेट-लतीफी का सामना करना पड़ा। हालांकि, अप्रैल 2024 तक इस रेलखंड की औसत स्पीड बढ़ाकर 120 किमी किया जाना प्रस्तावित है।

जाम बना चुनौती  निस्तारण के लिए योजनाएं ही बनती रहीं
शहर में जाम पूरे साल चुनौती बना रहा। ट्रैफिक पुलिस जाम की समस्या के निपटने के लिए योजनाएं ही बनाती रही। एक साल में शहर की सड़कों पर करीब 5000 ऑटो और ई-रिक्शा बढ़ गए। अन्य दोपहिया और चार पहिया वाहनों की संख्या में भी इजाफा हुआ। जाम से निपटने के लिए ऑटो व ई-रिक्शा का कलर कोडिंग से संचालन कराने के लिए चार महीने जद्दोजहद चलती रही। ट्रैफिक पुलिस ने कभी चौराहों को डिवाइडर लगाकर बंद किया तो कभी ऑटो व ई-रिक्शा के लिए अस्थाई स्टैंड बनाए, लेकिन कोई कवायद कामयाब नहीं हुई। ऐसे में लोग पूरे साल जाम से जूझते रहे।

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