अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: शिक्षा और संस्कार के जुड़ाव से सशक्त होंगी महिलाएं, 'आधी आबादी' ने साझा किए विचार
बरेली में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में अमर उजाला कार्यालय परिसर में संवाद कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें शहर की नामचीन महिलाओं ने अपने विचार रखे।
विस्तार
समाज की सोच बदलने के लिए महिलाओं को सशक्त होना होगा। इसके लिए शिक्षा और संस्कारों का समावेश जरूरी है। जागरूक न होने की वजह से तमाम महिलाएं संविधान प्रदत्त अधिकारों से वंचित हैं। वहीं, संस्कारों के अभाव में वे सकारात्मक संदेश का प्रसार भी नहीं कर पा रहीं। बरेली में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में अमर उजाला कार्यालय परिसर में आयोजित संवाद कार्यक्रम में शहर की नामचीन महिलाओं ने ये बातें कहीं।
महिला चिकित्सकों, महिला उद्यमियों, शिक्षिकाओं और क्लब संचालिकाओं के इन विचारों से वहां मौजूद छात्राओं ने भी सहमति जताई। महिलाओं ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार महिलाओं के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही हैं पर जागरूकता की कमी से वे इन सुविधाओं से वंचित हैं। महज अक्षर ज्ञान ही शिक्षित होने का प्रमाण नहीं है। साथ में संस्कार भी जरूरी हैं।
महिलाओं ने तर्क दिया कि वर्तमान में कई महिलाएं निजी हित के लिए संविधान प्रदत्त अधिकारों का दुरुपयोग भी कर रही हैं। कब, कहां और कैसे प्रतिक्रिया देनी है, इसका ख्याल रखना भी जरूरी है। यह परिवार से ही सीखने को मिलेगा। अभिभावक भी ध्यान दें कि वे बच्चों को क्या सिखा रहे हैं।
बेटियों के प्रति खत्म नहीं हुआ है भेदभाव
कई महिलाओं का मानना था कि अभी भी घरों में बेटियों के प्रति भेदभाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। बेटियों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। इसके जिम्मेदार परिजन हैं। सुझाव दिया कि परिवार की जिम्मेदारी है कि बेटियों से ज्यादा बेटों को समझाएं। उन्हें महिलाओं का सम्मान करना सिखाएं।
सही-गलत का फर्क समझाना जरूरी
संवाद के दौरान महिलाओं ने बताया कि वर्तमान में कई बेटियां सही-गलत का फर्क नहीं कर पातीं। घर से भागना, फोटो-वीडियो शेयर करना, बेहतर भविष्य के लिए जरूरी बातों का विरोध करना, अधिकारों का दुरुपयोग करने और दोहरी जिम्मेदारी (परिवार और नौकरी) में सामंजस्य न बिठा पाने से आपराधिक गतिविधियों का शिकार होने की आशंका रहती है। सही-गलत का फर्क समझना जरूरी है।
मंथन के मोती
अभिभावक बच्चों की बातों का सुनें व समझें।
बेटियां अंतरिक्ष तक उड़ान भर रही हैं। उन्हें बढ़ने का मौका दें।
परिजन बहू-बेटियों की तकलीफ को समझें।
स्वस्थ, शिक्षित महिला से ही समाज आगे बढ़ेगा।
बेटों पर भी नकेल कसें। उन्हें महिलाओं का सम्मान करना सिखाएं।
बेटा-बेटी के साथ दोस्ताना व्यवहार रखें।
प्रो. वंदना शर्मा, प्रो. बीनम सक्सेना, प्रो. चारू मेहरोत्रा, उद्यमी अमिता अग्रवाल, डॉ. लतिका अग्रवाल, डॉ. दरख्शॉ अब्बास, डॉ. प्रीति वैश्य, डॉ. मीनल ऐरन, डॉ. कनुप्रिया अग्रवाल, इंटीरियर डेकोरेटर डालिमा अग्रवाल, एनजीओ संचालिका रिचा शर्मा, राम भरोसे लाल इंटर कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. मीना जैन, डॉ. सीमा कुदेशिया, प्रिंसिपल राधा सिंह, डॉ. कुलजीत कौर बासु, डॉ. नीलू मिश्रा, लवनिका टंडन, डॉ. रितु भूटानी, डॉ. कविता अरोरा समेत बरेली कॉलेज की छात्राएं आयुषी दीक्षित, खुशी सागर, कनक श्रीवास्तव, हैप्पी, श्रद्धा श्रीवास्तव, साक्षी सिंह ने विचार साझा किए।