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पशुपालन से जुड़कर महिलाएं हो रहीं सशक्त
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आईवीआरआई
- फोटो : सोशल नेटवर्क
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पशुओं के आहार की व्यवस्था की दी जानकारी
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बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन अनुभाग की ओर से बुधवार को ‘स्वच्छ दुग्ध उत्पादन के लिए दुधारू पशुओं का वैज्ञानिकी प्रबंधन’ विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। नेटवर्क परियोजना एवं कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम एससीएसपी योजना के तहत 26 मार्च तक चलेगा।
मुख्य अतिथि आईवीआरआई के संयुक्त निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. महेश चंद्र ने महिलाओं के पशुपालन व्यवसाय से जुड़ने की सराहना की। कहा, महिलाएं संगठित होकर डेयरी संचालित कर रही हैं। जैविक दुग्ध उत्पादन के बढ़ते महत्व के साथ ही, जैविक कृषि के लाभ बताए। कार्यक्रम संयोजक एवं भैंस सुधार नेटवर्क परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. एकेएस तोमर ने भैंस की प्रमुख नस्लों मुर्रा जाफराबादी, शुरती आदि से दुग्ध उत्पादन बढ़ने की बात कही। नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक धर्मेंद्र मिश्र ने पशुपालन के लिए दिए जा रहे क्रेडिट कार्ड की जानकारी दी। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आरके सिंह, आयोजन सचिव एवं पशुधन उत्पादन, प्रबंधन अनुभाग के वैज्ञानिक डॉ. हरिओम पांडेय, पशुधन उत्पादन, प्रबंधन अनुभाग के प्रभारी डॉ. ज्ञानेंद्र गौड़, डॉ. ओम सिंह, डॉ. ओमवीर सिंह आदि मौजूद रहे। ब्यूरो
मुख्य अतिथि आईवीआरआई के संयुक्त निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. महेश चंद्र ने महिलाओं के पशुपालन व्यवसाय से जुड़ने की सराहना की। कहा, महिलाएं संगठित होकर डेयरी संचालित कर रही हैं। जैविक दुग्ध उत्पादन के बढ़ते महत्व के साथ ही, जैविक कृषि के लाभ बताए। कार्यक्रम संयोजक एवं भैंस सुधार नेटवर्क परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. एकेएस तोमर ने भैंस की प्रमुख नस्लों मुर्रा जाफराबादी, शुरती आदि से दुग्ध उत्पादन बढ़ने की बात कही। नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक धर्मेंद्र मिश्र ने पशुपालन के लिए दिए जा रहे क्रेडिट कार्ड की जानकारी दी। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आरके सिंह, आयोजन सचिव एवं पशुधन उत्पादन, प्रबंधन अनुभाग के वैज्ञानिक डॉ. हरिओम पांडेय, पशुधन उत्पादन, प्रबंधन अनुभाग के प्रभारी डॉ. ज्ञानेंद्र गौड़, डॉ. ओम सिंह, डॉ. ओमवीर सिंह आदि मौजूद रहे। ब्यूरो
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