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एकांतवास से दुरुस्त होंगे गजराज के होशोहवास
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बरेली। परचई गांव में बेकाबू हुए गजराज को रबर फैक्ट्री में एकांतवास में रखा गया तो उसका बिगड़ा मिजाज कुछ बेहतर हो गया। बुधवार को गजराज एक बार भी अपने महावत पर आक्रामक नहीं हुआ। गजराज की हालत सामान्य होते देख वन विभाग अफसरों ने राहत की सांस ली है। फिर भी किसी को फिलहाल उसके नजदीक नहीं जाने की हिदायत दी गई है। अब 15 दिनों तक गजराज को एकांतवास में ही रखा जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि 15 दिन अकेले रहने से वह पूरी तरह सामान्य हो जाएगा।
नेपाल के दोनों उत्पाती हाथियों को भगाने के लिए दुधवा नेशनल पार्क से तीन हथिनियों और एक हाथी ‘गजराज’ को लाया गया था, लेकिन 12 जुलाई को मीरगंज के परचई गांव में अचानक गजराज बेकाबू हो गया था। उसने चारा देने पहुंचे महावत पर हमला कर दिया था, हालांकि पांव बंधे होने से कोई गंभीर हादसा नहीं हुआ। गजरात को शांत कराने के लिए वन विभाग की टीम ने उसे परचई गांव के प्राइमरी स्कूल में जंजीरों के सहारे पेड़ से बांध दिया था। दो दिनों तक उसकी हालत में कोई सुधार न होने पर नैनीताल और दुधवा से चिकित्सकों की टीम गांव पहुंची और उसकी हरकतों की जांच की। संभावना जताई गई कि आसपास मौजूद भीड़ और हीटिंग के लिए अनुकूल मौसम मिलने से वो बेकाबू हुआ, जिसके बाद उसे जंजीरों से बांधकर ट्रक में भरकर फतेहगंज पश्चिमी की रबड़ फैक्ट्री स्थित आवासीय कॉलोनी के परिसर में एकांतवास के लिए छोड़ दिया गया। पांच दिन बाद बुधवार को उसकी हालत में पहली बार सुधार दिखा, लेकिन 24 घंटे बाद ही एकांतवास से निकलने पर फिर बेकाबू होने की संभावना के चलते गजराज को रबर फैक्ट्री में 15 दिनों तक और रखे जाने का निर्णय लिया गया है।
खा रहा चारा और कर रहा आराम
दुधवा से गजराज की निगरानी को आए एसके अमरेश के मुताबिक बुधवार की सुबह गजराज महावत पर एक बार भी नहीं झपटा। फिलहाल उसे पेड़ों की पत्तियां और चारा खिलाया जा रहा है। दिन में कई बार आसपास के ग्रामीण उसे देखने पहुंचे, जिन्हें लौटा दिया गया। रबर फैक्ट्री के आसपास रहने वालों को अलर्ट कर दिया गया है। बताया कि हालत में सुधार होने पर दुधवा से आए चिकित्सकों की टीम लौट गई है। जो गुरुवार को फिर गजराज को जांचने आएगी। हालत सामान्य रहने पर 15 दिन तक रबर फैक्ट्री में रखने के बाद वापस दुधवा नेशनल पार्क भेज दिया जाएगा।
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नेपाल के दोनों उत्पाती हाथियों को भगाने के लिए दुधवा नेशनल पार्क से तीन हथिनियों और एक हाथी ‘गजराज’ को लाया गया था, लेकिन 12 जुलाई को मीरगंज के परचई गांव में अचानक गजराज बेकाबू हो गया था। उसने चारा देने पहुंचे महावत पर हमला कर दिया था, हालांकि पांव बंधे होने से कोई गंभीर हादसा नहीं हुआ। गजरात को शांत कराने के लिए वन विभाग की टीम ने उसे परचई गांव के प्राइमरी स्कूल में जंजीरों के सहारे पेड़ से बांध दिया था। दो दिनों तक उसकी हालत में कोई सुधार न होने पर नैनीताल और दुधवा से चिकित्सकों की टीम गांव पहुंची और उसकी हरकतों की जांच की। संभावना जताई गई कि आसपास मौजूद भीड़ और हीटिंग के लिए अनुकूल मौसम मिलने से वो बेकाबू हुआ, जिसके बाद उसे जंजीरों से बांधकर ट्रक में भरकर फतेहगंज पश्चिमी की रबड़ फैक्ट्री स्थित आवासीय कॉलोनी के परिसर में एकांतवास के लिए छोड़ दिया गया। पांच दिन बाद बुधवार को उसकी हालत में पहली बार सुधार दिखा, लेकिन 24 घंटे बाद ही एकांतवास से निकलने पर फिर बेकाबू होने की संभावना के चलते गजराज को रबर फैक्ट्री में 15 दिनों तक और रखे जाने का निर्णय लिया गया है।
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दुधवा से गजराज की निगरानी को आए एसके अमरेश के मुताबिक बुधवार की सुबह गजराज महावत पर एक बार भी नहीं झपटा। फिलहाल उसे पेड़ों की पत्तियां और चारा खिलाया जा रहा है। दिन में कई बार आसपास के ग्रामीण उसे देखने पहुंचे, जिन्हें लौटा दिया गया। रबर फैक्ट्री के आसपास रहने वालों को अलर्ट कर दिया गया है। बताया कि हालत में सुधार होने पर दुधवा से आए चिकित्सकों की टीम लौट गई है। जो गुरुवार को फिर गजराज को जांचने आएगी। हालत सामान्य रहने पर 15 दिन तक रबर फैक्ट्री में रखने के बाद वापस दुधवा नेशनल पार्क भेज दिया जाएगा।
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