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किसने जारी करा दिया ‘नई रोशनी’ का फर्जी शासनादेश
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Sun, 21 Aug 2016 01:50 AM IST
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प्रमुख सचिव पंचायतीराज ने बरेली सहित प्रदेश के सभी डीएम और जिला पंचायतराज अधिकारियों को आगाह किया है कि ‘नई रोशनी’ के नाम से जारी कराया गया शासनादेश फर्जी है। उन्होंने आशंका व्यक्त की है कि सौर ऊर्जा की लाइट बेचने वाली प्राइवेट कंपनियों ने फायदा उठाने के उद्देश्य से पंचायत राज विभाग के नाम से यह फर्जी आदेश जारी कराया होगा। क्योंकि हर छह महीने में प्रत्येक जिले को औसतन ग्राम निधि के लिए पांच करोड़ और उसके अधिक राशि विभिन्न योजनाओं में जारी होती है। न कि इस नई रोशनी योजना के नाम से। फर्जी शासनादेश के इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच बैठा दी गई है। जिसके लिए जिलों से जानकारी जुटाई जा रहीं हैं।
प्रमुख सचिव चंचल कुमार तिवारी ने जिलों को सतर्क करने वाले आदेश में कहा है कि गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर जिलों के प्रधान तथा अधिकारियों ने शासन को बताया है कि 24 जून 2016 को पत्रांक 243-2015-16 से स्ट्रीट लाइट के बारे में पंचायतीराज विभाग के विशेष सचिव की ओर से एक आदेश जारी किया गया है। जिसमें नई रोशनी योजना के तहत प्रत्येक जिले को 5-5 करोड़ रुपये ग्राम निधि में भेजे जाने का उल्लेख है। इस शासनादेश के आधार पर अभी तक कोई धनराशि नहीं मिली है। वहीं दूसरी ओर कुछ लोग स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए ग्राम पंचायत का प्रस्ताव मांग रहे हैं। उन्होंने 85-85 वाट की सीएफएल लगाने का उल्लेख करते हुए रेट भी दिए हैं।
दो जिलों से की गई इस जानकारी के आधार पर प्रमुख सचिव ने विभाग में इस नंबर का शासनादेश तलाशा गया तो वहां कुछ था ही नहीं। शक में तो शुरू में वित्तीय 2015-16 से था, क्योंकि 24 जून 2016 को जारी शासनादेश में वित्तीय वर्ष 2016-17 होना चाहिए था।
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प्रमुख सचिव ने इसे गंभीरता से लिया और सभी जिलों को आदेश कर दिए। जिसमें कहा है कि नई रोशनी के नाम से स्ट्रीट लाइट लगवाने की कोई योजना नहीं है। अगर इस योजना का उल्लेख करके कोई कंपनी या उसका एजेंट आता है तो उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराएं। साथ ही डीएम, सीडीओ और डीपीआरओ को इसकी जानकारी दी जाए।
शासन ने स्पष्ट किया है कि गांव में स्ट्रीट लाइट लगवाने के लिए पंचायत खुद स्वतंत्र हैं। वह अपनी ग्राम निधि की राशि से टेंडर प्रक्रिया अपनाकर स्ट्रीट लाइट लगवा सकती है। सीधे तौर पर शासन ने कोई कं पनी अधिकृत नहीं की है और न ही नई रोशनी नाम से शासनादेश जारी किया है।
शासन ने जिलों से मांगा ठगी का ब्योरा
प्रमुख सचिव पंचायतीराज चंचल कुमार तिवारी ने कहा है कि नई रोशनी योजना के तहत किसी भी जिले में किसी भी प्रधान से पैसा लिया गया हो तो उसकी सूचना डीएम और शासन को दें, जिसे प्रदेश स्तर से कराई जा रही जांच में शामिल किया जाएगा।
‘बरेली में ऐसी कोई जानकारी किसी प्रधान और पंचायत सचिव ने नहीं दी है। सभी खंड विकास अधिकारियों के माध्यम से शासनादेश के आधार पर पंचायतों से जानकारी कराई जा रही है। ऐसा कोई मामला आएगा तो एफआईआर दर्ज होगी।’ गौरव दयाल डीएम
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प्रमुख सचिव चंचल कुमार तिवारी ने जिलों को सतर्क करने वाले आदेश में कहा है कि गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर जिलों के प्रधान तथा अधिकारियों ने शासन को बताया है कि 24 जून 2016 को पत्रांक 243-2015-16 से स्ट्रीट लाइट के बारे में पंचायतीराज विभाग के विशेष सचिव की ओर से एक आदेश जारी किया गया है। जिसमें नई रोशनी योजना के तहत प्रत्येक जिले को 5-5 करोड़ रुपये ग्राम निधि में भेजे जाने का उल्लेख है। इस शासनादेश के आधार पर अभी तक कोई धनराशि नहीं मिली है। वहीं दूसरी ओर कुछ लोग स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए ग्राम पंचायत का प्रस्ताव मांग रहे हैं। उन्होंने 85-85 वाट की सीएफएल लगाने का उल्लेख करते हुए रेट भी दिए हैं।
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दो जिलों से की गई इस जानकारी के आधार पर प्रमुख सचिव ने विभाग में इस नंबर का शासनादेश तलाशा गया तो वहां कुछ था ही नहीं। शक में तो शुरू में वित्तीय 2015-16 से था, क्योंकि 24 जून 2016 को जारी शासनादेश में वित्तीय वर्ष 2016-17 होना चाहिए था।
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प्रमुख सचिव ने इसे गंभीरता से लिया और सभी जिलों को आदेश कर दिए। जिसमें कहा है कि नई रोशनी के नाम से स्ट्रीट लाइट लगवाने की कोई योजना नहीं है। अगर इस योजना का उल्लेख करके कोई कंपनी या उसका एजेंट आता है तो उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराएं। साथ ही डीएम, सीडीओ और डीपीआरओ को इसकी जानकारी दी जाए।
शासन ने स्पष्ट किया है कि गांव में स्ट्रीट लाइट लगवाने के लिए पंचायत खुद स्वतंत्र हैं। वह अपनी ग्राम निधि की राशि से टेंडर प्रक्रिया अपनाकर स्ट्रीट लाइट लगवा सकती है। सीधे तौर पर शासन ने कोई कं पनी अधिकृत नहीं की है और न ही नई रोशनी नाम से शासनादेश जारी किया है।
शासन ने जिलों से मांगा ठगी का ब्योरा
प्रमुख सचिव पंचायतीराज चंचल कुमार तिवारी ने कहा है कि नई रोशनी योजना के तहत किसी भी जिले में किसी भी प्रधान से पैसा लिया गया हो तो उसकी सूचना डीएम और शासन को दें, जिसे प्रदेश स्तर से कराई जा रही जांच में शामिल किया जाएगा।
‘बरेली में ऐसी कोई जानकारी किसी प्रधान और पंचायत सचिव ने नहीं दी है। सभी खंड विकास अधिकारियों के माध्यम से शासनादेश के आधार पर पंचायतों से जानकारी कराई जा रही है। ऐसा कोई मामला आएगा तो एफआईआर दर्ज होगी।’ गौरव दयाल डीएम