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जिन्हें दूध पिलाते रहे, उन्होंने ही डसा
बरेली
Updated Wed, 17 Feb 2016 01:28 AM IST
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एमएलसी का टिकट कटने के बाद आहत सपा नेता डॉ. अनिल शर्मा का कहना है कि जिन्हें वह दूध पिलाते रहे, उन्होंने ही डस लिया। नेताजी के परिवार से मेरे रिश्ते बरेली के कुछ नेताओं को रास नहीं आए। टिकट मिलने से कुछ नेताओं को लगा कि एमएलसी बन जाएंगे तो उनकी दुकान बंद हो जाएगी।
इंपीरियल सिनेमा कांपलेक्स में पत्रकारों से डा. अनिल शर्मा ने कहा कि - मुझे तो सपा प्रत्याशी घनश्याम लोधी को चुनाव लड़ाने में झिझक नहीं है, सोचना तो उन लोगों को पड़ रहा है जिन्होंने अपने दोस्त को भाजपा का टिकट दिलवा दिया। अब वही उनके टिकट काटने का श्रेय लेने में लगे हैं। डा. अनिल शर्मा ने कहा कि पार्टी में दो प्रमुख नेता अगर उनका टिकट कटवाने की बात कह रहे हैं तो वह बरेली के बड़े नेता के बेटे को एमएलसी का प्रत्याशी क्यों नहीं बनवा पाए। उन्होंने कहा कि अगर उनका टिकट कटा भी था तो कम से कम बरेली के किसी व्यक्ति को मिलता। रामपुर से पहले भी जो एमएलसी रहे हैं, वह बरेली कभी झांकने नहीं आए। डा. शर्मा ने कहा कि नामांकन वापसी तक पार्टी के किसी शीर्ष नेता से बात नहीं करेंगे, उसके बाद जब भी मुलाकात होगी तो शीर्ष नेतृत्व से कहूंगा कि बार-बार उनसे कुर्बानी ली जाती है। आखिर, उनका कसूर क्या है। भविष्य में पार्टी भले ही उनको कुछ न दे लेकिन ऐसा मौका भी न आए कि उनके कुर्बानी देने के बाद भी अपने ही लोगों की व्यंगात्मक बातें सुननी पड़ें।
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इंपीरियल सिनेमा कांपलेक्स में पत्रकारों से डा. अनिल शर्मा ने कहा कि - मुझे तो सपा प्रत्याशी घनश्याम लोधी को चुनाव लड़ाने में झिझक नहीं है, सोचना तो उन लोगों को पड़ रहा है जिन्होंने अपने दोस्त को भाजपा का टिकट दिलवा दिया। अब वही उनके टिकट काटने का श्रेय लेने में लगे हैं। डा. अनिल शर्मा ने कहा कि पार्टी में दो प्रमुख नेता अगर उनका टिकट कटवाने की बात कह रहे हैं तो वह बरेली के बड़े नेता के बेटे को एमएलसी का प्रत्याशी क्यों नहीं बनवा पाए। उन्होंने कहा कि अगर उनका टिकट कटा भी था तो कम से कम बरेली के किसी व्यक्ति को मिलता। रामपुर से पहले भी जो एमएलसी रहे हैं, वह बरेली कभी झांकने नहीं आए। डा. शर्मा ने कहा कि नामांकन वापसी तक पार्टी के किसी शीर्ष नेता से बात नहीं करेंगे, उसके बाद जब भी मुलाकात होगी तो शीर्ष नेतृत्व से कहूंगा कि बार-बार उनसे कुर्बानी ली जाती है। आखिर, उनका कसूर क्या है। भविष्य में पार्टी भले ही उनको कुछ न दे लेकिन ऐसा मौका भी न आए कि उनके कुर्बानी देने के बाद भी अपने ही लोगों की व्यंगात्मक बातें सुननी पड़ें।
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