{"_id":"592c7b5a4f1c1bdf15bdba61","slug":"where-was-the-child-thief-which-grp-left-like-this","type":"story","status":"publish","title_hn":"कहीं बच्चा चोर तो नहीं था जिसे जीआरपी ने ऐसे ही छोड़ दिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कहीं बच्चा चोर तो नहीं था जिसे जीआरपी ने ऐसे ही छोड़ दिया
बरेली।
Updated Tue, 30 May 2017 01:27 AM IST
विज्ञापन
Where was the child thief, which GRP left like this
- फोटो : Where was the child thief, which GRP left like this
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ट्रेन में मिली सात माह की बच्ची को अपना बताने वाले व्यक्ति के बारे में जीआरपी ने दूसरे दिन भी कोई सुराग नहीं लगाया। आशंका जताई जा रही है कि शायद वह बच्चा चोर था। इसीलिए मौके का फायदा उठाते हुए वह बच्ची को अपना बताते हुए ले जाना चाहता था।
बरेली बनारस एक्सप्रेस में रविवार को स्लीपर कोच में एक सात माह की बच्ची लावारिस हालत में मिली थी। कोच में मौजूद पुलिस आफिस का सिपाही अंकित इस बच्ची को जीआरपी थाने ले आया था। इसी दौरान पीछे से आए एक व्यक्ति ने अपने को बच्ची का पिता बताया। उसका कहना था कि उसका पत्नी से झगड़ा हो गया, इसीलिए वह बच्ची को छोड़कर चली गई। बच्ची उसकी है। वह उसके दादा और दादी को थाने लेकर आता है और बच्ची उसे दे दी जाए, इतना कहते ही यह व्यक्ति थाने से चला गया। जीआरपी वालों ने न ही उसका नाम पूछा और न पता। इसलिए मालूम ही नहीं हो पाया कि वह कहां का और कौन था। आशंका जताई जा रही है कि वह शायद बच्चा चोर था। जीआरपी ने उसे आसानी से जाने दिया इस पर भी बड़ा सवाल उठ रहा है। वैसे तो पुलिस मामूली व्यक्ति से भी उसका पूरा ब्यौरा पूछ लेती है, लेकिन एक लावारिस बच्ची को अपना बताने वाले का नाम तक न पूछना जीआरपी की उससे मिलीभगत होना बता रहा है।
विज्ञापन
बरेली बनारस एक्सप्रेस में रविवार को स्लीपर कोच में एक सात माह की बच्ची लावारिस हालत में मिली थी। कोच में मौजूद पुलिस आफिस का सिपाही अंकित इस बच्ची को जीआरपी थाने ले आया था। इसी दौरान पीछे से आए एक व्यक्ति ने अपने को बच्ची का पिता बताया। उसका कहना था कि उसका पत्नी से झगड़ा हो गया, इसीलिए वह बच्ची को छोड़कर चली गई। बच्ची उसकी है। वह उसके दादा और दादी को थाने लेकर आता है और बच्ची उसे दे दी जाए, इतना कहते ही यह व्यक्ति थाने से चला गया। जीआरपी वालों ने न ही उसका नाम पूछा और न पता। इसलिए मालूम ही नहीं हो पाया कि वह कहां का और कौन था। आशंका जताई जा रही है कि वह शायद बच्चा चोर था। जीआरपी ने उसे आसानी से जाने दिया इस पर भी बड़ा सवाल उठ रहा है। वैसे तो पुलिस मामूली व्यक्ति से भी उसका पूरा ब्यौरा पूछ लेती है, लेकिन एक लावारिस बच्ची को अपना बताने वाले का नाम तक न पूछना जीआरपी की उससे मिलीभगत होना बता रहा है।
विज्ञापन