बरेली बवाल: पल्लेदार थे पिता... इस धंधे में करोड़पति बना राना, सत्ता में कमजोर हुआ पत्ता तो ढह गया किला
बरेली के राजीव राना के पिता श्यामगंज मंडी में पल्लेदारी करते थे। राना शुरू से ही बड़े सपने देखता था। पढ़ाई और फिर छोटे-मोटे काम करने के बाद उसने हमउम्र युवाओं के साथ प्रॉपर्टी का धंधा शुरू किया। इस धंधे में उसका नाम चमका। फिर सत्ता में बैठे लोगों में पैठ बनाई। इसके बाद वह कुछ ही वर्षों में करोड़पति बन गया।
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बरेली के पीलीभीत बाइपास पर प्लॉट को लेकर हुई फायरिंग-तोड़फोड़ के मामले में मुख्य आरोपी प्रॉपर्टी डीलर राजीव राना के मकान और होटल पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हुई। इसके साथ ही उसका रसूख ध्वस्त हो गया। मामूली परिवार से जुड़े राजीव राना ने सत्ता में बैठे करीबियों के दम और पुलिस-प्रशासन में रसूख के चलते फर्श से अर्श तक का सफर तय किया। राना ने प्रॉपर्टी के धंधे में बड़ा नाम कमाया और एक साम्राज्य खड़ा किया जो सत्ता में उसकी पकड़ कमजोर होते ही ताश के पत्तों की तरह बिखर गया।
प्रॉपर्टी के धंधे से जुड़े लोग बताते हैं कि राना के पिता श्यामगंज मंडी में पल्लेदारी करते थे। राजीव राना शुरू से ही बड़े सपने देखने का आदी रहा। पढ़ाई और फिर छोटे-मोटे काम करने के बाद उसने हमउम्र युवाओं के साथ प्रॉपर्टी का धंधा शुरू किया। इन्हीं में से कुछ दोस्त ठेकेदार और फिर राजनीति में चमक गए तो राना का कारोबार दिन दूनी रात चौगुनी रफ्तार से बढ़ने लगा।
उसने संबंधित विभागों के अफसरों को भी अपने रसूख और रुपये के दम पर सेट किया और जमीन के धंधे में एकछत्र राज कायम कर लिया। अब कुछ समय से सत्ता में उसका पत्ता कमजोर चल रहा था। यही वजह रही जो इस मामले में वह कब्जा नहीं ले पा रहा था। 22 जून को उसने अपने गुर्गों के दम पर पीलीभीत बाइपास के किनारे प्लॉट पर कब्जा करने का प्रयास किया। गुर्गों ने सड़क पर अंधाधुंध फायरिंग की थी। यह गैरकानूनी तरीका उसी पर उल्टा पड़ गया।
एनकाउंटर के डर से वीडियो बनाते पहुंचा
गुरुवार को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान राजीव राना मीडिया की मौजूदगी में वीडियो बनाते हुए मौके पर पहुंचा। इससे लगा कि उसे एनकाउंटर का डर था, जिसका खतरा इस कवायद से खत्म हो गया। वहीं, होटल की तोड़फोड़ का नंबर आने पर उसने कागजात दिखाकर यह जताने की कोशिश की कि सब कुछ वैध है। उसने सोचा कि उसके हिरासत में आने से तोड़फोड़ रुक जाएगी पर ऐसा नहीं हो सका। शाम ढले तक बुलडोजर गरजा और इमारतों को तहस-नहस करके ही हटा।
- राना के पास कोर्ट के कागजात थे तो कब्जा लेने उसका भाई क्यों गया?
- यदि राना मौके पर गया था तो अब झूठ बोलने की क्या वजह है?
- राना जब मौके पर नहीं था तो भागकर जान कैसे बचाई?
- राना की कार मौके से बरामद कैसे हो गई?
- रोहित यदि राहगीर था तो संजय राना के साथ फोटो कैसे वायरल हो रहे हैं?
- जब वह मौके पर नहीं था तो पहली बार जारी वीडियो में यह क्यों नहीं बताया?
राना और परिवार के लोगों की बातें विरोधाभासी
राना व उसके परिवार के लोगों की बातें मेल नही खा रही हैं। गोलीकांड के अगले दिन राना ने वीडियो जारी कर खुद को बेकसूर बताया था। राजीव ने बताया था कि वह इंस्पेक्टर के पास गया तो उन्होंने कहा था कि आपके पास कागज हैं तो आप काम करिये। कोई परेशानी आती है तो हमें बताइएगा। राजीव ने कहा कि हम प्लॉट पर शांतिपूर्ण तरीके से काम कर रहे थे, तभी विपक्षी लोगों ने आकर फायरिंग कर दी। हम लोगों ने भागकर जान बचाई।
राजीव ने बताया था कि तमंचे से रोहित नाम का राहगीर फायर कर रहा था, जिसे हमसे जोड़ा जा रहा है। वहीं, राजीव के परिवार ने बृहस्पतिवार को मीडिया के सामने बताया कि राजीव मौके पर नहीं थे। उनकी लोकेशन और आसपास की फुटेज से इसकी तस्दीक की जा सकती है। राजीव की पत्नी के मुताबिक उनका छोटा देवर संजय प्लॉट पर गया था। राजीव और उसकी पत्नी के बयान के बाद कई अहम सवाल भी खड़े हो रहे हैं।