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कोरोना ने शिक्षामित्र की जान ली तो अस्पताल की संवेदनहीनता ने परिवार को तोड़ दिया

Tue, 01 Jun 2021 12:41 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 01 Jun 2021 12:41 AM IST
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When Corona killed Shikshamitra, the hospital's insensitivity broke the family
corona death - फोटो : demo photo

जब तक पूरे पैसे नहीं ले लिए अस्पताल ने नहीं दिया शिक्षामित्र का शव
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तीन बेटियों की जिम्मेदारी अब पत्नी पर, बोलीं- सरकार कुछ मदद करे

बरेली। क्यारा ब्लॉक प्राथामिक विद्यालय मंझा में तैनात शिक्षामित्र अनिल कुमार की कहानी बेहद दर्दनाक है। पंचायत चुनाव की ट्रेनिंग के बाद बिस्तर पर ऐसे पड़े कि फिर कभी नहीं उठ पाए। इलाज करने वाले अस्पताल में भी सारी संवेदनाएं ताक पर रखकर घरवालों से कह दिया कि जब तक पूरा पैसा जमा नहीं करोगो, शव नहीं देंगे। शिक्षामित्र की पत्नी पूजा ने किसी तरह रुपयों का इंतजाम किया तब जाकर पति का शव मिला। तीन-तीन बेटियों की जिम्मेदारी आ जाने से पूजा बिल्कुल टूट चुकी हैं। उनकी मांग है कि ऐसे मुश्किल वक्त में सरकार उन्हें सहारा दे।
बुखारा गांव के रहने वाले शिक्षामित्र अनिल की त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ड्यूटी लगी थी। चुनाव से पहले ट्रेनिंग में ही अनिल संक्रमित हो गए। ट्रेनिंग से घर लौटे तो तबीयत खराब थी। बुखार, तेज खांसी से वह परेशान हो गए। डॉक्टर की सलाह पर कुछ दिनों तक घर पर ही इलाज चला लेकिन बीस अप्रैल को उनकी तबीयत बहुत बिगड़ गई। पत्नी पूजा ने बताया कि 20 अप्रैल को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। यहां जांच में वह कोरोना से संक्रमित पाए गए। 24 अप्रैल को इलाज के दौरान ही उन्होंने दम तोड़ दिया। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी तो इलाज का पूरा पैसा भी नहीं दे सके। पैसा जमा नहीं किया तो अस्पताल ने शव देने से मना कर दिया।
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पूजा ने बताया कि इधर-उधर से किसी तरह पैसों का प्रबंध कर अस्पताल में जमा किया तो उन्हें शव मिला। पूजा बताती हैं कि तीन बेटियों हिमांशी, नैंसी और प्रियांशी की जिम्मेदारी अब उनके ऊपर आ गई है। वह सदमे में हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वह परिवार कैसे चला पाएंगी। सरकार से या विभाग से कहीं से कोई मदद नहीं मिल पा रही है। बेटियों की पढ़ाई पूरी कराना जीवन की सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि उनके परिवार की आर्थिक मदद की जाए। उनके परिवार में किसी एक सदस्य को शैक्षिक योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी दी जाए। जिससे परिवार के पालन पोषण हो सके।
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