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Bareilly News: सीडीआर से खुला कमीशनखोरी का खेल तो कसा शिकंजा

Sat, 26 Jul 2025 02:17 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 26 Jul 2025 02:17 AM IST
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When CDR exposed the game of commission, then the noose was tightened
बरेली। विशेषज्ञ चिकित्सक और जरूरी संसाधन नहीं होने के बावजूद उत्तराखंड के हृदय रोगी को भर्ती कर जान लेने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद राधिका अस्पताल प्रबंधन पर शिकंजा कस गया है। दरअसल, पीड़ित की शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पहले ही जांच कर अस्पताल प्रबंधन पर प्रारंभिक तौर पर दोष तय कर दिया था। अब पुलिस की जांच में सीडीआर (कॉल डिटेल रिपोर्ट) ने एंबुलेंस चालक व अस्पताल स्टाफ की मिलीभगत की पोल खोल दी है। कमीशनखोरी के साक्ष्य भी मिले हैं। विवेचना के बाद आरोपियों पर चार्जशीट लगनी तय है।
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बरेली में निजी अस्पतालों, लैबों और एंबुलेंस चालकों के बीच कमीशनखोरी का खेल बरसों पुराना है। ऐसे ही मामले में रुद्रपुर निवासी उमेश कुमार ने इज्जतनगर थाने में राधिका अस्पताल के डॉक्टर व स्टाफ पर रिपोर्ट कराई है। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मामले की गहन जांच की।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने एसीएमओ डॉ. राकेश को जांच सौंपी। डॉ. राकेश ने स्थलीय जांच से लेकर अस्पताल संचालक डॉ. प्रतीक गंगवार व स्टाफ के बयान दर्ज किए। इसमें पुष्टि हुई कि अस्पताल में कोई हृदय रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं था। अब पुलिस अपनी विवेचना में आरोपी डॉ. विवेक व एंबुलेंस चालक के बयान दर्ज कर नक्शा नजरी बनाएगी। चूंकि मामला पुराना है, इसलिए इसे आईपीसी की धाराओं में ही दर्ज किया गया है।
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यह है मामला
उमेश ने वर्ष 2023 में पिता भोला प्रसाद की मौत का जिम्मेदार राधिका अस्पताल के डॉ. विवेक, अन्य स्टाफ व एंबुलेंस चालक फूल सिंह को ठहराया है। आरोप है कि हार्ट अटैक पड़ने पर वह पिता को रामपुर के अस्पताल लाए थे। वहां से पिता को भोजीपुरा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, लेकिन फूल सिंह ने कमीशन के लालच में उनके पिता को मिनी बाइपास स्थित राधिका अस्पताल में भर्ती करा दिया। वहां इलाज के अभाव में उनकी मौत हो गई।
विवेक गुप्ता किस रोग का करता है इलाज, होगी जांच
वर्ष 2023 में जब फूल सिंह भोला प्रसाद को राधिका अस्पताल लेकर पहुंचा तो वहां डॉ. विवेक गुप्ता मिला था। ह्रदय रोग विशेषज्ञ नहीं होने के बावजूद उसने इस मामूली समस्या बताकर लापरवाही से इलाज शुरू कर दिया। यदि वह उसी वक्त मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह देता तो भोला प्रसाद की जान बच सकती थी। अब पुलिस विवेक की डिग्री की जांच कर सकती है। उसके पास कौन सी योग्यता है, इसको जांच में शामिल किया जाएगा। विवेक और फूल सिंह में कितनी बार बात हुई, इसकी जांच भी की जा रही है।
हाईवे पर मंडराती हैं एंबुलेंस, मरीज को लेकर होती है खींचतान
एंबुलेंस चालक मरीजों की जान बचाने से ज्यादा उनकी सांसों की सौदेबाजी पर जोर दे रहे हैं। एंबुलेंस में जैसे ही मरीज लेटता है, चालक तुरंत इधर-उधर फोन घुमाने लगते हैं। जिस अस्पताल से मोटे कमीशन का ऑफर मिलता है, एंबुलेंस वहीं रुकती है। भले ही मरीज के इलाज की वहां कोई व्यवस्था हो या न हो। कई बार दुर्घटना के दौरान मरीज के तीमारदार मौके पर नही होते। ऐसे में एंबुलेंस चालक अपने मनपसंद अस्पताल में ले जाकर मरीज को भर्ती करा देते हैं। फिर शुरू होता है वसूली का खेल। कई बार एंबुलेंस चालक तीमारदारों को भभी झांसे में ले लेते हैं। मरीज को बेहतर इलाज मिले, इसका प्रयास गिने-चुने एंबुलेंस चालक ही करते हैं। ब्यूरो

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पुलिस इस मामले में काफी साक्ष्य जुटा चुकी है। कुछ चीजें विवेचना में साफ होनी हैं। अस्पताल संचालक से लेकर हर जिम्मेदार शख्स के बयान दर्ज होंगे। - मानुष पारीक, एसपी सिटी
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