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अच्छा तो भाजपा नेता के फार्महाउस से हुआ गेहूं गायब, इसलिए बचा रहे साहब
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लखीमपुर खीरी। एक हजार क्विंटल गेहूं के घोटाले के मामले में एक नया खुलासा हुआ है। खानपुर ग्रंट नाम से खुला क्रय केंद्र गांव में भाजपा नेता और पूर्व राज्यसभा सदस्य जुगुल किशोर के कहने पर उनके फार्म हाउस पर खोला गया था। इसी क्रय केंद्र का गेहूं गायब हुआ, इसी वजह से पूरा मामला दबाने की कोशिश की जा रही है। कोशिश भी ऐसी वैसी नहीं, गायब गेहूं की जगह कोटेदारों के जरिये इसका इंतजाम किया गया है।
सरकारी गेहूं खरीद पर इस बार भी सत्तारूढ़ दल के नेता और उनके करीबी ठेकेदार हावी रहे। उसी का नतीजा खानपुर ग्रंट का यह मामला है। मितौली तहसील क्षेत्र के खानपुर ग्रंट नाम से क्रय केंद्र राज्यसभा सदस्य जुगुल किशोर के कहने पर उनके फार्म हाउस पर ही खोला गया था। अमूमन सभी क्रय केंद्र एक अप्रैल से खुले थे, जबकि खानपुर ग्रंट में दो मई 2019 को केंद्र खोला गया था। खास बात यह है कि इस केंद्र पर बतौर प्रभारी आदिश शर्मा लिखा-पढ़ी में प्रभारी रहे, लेकिन असल में केंद्र का संचालन तो नेताजी के करीबियों के हाथ में था। नेताजी के कहने पर ही केंद्र संचालन की जिम्मेदारी उनके परिवार के एक सदस्य को बतौर हैंडलिंग ठेकेदार दे दी गई। केंद्र प्रभारी आदिश शर्मा के पास एसएफसी के मितौली ब्लॉक गोदाम से कोटेदारों को राशन वितरण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, जिससे वह भी क्रय केंद्र पर कभी-कभार ही जा सके। चूंकि भाजपा नेता ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर क्रय केंद्र को अपने फार्म हाउस पर खोलवाया था और उन्हीं के परिवार के एक सदस्य को केंद्र संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी, जिससे केंद्र प्रभारी भी निश्चिंत रहे। जब एक हजार क्विंटल से अधिक गेहूं गायब होने का मामला सामने आया, तो केंद्र प्रभारी के होश ही उड़ गए। अब भाजपा नेता तो किनारे हो गए, लेकिन केंद्र प्रभारी को अपनी गर्दन बचाने के लाले पड़ रहे हैं। वहीं अफसर भी पूरे मामले पर पर्दा डालने में लगे हैं, क्योंकि मामले में भाजपा नेता की भूमिका सवालों के घेरे में आ रही है। इस पर अधिकारी भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है, बल्कि जल्द ही गेहूं की डिलीवरी एफसीआई में कराने की बात कह रहे हैं।
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सरकारी गेहूं खरीद पर इस बार भी सत्तारूढ़ दल के नेता और उनके करीबी ठेकेदार हावी रहे। उसी का नतीजा खानपुर ग्रंट का यह मामला है। मितौली तहसील क्षेत्र के खानपुर ग्रंट नाम से क्रय केंद्र राज्यसभा सदस्य जुगुल किशोर के कहने पर उनके फार्म हाउस पर ही खोला गया था। अमूमन सभी क्रय केंद्र एक अप्रैल से खुले थे, जबकि खानपुर ग्रंट में दो मई 2019 को केंद्र खोला गया था। खास बात यह है कि इस केंद्र पर बतौर प्रभारी आदिश शर्मा लिखा-पढ़ी में प्रभारी रहे, लेकिन असल में केंद्र का संचालन तो नेताजी के करीबियों के हाथ में था। नेताजी के कहने पर ही केंद्र संचालन की जिम्मेदारी उनके परिवार के एक सदस्य को बतौर हैंडलिंग ठेकेदार दे दी गई। केंद्र प्रभारी आदिश शर्मा के पास एसएफसी के मितौली ब्लॉक गोदाम से कोटेदारों को राशन वितरण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, जिससे वह भी क्रय केंद्र पर कभी-कभार ही जा सके। चूंकि भाजपा नेता ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर क्रय केंद्र को अपने फार्म हाउस पर खोलवाया था और उन्हीं के परिवार के एक सदस्य को केंद्र संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी, जिससे केंद्र प्रभारी भी निश्चिंत रहे। जब एक हजार क्विंटल से अधिक गेहूं गायब होने का मामला सामने आया, तो केंद्र प्रभारी के होश ही उड़ गए। अब भाजपा नेता तो किनारे हो गए, लेकिन केंद्र प्रभारी को अपनी गर्दन बचाने के लाले पड़ रहे हैं। वहीं अफसर भी पूरे मामले पर पर्दा डालने में लगे हैं, क्योंकि मामले में भाजपा नेता की भूमिका सवालों के घेरे में आ रही है। इस पर अधिकारी भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है, बल्कि जल्द ही गेहूं की डिलीवरी एफसीआई में कराने की बात कह रहे हैं।
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