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जिंदा जल गए मासूम भाई-बहन
बरेली
Updated Fri, 25 Dec 2015 01:41 AM IST
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बरेली। बिजली के तारों से उठी चिंगारी ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। चिंगारी से पहले दीवार पर टंगे कैलेंडर में आग लगी और कैलेंडर बिस्तर पर गिरा तो रजाई में सो रहे मासूम भाई-बहन जिंदा जल गए। घरवालों को जब तक आग का आभास हुआ, तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था। इस दर्दनाक हादसे पर पूरा परिवार ही नहीं मोहल्ला रो रहा है।
सुभाष नगर की शांति विहार कालोनी के विकास नगर में रह रहे विक्रम सिंह सिक्योरिटी गार्ड हैं। रात में वह ड्यूटी पर गए तो बच्चों को क्रिसमस पर गिफ्ट दिलाने का वादा भी किया। उनकी पत्नी सत्या रघुवंशी, पांच साल की बेटी निहारिका सिंह और ढाई साल का बेटा शौर्य प्रताप सिंह जब सोए तो सब कुछ ठीक था। सुबह जागने के बाद सत्या घर की गैलरी में बर्तन धोने चली गईं। निहारिका और शौर्य रजाई ओढ़कर सो रहे थे। उनके सिरहाने ऊपर ही दीवार पर कैलेंडर टंगा था और उसके नीचे बिजली के बिना वायरिंग के तार झूल रहे थे। चिंगारी से दीवार पर टंगे कैलेंडर में आग लग गई। जलता कैलेंडर रजाई पर गिर गया, जिससे आग लग गई। रजाई के अंदर सो रही निहारिका की जिंदा जलकर मौत हो गई। वहीं आग की चपेट में आया शौर्य प्रताप बिस्तर से उठकर भागा, लेकिन कमरे में अंधेरा और धुआं होने के कारण उसे दरवाजा नजर नहीं आया तो वह अलमारी में छिप गया। आग इतनी विकराल हो गई कि वह अलमारी के अंदर ही जलकर मर गया।
घर से धुआं निकलते देख पड़ोसी जशपाल ने शोर मचाया तो आसपास के लोग भी एकत्र हो गए। बर्तन धो रही सत्या रघुवंशी भी भाग कर कमरे की तरफ पहुंचीं लेकिन यहां धुएं के कारण कोई अंदर जाने का साहस नहीं जुटा पाया। इसी बीच विक्रम भी घर आ गया। आसपास के लोगों के सहयोग से घरवालों ने कमरे में पानी डाला तो धुआं कम हुआ। हादसे की सूचना पर एसओ जेपी यादव भी पहुंच गए। पुलिस ने अंदर जले पड़े दोनों मासूमों के शव बाहर निकाले तो कोहराम मच गया।
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सुभाष नगर की शांति विहार कालोनी के विकास नगर में रह रहे विक्रम सिंह सिक्योरिटी गार्ड हैं। रात में वह ड्यूटी पर गए तो बच्चों को क्रिसमस पर गिफ्ट दिलाने का वादा भी किया। उनकी पत्नी सत्या रघुवंशी, पांच साल की बेटी निहारिका सिंह और ढाई साल का बेटा शौर्य प्रताप सिंह जब सोए तो सब कुछ ठीक था। सुबह जागने के बाद सत्या घर की गैलरी में बर्तन धोने चली गईं। निहारिका और शौर्य रजाई ओढ़कर सो रहे थे। उनके सिरहाने ऊपर ही दीवार पर कैलेंडर टंगा था और उसके नीचे बिजली के बिना वायरिंग के तार झूल रहे थे। चिंगारी से दीवार पर टंगे कैलेंडर में आग लग गई। जलता कैलेंडर रजाई पर गिर गया, जिससे आग लग गई। रजाई के अंदर सो रही निहारिका की जिंदा जलकर मौत हो गई। वहीं आग की चपेट में आया शौर्य प्रताप बिस्तर से उठकर भागा, लेकिन कमरे में अंधेरा और धुआं होने के कारण उसे दरवाजा नजर नहीं आया तो वह अलमारी में छिप गया। आग इतनी विकराल हो गई कि वह अलमारी के अंदर ही जलकर मर गया।
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घर से धुआं निकलते देख पड़ोसी जशपाल ने शोर मचाया तो आसपास के लोग भी एकत्र हो गए। बर्तन धो रही सत्या रघुवंशी भी भाग कर कमरे की तरफ पहुंचीं लेकिन यहां धुएं के कारण कोई अंदर जाने का साहस नहीं जुटा पाया। इसी बीच विक्रम भी घर आ गया। आसपास के लोगों के सहयोग से घरवालों ने कमरे में पानी डाला तो धुआं कम हुआ। हादसे की सूचना पर एसओ जेपी यादव भी पहुंच गए। पुलिस ने अंदर जले पड़े दोनों मासूमों के शव बाहर निकाले तो कोहराम मच गया।
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