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Bareilly News: रामगंगा नदी में जलस्तर घटा, कटान से किसान चिंतित
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बहेड़ी। गौला बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद उफनाती किच्छा नदी।
मीरगंज। क्षेत्र में रामगंगा नदी का जलस्तर घटते ही अब उपजाऊ भूमि का कटान का शुरू हो गया है। सिमरिया, मदनापुर और बड़ी सिमरिया गांव के कई किसानों की उपजाऊ जमीन नदी में समा रही है। काशीराम, राजाराम और मानसिंह जैसे किसानों के खेत का बड़ा हिस्सा कट चुका है। किसान अपनी जमीन में लगे पॉपुलर और लिप्टिस के पेड़ों को काटकर किसी तरह बचा रहे हैं। हालांकि विभाग की तरफ से कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। इससे ग्रामीणों में गुस्सा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी नदी का कटान धीमा है, लेकिन जैसे ही जलस्तर और घटेगा, कटान तेज हो जाएगा। इससे जमीन का नुकसान कई गुना बढ़ सकता है। सिमरिया गांव निवासी रामपाल ने कहा कि अगर समय रहते रोकथाम के उपाय नहीं किए गए तो सैकड़ों बीघा जमीन रामगंगा नदी में समा जाएगी। गांव के लोगों ने शिकायत की कि अब तक कटान प्रभावित क्षेत्रों का हाल जानने के लिए कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तुरंत कटान रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम करने और स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।
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गौला बैराज से पानी छोड़े जाने से किच्छा नदी उफनाई
बहेड़ी। उत्तराखंड के गौला बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद किच्छा नदी पूरे उफान पर है। वह खतरे के निशान को पार करते हुए तेज रफ्तार के साथ बह रही है। नदी के निकटवर्ती गांव में बुधवार की रात पानी आ गया था, लेकिन सुबह बारिश रुकने के बाद पानी निकल गया।
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झमाझम हो रही वर्षा के साथ ही उत्तराखंड के गौला बैराज से छोड़े गए पानी ने किच्छा नदी को उफान पर ला दिया है। आमतौर पर 40 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़े जाने पर बाढ़ की स्थिति बन जाती है, लेकिन पानी इससे कम छोड़ा गया है, जिसके कारण हालत अभी काबू में है।
नदी के किनारे के गांव रतनपुर नवडांडी, नारायण नगला, बाकौली समेत दर्जनों गांव में बुधवार रात पानी भर गया था, लेकिन दोपहर को बारिश रुकने के बाद नदी का जलस्तर कम हुआ। एसडीएम रत्निका श्रीवास्तव ने बताया कि बाढ़ चौकियां बना दी गई हैं। राजस्व कर्मी लगातार नजर बनाए हुए हैं। अभी किसी तरह के बाढ़ के हालात नहीं है। गौला बैराज से अगर अधिक पानी छोड़ा जाता है तो उसको लेकर पहले से तैयारी की जाएगी।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी नदी का कटान धीमा है, लेकिन जैसे ही जलस्तर और घटेगा, कटान तेज हो जाएगा। इससे जमीन का नुकसान कई गुना बढ़ सकता है। सिमरिया गांव निवासी रामपाल ने कहा कि अगर समय रहते रोकथाम के उपाय नहीं किए गए तो सैकड़ों बीघा जमीन रामगंगा नदी में समा जाएगी। गांव के लोगों ने शिकायत की कि अब तक कटान प्रभावित क्षेत्रों का हाल जानने के लिए कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तुरंत कटान रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम करने और स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।
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गौला बैराज से पानी छोड़े जाने से किच्छा नदी उफनाई
बहेड़ी। उत्तराखंड के गौला बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद किच्छा नदी पूरे उफान पर है। वह खतरे के निशान को पार करते हुए तेज रफ्तार के साथ बह रही है। नदी के निकटवर्ती गांव में बुधवार की रात पानी आ गया था, लेकिन सुबह बारिश रुकने के बाद पानी निकल गया।
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झमाझम हो रही वर्षा के साथ ही उत्तराखंड के गौला बैराज से छोड़े गए पानी ने किच्छा नदी को उफान पर ला दिया है। आमतौर पर 40 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़े जाने पर बाढ़ की स्थिति बन जाती है, लेकिन पानी इससे कम छोड़ा गया है, जिसके कारण हालत अभी काबू में है।
नदी के किनारे के गांव रतनपुर नवडांडी, नारायण नगला, बाकौली समेत दर्जनों गांव में बुधवार रात पानी भर गया था, लेकिन दोपहर को बारिश रुकने के बाद नदी का जलस्तर कम हुआ। एसडीएम रत्निका श्रीवास्तव ने बताया कि बाढ़ चौकियां बना दी गई हैं। राजस्व कर्मी लगातार नजर बनाए हुए हैं। अभी किसी तरह के बाढ़ के हालात नहीं है। गौला बैराज से अगर अधिक पानी छोड़ा जाता है तो उसको लेकर पहले से तैयारी की जाएगी।

बहेड़ी। गौला बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद उफनाती किच्छा नदी।

बहेड़ी। गौला बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद उफनाती किच्छा नदी।