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निर्माणाधीन इमारत की दीवारें ढहने से पांच बच्चे मलबे में दबे, दो की मौत
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बरेली। बिथरी के गांव रजऊ परसपुर में निराश्रित मानसिक रोगियों के लिए बनाए जा रहे शरणालय की दीवारें गिरने से दो बच्चों की उसके मलबे में दबकर मौत हो गई जबकि तीन बच्चे घायल हो गए। इनमें एक की हालत गंभीर है। बकरियां चराने गए पांचों बच्चे लौटते वक्त निर्माणाधीन इमारत की छाया में बैठ गए थे। इसी दौरान उसकी दीवारें ढह गईं।
रजऊ परसपुर में रहने वाले अवधेश ने बताया कि उनका 12 वर्षीय भाई वीरेश, उसका हमउम्र तहेरा भाई वरुण घर के पास रहने वाले नौ वर्षीय आशीष और मोहित और प्रियांशु के साथ रोज बकरी को चराने के लिए जाते थे। मंगलवार को भी पांचों बच्चे बकरी चराने गए थे। शाम करीब चार बजे वापस लौटते समय वे गांव की सीमा पर निराश्रित लोगों के लिए बन रहे शरणालय के निर्माणाधीन शौचालय की छाया में बैठ गए। यह शरणालय मनोसमर्पण मनोसामाजिक सेवा समिति बनवा रही है।
गांव के लोगों के मुताबिक निर्माणाधीन इमारत की छाया में बच्चों को बैठे कुछ ही पल गुजरे कि अचानक शौचालय की दीवारें ढह गईं। पांचों बच्चे मलबे में दब गए। लोगों ने बच्चों को मलबे से निकाला लेकिन तब तक वरुण और आशीष की मौत हो चुकी थी। वीरेश, मोहित और प्रियांशु भी गंभीर घायल हो गए जिनमें वीरेश की हालत नाजुक है। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना की सूचना पर एएसपी साद मियां खां ने मौके पर पहुंचकर इंस्पेक्टर बिथरी शितांशु शर्मा से घटना की जानकारी ली। पुलिस ने वरुण और आशीष के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे हैं।
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मौत खींचकर ले गई आशीष को
रजऊ परसपुर में हुए दर्दनाक हादसे में मारे गए आशीष को मौत खींचकर दूसरे बच्चों के साथ ले गई। मृतक वरुण के तहेरे भाई ने बताया कि आशीष रिश्ते में उनका भतीजा लगता था। वरुण अपने तीन साथियों के साथ रोज दो से तीन घंटे तक बकरी को चराने जाता था। आशीष कभी उनके साथ नहीं जाता था लेकिन मंगलवार को वह कब इन लोगों के साथ चला गया, इसका पता ही नहीं चला। पांचों बच्चों की गांव के ही सरकारी स्कूल में साथ पढ़ने की वजह से दोस्ती थी। उनके पिता मजदूरी करते हैं। मृतक वरुण का एक भाई और एक बहन है। आशीष के दो भाई और एक बहन है। दोनों परिवारों वरुण और आशीष ही सबसे छोटे थे।
सेफ्टी सीवेज के परीक्षण के लिए सुबह ही भरा था पानी
शरणालय का निर्माण करा रहे मनोसमर्पण मनोसामाजिक सेवा समिति के अध्यक्ष समाजसेेवी शैलेश ने बताया कि लगभग आठ दिन पहले शौचालय का सेफ्टी सीवेज बना था जो लगभग नौ फुट का है। उसके परीक्षण के लिए मंगलवार को ही मजदूरों ने उसमें पानी भरा था। पानी के दबाव से अचानक उसकी दीवार फट गई और बच्चे मलबे में दब गए। उन्होंने कहा कि पानी भरने की जानकारी उन्हें नहीं थी। वह कई दिनों से साइट पर नहीं आ सके थे।
देर से गांव पहुंची पुलिस, गांव वालों से कहा- भाड़े पर दिला दो मजदूर
पीड़ित परिवारों का कहना है कि बिथरी पुलिस हादसे की सूचना देने के बाद लगभग पौन घंटा बाद पहुंची। पहले दो सिपाही ही आए थे। इसके बाद इंस्पेक्टर और दरोगा पहुंचे। तब तक घायल मोहित और प्रियांशु को उनके परिवार वाले ले जा चुके थे। घटना की पूरी जानकारी लिए बगैर पुलिस ने आला अधिकारियों को दो बच्चों की मौत और एक बच्चा घायल होने की सूचना दी। मलबे में और बच्चों के दबे होने का शक था मगर पुलिस ने खुद मलबे में हाथ लगाने के बजाय गांव वालों को बुलाकर दो सौ रुपये पर मजदूर दिलाने को कहा। लोगों ने पुलिस को बताया कि मलबे में अब कोई बच्चा नहीं है।
सीबीआई से आवार्ड में मिली रकम से हो रहा था निर्माण
समाजसेवी शैलेश शर्मा ने बताया कि वह असहाय लोगों की मदद करते हैं। सड़कों पर भटकने वाले मानसिक रोगियों को भी अस्पताल में भर्ती कराते हैं। वह अपने पिता की दो बीघा जमीन पर लावारिस घूमने वाले मानसिक रोगियों के लिए शरणालय का निर्माण करा रहे हैं। यह इमारत सीबीआई की ओर से 2021 में दिल्ली में उन्हें सम्मानित कर दिए गए पांच लाख रुपये की धनराशि से बनवाई जा रही है। शैलेश को समाजसेवा के लिए कई बार सम्मानित किया जा चुका है।
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रजऊ परसपुर में रहने वाले अवधेश ने बताया कि उनका 12 वर्षीय भाई वीरेश, उसका हमउम्र तहेरा भाई वरुण घर के पास रहने वाले नौ वर्षीय आशीष और मोहित और प्रियांशु के साथ रोज बकरी को चराने के लिए जाते थे। मंगलवार को भी पांचों बच्चे बकरी चराने गए थे। शाम करीब चार बजे वापस लौटते समय वे गांव की सीमा पर निराश्रित लोगों के लिए बन रहे शरणालय के निर्माणाधीन शौचालय की छाया में बैठ गए। यह शरणालय मनोसमर्पण मनोसामाजिक सेवा समिति बनवा रही है।
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गांव के लोगों के मुताबिक निर्माणाधीन इमारत की छाया में बच्चों को बैठे कुछ ही पल गुजरे कि अचानक शौचालय की दीवारें ढह गईं। पांचों बच्चे मलबे में दब गए। लोगों ने बच्चों को मलबे से निकाला लेकिन तब तक वरुण और आशीष की मौत हो चुकी थी। वीरेश, मोहित और प्रियांशु भी गंभीर घायल हो गए जिनमें वीरेश की हालत नाजुक है। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना की सूचना पर एएसपी साद मियां खां ने मौके पर पहुंचकर इंस्पेक्टर बिथरी शितांशु शर्मा से घटना की जानकारी ली। पुलिस ने वरुण और आशीष के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे हैं।
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मौत खींचकर ले गई आशीष को
रजऊ परसपुर में हुए दर्दनाक हादसे में मारे गए आशीष को मौत खींचकर दूसरे बच्चों के साथ ले गई। मृतक वरुण के तहेरे भाई ने बताया कि आशीष रिश्ते में उनका भतीजा लगता था। वरुण अपने तीन साथियों के साथ रोज दो से तीन घंटे तक बकरी को चराने जाता था। आशीष कभी उनके साथ नहीं जाता था लेकिन मंगलवार को वह कब इन लोगों के साथ चला गया, इसका पता ही नहीं चला। पांचों बच्चों की गांव के ही सरकारी स्कूल में साथ पढ़ने की वजह से दोस्ती थी। उनके पिता मजदूरी करते हैं। मृतक वरुण का एक भाई और एक बहन है। आशीष के दो भाई और एक बहन है। दोनों परिवारों वरुण और आशीष ही सबसे छोटे थे।
सेफ्टी सीवेज के परीक्षण के लिए सुबह ही भरा था पानी
शरणालय का निर्माण करा रहे मनोसमर्पण मनोसामाजिक सेवा समिति के अध्यक्ष समाजसेेवी शैलेश ने बताया कि लगभग आठ दिन पहले शौचालय का सेफ्टी सीवेज बना था जो लगभग नौ फुट का है। उसके परीक्षण के लिए मंगलवार को ही मजदूरों ने उसमें पानी भरा था। पानी के दबाव से अचानक उसकी दीवार फट गई और बच्चे मलबे में दब गए। उन्होंने कहा कि पानी भरने की जानकारी उन्हें नहीं थी। वह कई दिनों से साइट पर नहीं आ सके थे।
देर से गांव पहुंची पुलिस, गांव वालों से कहा- भाड़े पर दिला दो मजदूर
पीड़ित परिवारों का कहना है कि बिथरी पुलिस हादसे की सूचना देने के बाद लगभग पौन घंटा बाद पहुंची। पहले दो सिपाही ही आए थे। इसके बाद इंस्पेक्टर और दरोगा पहुंचे। तब तक घायल मोहित और प्रियांशु को उनके परिवार वाले ले जा चुके थे। घटना की पूरी जानकारी लिए बगैर पुलिस ने आला अधिकारियों को दो बच्चों की मौत और एक बच्चा घायल होने की सूचना दी। मलबे में और बच्चों के दबे होने का शक था मगर पुलिस ने खुद मलबे में हाथ लगाने के बजाय गांव वालों को बुलाकर दो सौ रुपये पर मजदूर दिलाने को कहा। लोगों ने पुलिस को बताया कि मलबे में अब कोई बच्चा नहीं है।
सीबीआई से आवार्ड में मिली रकम से हो रहा था निर्माण
समाजसेवी शैलेश शर्मा ने बताया कि वह असहाय लोगों की मदद करते हैं। सड़कों पर भटकने वाले मानसिक रोगियों को भी अस्पताल में भर्ती कराते हैं। वह अपने पिता की दो बीघा जमीन पर लावारिस घूमने वाले मानसिक रोगियों के लिए शरणालय का निर्माण करा रहे हैं। यह इमारत सीबीआई की ओर से 2021 में दिल्ली में उन्हें सम्मानित कर दिए गए पांच लाख रुपये की धनराशि से बनवाई जा रही है। शैलेश को समाजसेवा के लिए कई बार सम्मानित किया जा चुका है।