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चल रहा है वैक्सीनेशन मगर धीरे-धीरे
सार
जनवरी में हुई थी शुरुआत मगर अब तक जिले की दो फीसदी आबादी भी नहीं हुई प्रतिरक्षित
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कोरोना टीका
- फोटो : demo photo
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विस्तार
शहर में 60 और गांवों में 40 फीसदी भी नहीं पूरा हो पा रहा है लक्ष्य
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18 से 44 साल की उम्र वालों के टीकाकरण की स्थिति कुछ बेहतर
बरेली। कोरोना के खिलाफ वैक्सीन को ही एकमात्र हथियार माना जा रहा है लेकिन वैक्सीनेशन की रफ्तार इतनी कम है कि यह सवाल खड़ा होने लगा है कि यह हथियार कितना कामयाब हो पाएगा। जिले में ऐसे लोगों की तादाद दो प्रतिशत से भी कम है जिन्हें वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी हैं। पहली डोज लगवाने वालों की संख्या भी अब तक आठ फीसदी को पार नहीं कर पाई है। गांवों में वैक्सीनेशन का लक्ष्य बमुश्किल 40 फीसदी ही पूरा हो पा रहा है। शहर में 45 पार वालों में वैक्सीनेशन की भी यही स्थिति है।
जिले में जनवरी से स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंट लाइन वर्करों से वैक्सीनेशन की शुरुआत की गई थी। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक 81 फीसदी स्वास्थ्यकर्मियों और 52 फीसदी फ्रंटलाइन वर्करों को टीका लग पाया। इसके बाद बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार लोगों का टीकाकरण किया गया लेकिन यह भी 66 फीसदी के पार नहीं पहुंच पाया। 45 पार वालों को टीका लगना शुरू हुआ तो वैक्सीनेशन की रफ्तार बढ़ी लेकिन कुछ ही समय बाद फिर सुस्त पड़ गई। अब इस श्रेणी में सिर्फ 40 फीसदी ही टीकाकरण हो पा रहा है। 18 से 44 तक की उम्र वालों में टीकाकरण की स्थिति कुछ बेहतर है जो अब तक 75 से 80 फीसदी के बीच स्थिर है। जिले में अब सरकारी और निजी कार्यालय, कॉलोनियों में फोकस वैक्सीनेशन भी शुरू हो गया है। फिर भी टीकाकरण का लक्ष्य 70 फीसदी प्राप्त करना भी मुश्किल पड़ रहा है।
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35 लाख लोग होने हैं प्रतिरक्षित, लगेगा डेढ़ साल
केंद्र सरकार की गाइड लाइन में 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को प्रतिरक्षित करने का लक्ष्य है। अनुमानित तौर पर वर्ष 2021 में जिले की आबादी 50 लाख से ऊपर पहुंच चुकी है लिहाजा अनुमान लगाया जा रहा है कि जिले में कम से कम 35 लाख लोगों को टीका लगाया जाना है। मौजूदा रफ्तार को देखते हुए इतनी बड़ी तादाद में लोगों को प्रतिरक्षित करना किसी चुनौती से कम नहीं माना जा रहा। उम्मीद जताई जा रही है कि इसी रफ्तार से टीकाकरण हुआ तो सभी लोगों को प्रतिरक्षित करने में कम से कम डेढ़ साल लग जाएगा।
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उम्मीद : फोकस वैक्सीनेशन से बढ़ेगी रफ्तार
अफसरों के मुताबिक शासन से फोकस वैक्सीनेशन और कार्यस्थलों समेत कॉलोनियों में टीकाकरण के कैंप लगाने के निर्देश मिले हैं। ऑनलाइन स्लॉट बुक करने की जद्दोजहद से बचने के लिए काफी तादाद में लोग कैंप में टीका लगवाने पहुंच रहे हैं। इससे वैक्सीन की बरबादी भी कम हो रही है। फिलहाल बरेली कॉलेज, संजय कम्युनिटी हॉल, बरेली क्लब में 45 पार वालों का फोकस वैक्सीनेशन हो रहा है। जगतपुर, महानगर आदि कॉलोनियों में भी कैंप लग रहे हैं।
अफसरों का जोर, वैक्सीन की बरबादी न हो
वैक्सीन की बरबादी की रोकथाम के लिए अफसरों ने आधार कार्ड से लोगों का सत्यापन, एक ही मोबाइल नंबर से दूसरी डोज का स्लॉट बुक कराने की बाध्यता, केंद्रों तक नहीं पहुंचने वाले लाभार्थियों को फोन कर बुलाने जैसे कई निर्णय लिए गए हैं। कहा जा रहा है कि इसके बाद वैक्सीन के बरबाद होने की आशंका कम हुई है। दावा यह भी किया जा रहा है कि हाल ही में जिले को सर्वाधिक वैक्सीन का उपयोग करने वाले प्रदेश के जिलों की सूची में पांचवें नंबर पर रखा गया है।
भ्रांतियों की वजह से गांवों में कम टीकाकरण
टीकाकरण के अब तक प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक गांवों में लक्ष्य के मुकाबले 40 फीसदी ही टीकाकरण हो पा रहा है। यह स्थिति तब है जब 45 पार वालों को टीका लगवाने के लिए स्लॉट बुक करने की जरूरत नहीं है। आधार कार्ड दिखाकर वे केंद्र पर टीका लगवा सकते हैं। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी गांवों में भ्रांतियां होने की वजह से टीकाकरण कम होने की आशंका जताते हैं।
आंकड़ों में टीकाकरण...
- - 404856 लोग जिले में लगवा चुके हैं पहली डोज
- - 84889 लोगों को लग चुकी है दूसरी डोज भी
- - 160656 लोगों को शहर में लगी है पहली डोज
- - 244644 गांव के लोगों को लगी है पहली डोज
- - 39590 लोग शहर में हो चुके हैं प्रतिरक्षित
- - 48204 लोग गांव में हो चुके हैं प्रतिरक्षित
- - 133 केंद्रों पर हो रहा वैक्सीनेशन
- - 52 केंद्र पर 45 पार, 61 केंद्र पर 18-44 वालों को लग रहा टीका
टीकाकरण की गति बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। गांवों में टीकाकरण की गति धीमी है। आशंका है कि लोगों के मन में टीके को लेकर भ्रांतियां हैं। एमओआईसी को लोगों को जागरूक करने के लिए कहा गया है। वैक्सीन की बरबादी पर अंकुश लगा है। - डॉ. आरएन सिंह, जिला प्रतिरक्षण अधिकरी
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18 से 44 साल की उम्र वालों के टीकाकरण की स्थिति कुछ बेहतर बरेली। कोरोना के खिलाफ वैक्सीन को ही एकमात्र हथियार माना जा रहा है लेकिन वैक्सीनेशन की रफ्तार इतनी कम है कि यह सवाल खड़ा होने लगा है कि यह हथियार कितना कामयाब हो पाएगा। जिले में ऐसे लोगों की तादाद दो प्रतिशत से भी कम है जिन्हें वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी हैं। पहली डोज लगवाने वालों की संख्या भी अब तक आठ फीसदी को पार नहीं कर पाई है। गांवों में वैक्सीनेशन का लक्ष्य बमुश्किल 40 फीसदी ही पूरा हो पा रहा है। शहर में 45 पार वालों में वैक्सीनेशन की भी यही स्थिति है।
जिले में जनवरी से स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंट लाइन वर्करों से वैक्सीनेशन की शुरुआत की गई थी। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक 81 फीसदी स्वास्थ्यकर्मियों और 52 फीसदी फ्रंटलाइन वर्करों को टीका लग पाया। इसके बाद बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार लोगों का टीकाकरण किया गया लेकिन यह भी 66 फीसदी के पार नहीं पहुंच पाया। 45 पार वालों को टीका लगना शुरू हुआ तो वैक्सीनेशन की रफ्तार बढ़ी लेकिन कुछ ही समय बाद फिर सुस्त पड़ गई। अब इस श्रेणी में सिर्फ 40 फीसदी ही टीकाकरण हो पा रहा है। 18 से 44 तक की उम्र वालों में टीकाकरण की स्थिति कुछ बेहतर है जो अब तक 75 से 80 फीसदी के बीच स्थिर है। जिले में अब सरकारी और निजी कार्यालय, कॉलोनियों में फोकस वैक्सीनेशन भी शुरू हो गया है। फिर भी टीकाकरण का लक्ष्य 70 फीसदी प्राप्त करना भी मुश्किल पड़ रहा है।
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35 लाख लोग होने हैं प्रतिरक्षित, लगेगा डेढ़ साल
केंद्र सरकार की गाइड लाइन में 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को प्रतिरक्षित करने का लक्ष्य है। अनुमानित तौर पर वर्ष 2021 में जिले की आबादी 50 लाख से ऊपर पहुंच चुकी है लिहाजा अनुमान लगाया जा रहा है कि जिले में कम से कम 35 लाख लोगों को टीका लगाया जाना है। मौजूदा रफ्तार को देखते हुए इतनी बड़ी तादाद में लोगों को प्रतिरक्षित करना किसी चुनौती से कम नहीं माना जा रहा। उम्मीद जताई जा रही है कि इसी रफ्तार से टीकाकरण हुआ तो सभी लोगों को प्रतिरक्षित करने में कम से कम डेढ़ साल लग जाएगा।
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उम्मीद : फोकस वैक्सीनेशन से बढ़ेगी रफ्तार
अफसरों के मुताबिक शासन से फोकस वैक्सीनेशन और कार्यस्थलों समेत कॉलोनियों में टीकाकरण के कैंप लगाने के निर्देश मिले हैं। ऑनलाइन स्लॉट बुक करने की जद्दोजहद से बचने के लिए काफी तादाद में लोग कैंप में टीका लगवाने पहुंच रहे हैं। इससे वैक्सीन की बरबादी भी कम हो रही है। फिलहाल बरेली कॉलेज, संजय कम्युनिटी हॉल, बरेली क्लब में 45 पार वालों का फोकस वैक्सीनेशन हो रहा है। जगतपुर, महानगर आदि कॉलोनियों में भी कैंप लग रहे हैं।अफसरों का जोर, वैक्सीन की बरबादी न हो
वैक्सीन की बरबादी की रोकथाम के लिए अफसरों ने आधार कार्ड से लोगों का सत्यापन, एक ही मोबाइल नंबर से दूसरी डोज का स्लॉट बुक कराने की बाध्यता, केंद्रों तक नहीं पहुंचने वाले लाभार्थियों को फोन कर बुलाने जैसे कई निर्णय लिए गए हैं। कहा जा रहा है कि इसके बाद वैक्सीन के बरबाद होने की आशंका कम हुई है। दावा यह भी किया जा रहा है कि हाल ही में जिले को सर्वाधिक वैक्सीन का उपयोग करने वाले प्रदेश के जिलों की सूची में पांचवें नंबर पर रखा गया है।भ्रांतियों की वजह से गांवों में कम टीकाकरण
टीकाकरण के अब तक प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक गांवों में लक्ष्य के मुकाबले 40 फीसदी ही टीकाकरण हो पा रहा है। यह स्थिति तब है जब 45 पार वालों को टीका लगवाने के लिए स्लॉट बुक करने की जरूरत नहीं है। आधार कार्ड दिखाकर वे केंद्र पर टीका लगवा सकते हैं। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी गांवों में भ्रांतियां होने की वजह से टीकाकरण कम होने की आशंका जताते हैं।आंकड़ों में टीकाकरण...
- - 404856 लोग जिले में लगवा चुके हैं पहली डोज
- - 84889 लोगों को लग चुकी है दूसरी डोज भी
- - 160656 लोगों को शहर में लगी है पहली डोज
- - 244644 गांव के लोगों को लगी है पहली डोज
- - 39590 लोग शहर में हो चुके हैं प्रतिरक्षित
- - 48204 लोग गांव में हो चुके हैं प्रतिरक्षित
- - 133 केंद्रों पर हो रहा वैक्सीनेशन
- - 52 केंद्र पर 45 पार, 61 केंद्र पर 18-44 वालों को लग रहा टीका
टीकाकरण की गति बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। गांवों में टीकाकरण की गति धीमी है। आशंका है कि लोगों के मन में टीके को लेकर भ्रांतियां हैं। एमओआईसी को लोगों को जागरूक करने के लिए कहा गया है। वैक्सीन की बरबादी पर अंकुश लगा है। - डॉ. आरएन सिंह, जिला प्रतिरक्षण अधिकरी