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बरेली में दरगाह आला हजरत का उर्स शुरू
बरेली
Updated Mon, 07 Dec 2015 01:29 AM IST
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बरेली। आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी के उर्स को लेकर बरेली नगरी रजा के रंग में रंग गई है। देश दुनिया के हर कोने से दिन रात जायरीन की आमद जारी रही। दरगाह पर हाजरी देने का सिलसिला भी चलता रहा। शहर के हर दिशा से चादरों के जुलूस भी दरगाह पर पहुंचते रहे। इसी बीच शाम को उर्स स्थल इस्लामियां इंटर कालेज मैदान पर परचम कुशाई की रस्म अदा की गई। परचम के लहराते ही उर्स-ए-रजवी के तीन रोजा कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत हो गई।
पूर्व में परचम-ए-रजा आजम नगर स्थित अल्ला बक्श के निवास से जुलूस के रूप में उठाया गया। जो सज्जादा नशीन मौलाना अहसन रजा खां कादरी के नेतृत्व में दरगाह शरीफ पहुंचा। यहां सलामी के बाद परचम का जुलूस दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां (सुब्हानी मियां) की कयादत में उर्स स्थल पहुंचा। इसमें अहसन मियां भी साथ थे। दरगाह पर पहले से पहुंचे ठिरिया निजावत खां और स्वालेह नगर के परचमी जुलूस भी मुख्य जुलूस में शामिल हुए।
उर्स स्थल पर सुब्हानी मियां ने तिलावते कलाम के बीच परचम कुशाई की रस्म अदा की। इसी के साथ इस्लामियां कालेज का मैदान आला हजरत के नारों से गूंज उठा। बाबे रजा का परचम अहमद उल्ला वारसी ने बांधा। इस मौके पर मुफ्ती सलीम नूरी ने परचम कुशाई के इतिहास पर रोशनी डाली। इस दौरान कारी अब्दुर्रहमान खान, सय्यद कफील, मुफ्ती मोहम्मद आकिल, मुफ्ती अनवर अली, नूरी मियां, सय्यद आसिफ मियां के अलावा तारिख सईद, शान सुब्हानी, मुफ्ती मोईन, हाजी अब्बास सहित भारी संख्या में जायरीन की भी मौजूदगी रही।
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दरगाह पर पेश की गईं सैकड़ों चादरें
दिन भर लगा रहा चादरों के जुलूस का तांता
बरेली। उर्स आला हजरत के मौके पर लोगों की अकीदत का दरिया उमड़ा हुआ है। कोई हाजरी देकर मन्नते मांगने पहुंच रहा है तो कोई अकीदत की चादरों का जूलूस लेकर हजारों के मजमे के साथ दरगाह पर नजराना पेश कर रहा है। यह सिलसिला लगातार जारी है।
यहां पहुंचे चादरों के जुलूस में सबसे बड़ा जुलूस ठिरिया निजावत खां का रहा। जो कैंट के रास्ते शहर होता हुआ दरगाह पर पहुंचा। 97 चादरों के इस जलूस में हजारों लोग शामिल रहे। जिन्होंने दरगाह पर चादरें पेश कीं। इसमें शामिल राहत ने बताया कि इस बार 97वें उर्स के मद्देनजर 97 चादरों को पेश किया गया।
इसी तरह तिलियापुर से 97 मीटर की एक चादर पेश की गई। जो जुलूस के रुप में दरगाह पर पहुंची। इसमें मुजफ्फर हुसैन खां, मोहम्मद शकील, दानिश, हाफिज शहरोज, फिरोज, सलमान खां आदि शामिल रहे। राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष कौसर खां वारसी ने दरगाह पर चादरपोशी की। उनके साथ हामिद खां, इरशद खां, कबीर उद्दीन, निशात खां वारसी आदि मौजूद रहे। इसके अलावा सैकड़ों लोग दरगाह पर चादरें पेश करने उमड़ते रहे।
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पूर्व में परचम-ए-रजा आजम नगर स्थित अल्ला बक्श के निवास से जुलूस के रूप में उठाया गया। जो सज्जादा नशीन मौलाना अहसन रजा खां कादरी के नेतृत्व में दरगाह शरीफ पहुंचा। यहां सलामी के बाद परचम का जुलूस दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां (सुब्हानी मियां) की कयादत में उर्स स्थल पहुंचा। इसमें अहसन मियां भी साथ थे। दरगाह पर पहले से पहुंचे ठिरिया निजावत खां और स्वालेह नगर के परचमी जुलूस भी मुख्य जुलूस में शामिल हुए।
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उर्स स्थल पर सुब्हानी मियां ने तिलावते कलाम के बीच परचम कुशाई की रस्म अदा की। इसी के साथ इस्लामियां कालेज का मैदान आला हजरत के नारों से गूंज उठा। बाबे रजा का परचम अहमद उल्ला वारसी ने बांधा। इस मौके पर मुफ्ती सलीम नूरी ने परचम कुशाई के इतिहास पर रोशनी डाली। इस दौरान कारी अब्दुर्रहमान खान, सय्यद कफील, मुफ्ती मोहम्मद आकिल, मुफ्ती अनवर अली, नूरी मियां, सय्यद आसिफ मियां के अलावा तारिख सईद, शान सुब्हानी, मुफ्ती मोईन, हाजी अब्बास सहित भारी संख्या में जायरीन की भी मौजूदगी रही।
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दरगाह पर पेश की गईं सैकड़ों चादरें
दिन भर लगा रहा चादरों के जुलूस का तांता
बरेली। उर्स आला हजरत के मौके पर लोगों की अकीदत का दरिया उमड़ा हुआ है। कोई हाजरी देकर मन्नते मांगने पहुंच रहा है तो कोई अकीदत की चादरों का जूलूस लेकर हजारों के मजमे के साथ दरगाह पर नजराना पेश कर रहा है। यह सिलसिला लगातार जारी है।
यहां पहुंचे चादरों के जुलूस में सबसे बड़ा जुलूस ठिरिया निजावत खां का रहा। जो कैंट के रास्ते शहर होता हुआ दरगाह पर पहुंचा। 97 चादरों के इस जलूस में हजारों लोग शामिल रहे। जिन्होंने दरगाह पर चादरें पेश कीं। इसमें शामिल राहत ने बताया कि इस बार 97वें उर्स के मद्देनजर 97 चादरों को पेश किया गया।
इसी तरह तिलियापुर से 97 मीटर की एक चादर पेश की गई। जो जुलूस के रुप में दरगाह पर पहुंची। इसमें मुजफ्फर हुसैन खां, मोहम्मद शकील, दानिश, हाफिज शहरोज, फिरोज, सलमान खां आदि शामिल रहे। राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष कौसर खां वारसी ने दरगाह पर चादरपोशी की। उनके साथ हामिद खां, इरशद खां, कबीर उद्दीन, निशात खां वारसी आदि मौजूद रहे। इसके अलावा सैकड़ों लोग दरगाह पर चादरें पेश करने उमड़ते रहे।