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यूपीडेकॉन : जलवायु परिवर्तन से घट रही भोजन की गुणवत्ता
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यूपीडेकॉन में मौजूद पदाधिकारी।
चिकित्सक बोले - हजारों साल तक संयमित रहा जीवन चक्र अब अनियमित
शरीर में दर्द का एहसास कराने वाली तंत्रिका को डायबिटीज कर देती है सुन्न
बरेली। आईएमए सभागार में चल रहे यूपीडेकॉन-2021 का रविवार को समापन दिवस पर चिकित्सकों ने जलवायु परिवर्तन, शारीरिक क्षमताओं और डायबिटीज का शरीर पर होने वाले दुष्प्रभाव की जानकारी दी गई। कहा कि जलवायु परिवर्तन से भोजन की गुणवत्ता कम हो गई है। कम पोषक आहार के साथ अनियमिति दिनचर्या लोगों को डायबिटीज का मरीज बना रही है।
पटना से आए डॉ. आनंद शंकर ने बताया कि पहले खाना पौष्टिकता से भरपूर होता था। कम भोजन में ही सभी पोषक तत्व मिलते थे। जिनके सेवन से व्यक्ति जब तक जीता था, स्वस्थ रहता था। पिछले सौ साल की आधुनिकता ने हजारों साल की जलवायु को परिवर्तित करने का कार्य किया है। जिसका दुष्प्रभाव भी शरीर पर हो रहा है। लिहाजा, जो मेहनत करने वाले हैं वह भी डायबिटीज की चपेट में आ जाते हैं। इसके कई कारण होते हैं, जिनका पता ही नहीं चल पाता। इसलिए नियमित बीपी, शुगर, हार्ट रेट व अन्य जांच करानी बेहद जरूरी है। डायबिटीज एक साइलेंट डिजीज है। जो अचानक किसी दिन हुई जांच के बाद ही पता चलती है।
लखनऊ के डॉ. केपी चंद्रा ने बताया कि डायबिटीज का मानव शरीर पर क्या प्रभाव होता है, इसके लिए बड़े स्तर पर शोध हो रहे हैं। करीब 30 साल पहले जब बीमारी के फैलाव का पता चला तब शोध शुरू हुए थे। प्रभाव का पता करने के लिए पीड़ित और स्वस्थ के दो ग्रुप बनाए। क्रमवार जांच की जाती रही। साल 2010 में हुए शोध में पता चला था कि बीमारी का समय से पता चले तो डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है।
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महिलाओं की लाइफ हो रही प्रभावित
कानपुर केसीएमसी की डॉ. मनीषा गुप्ता ने बताया कि महिलाओं में सेक्स के प्रति अरुचि की बड़ी वजह डायबिटीज भी है। उन्होंने बताया कि पुरुषों के जैसे ही महिलाओं में भी सेक्सुअल डिस्फंक्शन होता है मगर शर्म, संकोच की वजह से वह इसे कभी जाहिर नहीं करती हैं। उन्होंने खुद सौ महिलाओं पर शोध किया तो इसकी जानकारी हुई। डायबिटिक होने से हार्मोन प्रभावित होते हैं। इसकी वजह से गुप्तांग में दर्द, मासिक धर्म का बंद होना या अनियमित होने जैसी समस्याएं आती हैं। जिसकी वजह से पारिवारिक जीवन की गुणवत्ता घटती है। उन्होंने महिलाओं को खुलकर इस मुद्दे पर बात करने की जरूरत पर जोर दिया।
30 फीसदी डायबिटीज के मरीजों के गुर्दे बीमार
डॉ. अतुल माहेश्वरी ने शुगर के मरीजों में करीब 30 फीसदी की किडनी प्रभावित होने की आशंका जताई। इसके लिए शुगर नियंत्रित करने, आंखों की नियमित जांच कराने, अल्ट्रासोनोग्राफी कराने का सुझाव दिया। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विवेक कुमार ने शुगर के 60 फीसदी मरीज की मौत हार्ट अटैक की वजह से होती है। क्योंकि शुगर की चपेट में आने के बाद दर्द का एहसास कराने वाली तंत्रिका धीरे-धीरे सुन्न हो जाती है। जिसकी वजह से हार्ट में दर्द होने पर भी उन्हें इसका एहसास तब होता है जब यह बेहद तेज हो। इसलिए सावधान रहने की जरूरत है, ताकि परिवार पर अचानक मुसीबत न आए।
डायबिटिक पिरामिड से किया जागरूक
यूपीडेकॉन के आखिरी दिन डॉ. सौरभ गोयल की ओर से डायबिटिक पिरामिड बनाया गया था। इसके जरिए डायबिटीज के बारे में लोगों को जागरूक किया गया। साथ ही, डायबिटीज से संबंधित क्विज समेत अन्य खेल प्रदर्शित किए गए थे। साइंटिफिक चेयरमैन डॉ. सुदीप सरन ने स्वस्थ रहने के लिए धूम्रपान से दूरी, दस हजार कदम प्रतिदिन चलने, तनाव से बचने, नमक और चीनी का सेवन कम करने, पूरी नींद लेने, प्रदूषण से बचने का सुझाव दिया। आयोजन सचिव डॉ. राजीव गोयल ने आयोजन में सभी के सहयोग पर आभार जताया। आयोजन में डॉ. विमल भारद्वाज, मीडिया प्रभारी डॉ. अनूप आर्या का सहयोग रहा।
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शरीर में दर्द का एहसास कराने वाली तंत्रिका को डायबिटीज कर देती है सुन्न
बरेली। आईएमए सभागार में चल रहे यूपीडेकॉन-2021 का रविवार को समापन दिवस पर चिकित्सकों ने जलवायु परिवर्तन, शारीरिक क्षमताओं और डायबिटीज का शरीर पर होने वाले दुष्प्रभाव की जानकारी दी गई। कहा कि जलवायु परिवर्तन से भोजन की गुणवत्ता कम हो गई है। कम पोषक आहार के साथ अनियमिति दिनचर्या लोगों को डायबिटीज का मरीज बना रही है।
पटना से आए डॉ. आनंद शंकर ने बताया कि पहले खाना पौष्टिकता से भरपूर होता था। कम भोजन में ही सभी पोषक तत्व मिलते थे। जिनके सेवन से व्यक्ति जब तक जीता था, स्वस्थ रहता था। पिछले सौ साल की आधुनिकता ने हजारों साल की जलवायु को परिवर्तित करने का कार्य किया है। जिसका दुष्प्रभाव भी शरीर पर हो रहा है। लिहाजा, जो मेहनत करने वाले हैं वह भी डायबिटीज की चपेट में आ जाते हैं। इसके कई कारण होते हैं, जिनका पता ही नहीं चल पाता। इसलिए नियमित बीपी, शुगर, हार्ट रेट व अन्य जांच करानी बेहद जरूरी है। डायबिटीज एक साइलेंट डिजीज है। जो अचानक किसी दिन हुई जांच के बाद ही पता चलती है।
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लखनऊ के डॉ. केपी चंद्रा ने बताया कि डायबिटीज का मानव शरीर पर क्या प्रभाव होता है, इसके लिए बड़े स्तर पर शोध हो रहे हैं। करीब 30 साल पहले जब बीमारी के फैलाव का पता चला तब शोध शुरू हुए थे। प्रभाव का पता करने के लिए पीड़ित और स्वस्थ के दो ग्रुप बनाए। क्रमवार जांच की जाती रही। साल 2010 में हुए शोध में पता चला था कि बीमारी का समय से पता चले तो डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है।
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महिलाओं की लाइफ हो रही प्रभावित
कानपुर केसीएमसी की डॉ. मनीषा गुप्ता ने बताया कि महिलाओं में सेक्स के प्रति अरुचि की बड़ी वजह डायबिटीज भी है। उन्होंने बताया कि पुरुषों के जैसे ही महिलाओं में भी सेक्सुअल डिस्फंक्शन होता है मगर शर्म, संकोच की वजह से वह इसे कभी जाहिर नहीं करती हैं। उन्होंने खुद सौ महिलाओं पर शोध किया तो इसकी जानकारी हुई। डायबिटिक होने से हार्मोन प्रभावित होते हैं। इसकी वजह से गुप्तांग में दर्द, मासिक धर्म का बंद होना या अनियमित होने जैसी समस्याएं आती हैं। जिसकी वजह से पारिवारिक जीवन की गुणवत्ता घटती है। उन्होंने महिलाओं को खुलकर इस मुद्दे पर बात करने की जरूरत पर जोर दिया।
30 फीसदी डायबिटीज के मरीजों के गुर्दे बीमार
डॉ. अतुल माहेश्वरी ने शुगर के मरीजों में करीब 30 फीसदी की किडनी प्रभावित होने की आशंका जताई। इसके लिए शुगर नियंत्रित करने, आंखों की नियमित जांच कराने, अल्ट्रासोनोग्राफी कराने का सुझाव दिया। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विवेक कुमार ने शुगर के 60 फीसदी मरीज की मौत हार्ट अटैक की वजह से होती है। क्योंकि शुगर की चपेट में आने के बाद दर्द का एहसास कराने वाली तंत्रिका धीरे-धीरे सुन्न हो जाती है। जिसकी वजह से हार्ट में दर्द होने पर भी उन्हें इसका एहसास तब होता है जब यह बेहद तेज हो। इसलिए सावधान रहने की जरूरत है, ताकि परिवार पर अचानक मुसीबत न आए।
डायबिटिक पिरामिड से किया जागरूक
यूपीडेकॉन के आखिरी दिन डॉ. सौरभ गोयल की ओर से डायबिटिक पिरामिड बनाया गया था। इसके जरिए डायबिटीज के बारे में लोगों को जागरूक किया गया। साथ ही, डायबिटीज से संबंधित क्विज समेत अन्य खेल प्रदर्शित किए गए थे। साइंटिफिक चेयरमैन डॉ. सुदीप सरन ने स्वस्थ रहने के लिए धूम्रपान से दूरी, दस हजार कदम प्रतिदिन चलने, तनाव से बचने, नमक और चीनी का सेवन कम करने, पूरी नींद लेने, प्रदूषण से बचने का सुझाव दिया। आयोजन सचिव डॉ. राजीव गोयल ने आयोजन में सभी के सहयोग पर आभार जताया। आयोजन में डॉ. विमल भारद्वाज, मीडिया प्रभारी डॉ. अनूप आर्या का सहयोग रहा।