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बरेली में बेमौसम बारिश से फसलों को पहुंचा भारी नुकसान
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rain, winter bareilly
- फोटो : rain, winter bareilly
दलहन, तिलहन, गन्ना की खड़ी फसलें गिरीं, गलका रोग लगने की आशंका
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दस दिनों में दूसरी बार हुई तेज बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता
बरेली। सालों बाद अच्छी फसल की उम्मीद लगाए बैठे किसानों पर बारिश कहर बनकर बरस रही है। मौसम की बेरुखी ने किसानों के खिले चेहरे को पलभर में मुरझा दिया है। तेज हवा संग हुई बारिश से सरसों, चना, मसूर, गन्ना और खेसारी की फसल में आ रहीं बालियों और फूल को भारी क्षति पहुंची है। किसानों के मुताबिक, करीब दस साल पहले भी फाल्गुन में मौसम ने ऐसे ही करवट बदली थी। दस दिनों में दो बार भारी बारिश हुई थी। उस साल भी 70 फीसदी से ज्यादा दलहन की फसल बर्बाद हो गई थी।
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, फाल्गुन में बारिश का सीधा असर दलहनी फसलों पर पड़ता है। बारिश से फसल को अधिक मात्रा में नमी मिलने से फूल आने के बजाय फसल में वृद्धि होने लगती है। वहीं मसूर व खेसारी में नमी से ‘गलका’ रोग लग जाता है। ऐसे में उपज अच्छी होने के बाद भी उत्पादन प्रभावित हो जाता है। ज्यादा बारिश से दलहन की फसल में आए फूल झड़ने, फूलों का लगना बंद होने, नमी से फसल में रोग लगने की आशंका बढ़ गई है। उनके मुताबिक काफी मात्रा में गेहूं, गन्ना, सरसों की फसलें गिर गई हैं। अगर फसलें गिरने के बाद भी उपज देती हैं तो खेतों में चूहे उन्हें जरूर काट देंगे।
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गेहूं, दलहनी फसलों की अपेक्षा गन्ने को कम नुकसान होने की उम्मीद है। फिर भी बारिश के बाद फसलों में फफूंद रोग लग सकता है। बताया कि ऐसी स्थिति में किसान फसल पर ‘ट्राइकोडर्मा’ का छिड़काव कर फसलों को बचा सकते हैं।
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- डॉ. विकास वर्मा, प्रगतिशील किसान
दस दिनों में ही दो बार तेज हवा संग हुई बारिश से फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। गन्ने की फसल का सर्वे कराकर प्रभावित किसानों की फसल को प्राथमिकता पर गन्ना सप्लाई पर्ची दी जाए। ऐसे उन्हें नुकसान से बचाया जा सकता है।
- अनिल साहनी, प्रगतिशील किसान
राहत की उम्मीद बेकार अभी छाए रहेंगे बादल
बरेली। पिछले दिनों हुई बारिश के बाद गुनगुनी धूप का लुत्फ ले रहे शहरवासियों पर एक बार फिर मौसम के यूटर्न ने कंपकंपा दिया है। मंगलवार देर रात हुई झमाझम बारिश के बाद बुधवार को भी दिन भर हल्के घने बादल छाए रहे। मौसम विज्ञानियों ने पश्चिमी विक्षोभ से फिलहाल बादल छाए रहने और निम्न वायुदाब क्षेत्र बनने से कई इलाकों में हल्की बूंदाबांदी की आशंका जताई है।
आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के डायरेक्टर डॉ. जेपी गुप्ता के मुताबिक, मंगलवार को दोपहर बाद शहर में हवा की दिशा बदली। पूर्व उत्तर-पूर्व से हवा की दिशा पश्चिम-उत्तर-पश्चिम होने से बादल शहर पर मंडराना शुरू हो गए। शाम को हल्की सर्द हवा के असर से लोग कंपकंपाने लगे। ऐसे में देर रात करीब एक बजे गरज-चमक के साथ बारिश शुरू हो गई, जो जिले में कहीं-कहीं रह-रहकर सुबह तक जारी रही।
उनके मुताबिक, अगले चार दिनों तक हल्के घने बादल छाए रहेंगे और धूप नदारद होने से सर्द हवा चलने के आसार बन सकते हैं। मंगलवार रात हुई बारिश से तापमान में भी करीब एक डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज हुई। बुधवार को अधिकतम 23.1 डिग्री और न्यूनतम 11.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, बारिश पांच एमएम दर्ज हुई।
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दस दिनों में दूसरी बार हुई तेज बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता बरेली। सालों बाद अच्छी फसल की उम्मीद लगाए बैठे किसानों पर बारिश कहर बनकर बरस रही है। मौसम की बेरुखी ने किसानों के खिले चेहरे को पलभर में मुरझा दिया है। तेज हवा संग हुई बारिश से सरसों, चना, मसूर, गन्ना और खेसारी की फसल में आ रहीं बालियों और फूल को भारी क्षति पहुंची है। किसानों के मुताबिक, करीब दस साल पहले भी फाल्गुन में मौसम ने ऐसे ही करवट बदली थी। दस दिनों में दो बार भारी बारिश हुई थी। उस साल भी 70 फीसदी से ज्यादा दलहन की फसल बर्बाद हो गई थी।
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, फाल्गुन में बारिश का सीधा असर दलहनी फसलों पर पड़ता है। बारिश से फसल को अधिक मात्रा में नमी मिलने से फूल आने के बजाय फसल में वृद्धि होने लगती है। वहीं मसूर व खेसारी में नमी से ‘गलका’ रोग लग जाता है। ऐसे में उपज अच्छी होने के बाद भी उत्पादन प्रभावित हो जाता है। ज्यादा बारिश से दलहन की फसल में आए फूल झड़ने, फूलों का लगना बंद होने, नमी से फसल में रोग लगने की आशंका बढ़ गई है। उनके मुताबिक काफी मात्रा में गेहूं, गन्ना, सरसों की फसलें गिर गई हैं। अगर फसलें गिरने के बाद भी उपज देती हैं तो खेतों में चूहे उन्हें जरूर काट देंगे।
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गेहूं, दलहनी फसलों की अपेक्षा गन्ने को कम नुकसान होने की उम्मीद है। फिर भी बारिश के बाद फसलों में फफूंद रोग लग सकता है। बताया कि ऐसी स्थिति में किसान फसल पर ‘ट्राइकोडर्मा’ का छिड़काव कर फसलों को बचा सकते हैं।
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- डॉ. विकास वर्मा, प्रगतिशील किसान
दस दिनों में ही दो बार तेज हवा संग हुई बारिश से फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। गन्ने की फसल का सर्वे कराकर प्रभावित किसानों की फसल को प्राथमिकता पर गन्ना सप्लाई पर्ची दी जाए। ऐसे उन्हें नुकसान से बचाया जा सकता है।
- अनिल साहनी, प्रगतिशील किसान
राहत की उम्मीद बेकार अभी छाए रहेंगे बादल
बरेली। पिछले दिनों हुई बारिश के बाद गुनगुनी धूप का लुत्फ ले रहे शहरवासियों पर एक बार फिर मौसम के यूटर्न ने कंपकंपा दिया है। मंगलवार देर रात हुई झमाझम बारिश के बाद बुधवार को भी दिन भर हल्के घने बादल छाए रहे। मौसम विज्ञानियों ने पश्चिमी विक्षोभ से फिलहाल बादल छाए रहने और निम्न वायुदाब क्षेत्र बनने से कई इलाकों में हल्की बूंदाबांदी की आशंका जताई है।आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के डायरेक्टर डॉ. जेपी गुप्ता के मुताबिक, मंगलवार को दोपहर बाद शहर में हवा की दिशा बदली। पूर्व उत्तर-पूर्व से हवा की दिशा पश्चिम-उत्तर-पश्चिम होने से बादल शहर पर मंडराना शुरू हो गए। शाम को हल्की सर्द हवा के असर से लोग कंपकंपाने लगे। ऐसे में देर रात करीब एक बजे गरज-चमक के साथ बारिश शुरू हो गई, जो जिले में कहीं-कहीं रह-रहकर सुबह तक जारी रही।
उनके मुताबिक, अगले चार दिनों तक हल्के घने बादल छाए रहेंगे और धूप नदारद होने से सर्द हवा चलने के आसार बन सकते हैं। मंगलवार रात हुई बारिश से तापमान में भी करीब एक डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज हुई। बुधवार को अधिकतम 23.1 डिग्री और न्यूनतम 11.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, बारिश पांच एमएम दर्ज हुई।