विश्वविद्यालय की परीक्षाएं रद्द, पांच लाख परीक्षार्थियों को मिलेगा फायदा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रुहेलखंड विवि से सम्बद्ध विद्यालयों में करीब पांच लाख परीक्षार्थी होंगे प्रमोट
विज्ञापन
परीक्षाएं रद्द कराने को लेकर छात्र और शिक्षक संघ कई दिनों से कर रहे थे मांग
बरेली। कोरोना संक्रमण के चलते शासन के फैसले पर रुहेलखंड विश्वविद्यालय की परीक्षाएं नहीं होंगी। सभी विद्यार्थियों को प्रोन्नत किया जाएगा। परीक्षाओं के आयोजन को लेकर गठित समिति ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट सौंपी दी है। रुहेलखंड विवि से सम्बद्ध कॉलेजों के पांच लाख छात्रों को फायदा मिलेगा।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति अनिल शुक्ल ने बताया कि परीक्षाएं रद्द होने से करीब पांच लाख परीक्षाथियों को प्रोन्नत किया जाएगा। किस आधार पर किस तरह प्रोन्नत होगा इसके लिए शासन से आदेश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। बताया कि उच्च शिक्षा विभाग ने कोरोना संकट के दौरान विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं के आयोजन के लिए मेरठ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति ने कोरोना के हालातों पर विचार करते हुए फैसला किया कि इस बार परीक्षाएं रद्द कर छात्रों को प्रमोट किया जाए। सरकार ने इसे मान भी लिया है। इससे शिक्षकों और परीक्षार्थियों ने राहत की सांस ली है।
विज्ञापन
छात्र और शिक्षक संगठन भी कर रहे थे मांग
परीक्षाएं रद्द करने को लेकर छात्र और शिक्षक संगठन कई दिनों से मांग कर रहे थे। छात्र नेता अनूप यादव और रूटा महामंत्री टीएस चौहान ने कहा कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए सरकार से यही मांग बराबर कर रहे थे। इसके लिए सरकार का आभार उन्होंने परेशानियों को समझते हुए फैसला किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
फैसले को सराहा:
- कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसे लेकर हम लगातार मांग कर रहे थे। परीक्षा होती तो शिक्षक और छात्र सभी मे कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ जाता। सरकार ने सही समय पर सही फैसला लिया। - टीएस चौहान, रूटा, महामंत्री
- हाल ही इसे लेकर कई ज्ञापन हम सभी ने दिए हैं। बस एक ही खतरा था लाखों परीक्षार्थी शामिल होंगे तो कोरोना का खतरा बढ़ेगा। सही फैसला है और इससे छात्रों को राहत मिलेगी। - अनूप यादव, छात्र नेता।
- परीक्षाओं को लेकर हम सभी असमंजस में थे। परेशान भी थे कब होंगी कैसे होंगी। इस फैसले से सभी को राहत मिलेगी। दूर दराज से आने वाले छात्र-छात्राओं को और भी ज्यादा दिक्कत होती। - सौरभ वर्मा, छात्र
- कोरोना के मामले शहर में भी लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में परीक्षाएं कराना किसी खतरे से कम नहीं था। एक भी केंद्र कोई संक्रमित अगर शामिल होता तो खतरा बहुत बढ़ जाता। राहत भरा फैसला रहा। - मंजीत सिंह, छात्र
- इस समय परीक्षाएं कराना सही नहीं था। सरकार कोरोना को देखते हुए सही फैसला लिया। परीक्षाएं अगर नहीं होंगी तो सत्र कैसे पूरा होगा, इस बाबत भी शासन को सही समय पर ठोस निर्णय लेना होगा।- नीरज कुमार, छात्र
- इस फैसले से सभी को राहत मिलेगी। शिक्षक और परीक्षार्थी सभी को राहत है। परीक्षाएं आयोजित होती तो शायद कोरोना के डर से ही कई छात्र छात्राएं तो परीक्षा छोड़ देते। राहत भरा फैसला रहा। - मधुनेश यादव, छात्र
परीक्षाएं रद्द कराने को लेकर छात्र और शिक्षक संघ कई दिनों से कर रहे थे मांग बरेली। कोरोना संक्रमण के चलते शासन के फैसले पर रुहेलखंड विश्वविद्यालय की परीक्षाएं नहीं होंगी। सभी विद्यार्थियों को प्रोन्नत किया जाएगा। परीक्षाओं के आयोजन को लेकर गठित समिति ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट सौंपी दी है। रुहेलखंड विवि से सम्बद्ध कॉलेजों के पांच लाख छात्रों को फायदा मिलेगा।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति अनिल शुक्ल ने बताया कि परीक्षाएं रद्द होने से करीब पांच लाख परीक्षाथियों को प्रोन्नत किया जाएगा। किस आधार पर किस तरह प्रोन्नत होगा इसके लिए शासन से आदेश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। बताया कि उच्च शिक्षा विभाग ने कोरोना संकट के दौरान विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं के आयोजन के लिए मेरठ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति ने कोरोना के हालातों पर विचार करते हुए फैसला किया कि इस बार परीक्षाएं रद्द कर छात्रों को प्रमोट किया जाए। सरकार ने इसे मान भी लिया है। इससे शिक्षकों और परीक्षार्थियों ने राहत की सांस ली है।
छात्र और शिक्षक संगठन भी कर रहे थे मांग
परीक्षाएं रद्द करने को लेकर छात्र और शिक्षक संगठन कई दिनों से मांग कर रहे थे। छात्र नेता अनूप यादव और रूटा महामंत्री टीएस चौहान ने कहा कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए सरकार से यही मांग बराबर कर रहे थे। इसके लिए सरकार का आभार उन्होंने परेशानियों को समझते हुए फैसला किया।फैसले को सराहा:
- कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसे लेकर हम लगातार मांग कर रहे थे। परीक्षा होती तो शिक्षक और छात्र सभी मे कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ जाता। सरकार ने सही समय पर सही फैसला लिया। - टीएस चौहान, रूटा, महामंत्री
- हाल ही इसे लेकर कई ज्ञापन हम सभी ने दिए हैं। बस एक ही खतरा था लाखों परीक्षार्थी शामिल होंगे तो कोरोना का खतरा बढ़ेगा। सही फैसला है और इससे छात्रों को राहत मिलेगी। - अनूप यादव, छात्र नेता।
- परीक्षाओं को लेकर हम सभी असमंजस में थे। परेशान भी थे कब होंगी कैसे होंगी। इस फैसले से सभी को राहत मिलेगी। दूर दराज से आने वाले छात्र-छात्राओं को और भी ज्यादा दिक्कत होती। - सौरभ वर्मा, छात्र
- कोरोना के मामले शहर में भी लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में परीक्षाएं कराना किसी खतरे से कम नहीं था। एक भी केंद्र कोई संक्रमित अगर शामिल होता तो खतरा बहुत बढ़ जाता। राहत भरा फैसला रहा। - मंजीत सिंह, छात्र
- इस समय परीक्षाएं कराना सही नहीं था। सरकार कोरोना को देखते हुए सही फैसला लिया। परीक्षाएं अगर नहीं होंगी तो सत्र कैसे पूरा होगा, इस बाबत भी शासन को सही समय पर ठोस निर्णय लेना होगा।- नीरज कुमार, छात्र
- इस फैसले से सभी को राहत मिलेगी। शिक्षक और परीक्षार्थी सभी को राहत है। परीक्षाएं आयोजित होती तो शायद कोरोना के डर से ही कई छात्र छात्राएं तो परीक्षा छोड़ देते। राहत भरा फैसला रहा। - मधुनेश यादव, छात्र