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Bareilly News: उलमा को बेटियों की चिंता... शिक्षा व सामाजिक सुरक्षा पर दिया जोर

Mon, 02 Sep 2024 06:29 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 02 Sep 2024 06:29 AM IST
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Ulama worried about daughters... Emphasis on education and social security
मुस्लिम समाज में बदलाव का संदेश दे गया आला हजरत का उर्स
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धार्मिक व मुस्लिम मामलों के लिए सरकार को बताई अपनी मंशा
बरेली। आयोजन धार्मिक था, लेकिन चर्चा मुस्लिम समाज के उत्थान व सोच में बदलाव की हुई। आला हजरत उर्स में देश भर से जुटे उलमा की चिंता का केंद्र बिंदु बेटियों की सामाजिक सुरक्षा रहा। समाज को शिक्षित बनाने पर जोर दिया गया। युवाओं को सही राह दिखाने की बात हुई। समाज की कमियों को गिनाते हुए हिदायतें दी गईं और शरीयत का हवाला देकर कुछ रिवायतों पर पाबंदी लगाने पर जोर दिया गया। कानून का पालन करने की अपील हुई।
इसके साथ ही शहर में आयोजित तीन दिवसीय उर्स विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर चर्चा के साथ मुस्लिम समाज में एक बड़े बदलाव का संदेश दे गया। इस दौरान मुस्लिम समाज को लेकर सरकार के विभिन्न फैसलों का विरोध किया गया तो कहीं सहमति नजर आई। कुछ मुद्दों पर सरकार से नाराजगी का भी एहसास कराया गया और हस्तक्षेप की मांग उठी। संवाद
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बेटियों की बात : शिक्षा के साथ बराबर हिस्सेदारी की हुई वकालत

आला हजरत दरगाह के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा कादरी, मुफ्ती सलीम नूरी व अन्य उलमा ने बेटियों को लेकर कई बड़े पैगाम दिए। सबसे जरूरी बेटियों की शिक्षा पर जोर दिया गया। लड़कियों के लिए स्कूल खोले जाने की सरकार से मांग भी उठाई गई। मुस्लिम लड़कियों के धर्म परिवर्तन करने और दूसरे मजहब में शादियां करने जैसे मुद्दों पर चिंता जताई गई। उलमा ने सलाह देते हुए कहा कि, मां-बाप को चाहिए कि लड़कियों की वक्त पर शादी करें और उनको दहेज देने के बजाय अपनी संपत्ति में हिस्सा दें।
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युवाओं की फिक्र : नशे से बचने और सोशल मीडिया में न उलझने की नसीहत
तकरीरों में युवाओं की फिक्र करते हुए मुफ्ती आकिल रजवी, मुफ्ती सलीम नूरी व अन्य ने युवाओं में बढ़ती बुराइयों को सुधारने की जरूरत बताई। युवाओं को सोशल मीडिया के गैर जरूरी इस्तेमाल से बचने की सलाह दी गई और कहा गया कि, सिर्फ काम की बातों के लिए इस्तेमाल करें। दूसरी बात शराब, जुआ और दूसरे नशों से दूर रहने की हुई। कहा गया कि, यह शरीयत के एतबार से भी जायज नहीं। यही नहीं धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए युवाओं को मस्जिदों को आबाद करने, नमाज कायम करने और दूसरों के लिए मददगार बनने की हिदायत दी गई।
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समाज को सलाह : दिखावे से बचें, फिजूलखर्च रोकें
उलमा ने मुस्लिम समाज के लोगों को शादियों के साथ-साथ तमाम दूसरे रस्म रिवाज पर फिजूल खर्च से बचने की हिदायत दी। शादी में बैंड-बाजा बजवाने, खड़े होकर खाना खिलाने, दिखावा करने, डीजे बजाने, नाच-गाना करने जैसी बातों को शरीयत के हवाले से पाबंदी लगाने की बात कही गई। कहा गया कि, ये बातें शरीयत में नाजायज हैं।
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सरकार को संदेश : पैगंबर की शान में गुस्ताखी बर्दाश्त नहीं, बुलडोजर कार्रवाई गलत

उर्स में सरकार से विभिन्न मुद्दों पर आपत्तियों के साथ ही अपनी मांगों को लेकर संदेश दिया गया। काजी-ए-हिंदुस्तान मुफ्ती असजद रजा खां व मुफ्ती सलीम नूरी ने देश में मुस्लिम समाज से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को उठाया। खासतौर से रसूले पाक पर टिप्पणी का मामला बहुत गर्म रहा। पैगंबर-ए-इस्लाम की शान में गुस्ताखी करने वालों के खिलाफ कड़ी सजा तय करने की मांग उठी। मुस्लिम समाज के साथ जुल्म ज्यादती पर हुकूमत का ध्यान खींचते हुए कुछ मामलों में उन्हें जिम्मेदार भी ठहराया गया। बुलडोजर कार्रवाई का भी सख्ती से विरोध किया गया।


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शांति का पैगाम : विरोध का तरीका कानून के दायरे में हो
उलमा ने मुस्लिम समाज को शांति व सब्र रखने का पैगाम भी दिया। समझाया कि, हमें किसी भी जुल्म ज्यादती का विरोध अमन और शांति से करना है। हमारे देश का कानून मजबूत है। हमें ऐसी लड़ाइयों को अनुशासन के साथ कानूनी दायरे में रहकर लड़ना चाहिए। किसी भी मुद्दे को लेकर हमें आक्रामक रुख अख्तियार नहीं करना है। मारहरा शरीफ के सज्जादानशीन सैय्यद नजीब हैदर समेत कई उलमा ने इस पर अपनी राय रखी।
महबूब आलम
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