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Bareilly News: लखनऊ से आईं दो टीमें, निर्माण सामग्री के लिए 25 नमूने
Wed, 06 May 2026 01:19 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Wed, 06 May 2026 01:19 AM IST
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आलमपुर जाफराबाद ब्लॉक के सरदारनगर गांव में सोमवार को पानी की टंकी गिरने के मामले में जांच शुरू हो गई है। लखनऊ से आठ वाहनों से दो टीमें मंगलवार को घटनास्थल पर पहुंचीं। निर्माण सामग्री के 25 नमूने लेकर टीमें लौट गईं। वहीं, निर्माणदायी संस्था एनसीसी लिमिटेड व थर्ड पार्टी जांच एजेंसी बीएलजी कंस्ट्रक्शंस के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई है। एनसीसी के जेई-एई को निलंबित कर कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने के लिए पत्र लिखा गया है। जल निगम ग्रामीण के संबंधित अवर अभियंता सोहेल अहमद को निलंबित कर दिया गया है। राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के सहायक अभियंता व जूनियर इंजीनियर की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई हैं।
लखनऊ से एक टेक्निकल ऑडिट टीम सोमवार देर रात तो दूसरी मंगलवार सुबह सात बजे घटनास्थल पर पहुंचीं। दोनों टीमों ने निर्माण संबंधी जानकारी जुटाई। कार्यदायी संस्था के इंजीनियर और ठेकेदार से पूछताछ की। ग्रामीणों के बयान भी दर्ज किए। टीम ने 18 बोरों में ईंट, सरिया, सीमेंट, रेत, चादर, कंक्रीट के सैंपल भरे। चादर की जांच कानपुर में जबकि अन्य नमूनों की गुणवत्ता की जांच लखनऊ स्थित पीडब्ल्यूडी की प्रयोगशाला में कराई जाएगी।
दोपहर बाद टीमें महानगर स्थित जल निगम ग्रामीण के कार्यालय पहुंचीं। वहां अभिलेखों का मिलान किया। जांच शाम सात बजे के बाद तक जारी रही। टीम में सीनियर टेक्नीशियन एडवाइजर विश्व दीपक, एसडव्लूएसएम स्वच्छता मिशन के शशांक मिश्रा, वीके लिटोरिया, जल निगम मुरादाबाद जोन के अभियंता आरबी राय शामिल रहे। टेक्निकल ऑडिट टीम को 24 घंटे में अपनी जांच रिपोर्ट शासन को देनी है।
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ग्रामीणों ने साक्ष्य मिटाने का लगाया आरोप
टीम के सामने ही ग्रामीणों ने कार्यदायी संस्था के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए। ग्रामीणों ने कहा कि हादसे के बाद से ही कर्मचारी घटनास्थल से साक्ष्य मिटाने में जुटे हैं। सुभाष शर्मा, राजेश, अजय चौहान, टिंकू पंडित, रामकुमार सिंह ने बताया कि हादसे की प्रमुख वजह ओवरहेड टैंक का निर्माण तालाब किनारे रेतीली जगह पर किया जाना भी है। निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग करने पर उस समय ग्रामीणों ने विरोध किया था। तीन दिन तक निर्माण कार्य बंद था। ग्रामीणों की शिकायत पर उस दौरान मौके पर आए अधिकारियों ने सैंपल लिए थे। इसकी जांच रिपोर्ट आज तक ग्रामीणों के सामने नहीं आई। निर्माण के दौरान अनियमितताओं का विरोध करने पर कंपनी के अधिकारियों व कर्मचारियों ने ग्रामीणों को धमकाया था और काम में बाधा डालने की रिपोर्ट दर्ज कराने की धमकी भी दी थी। ओवरहेड टैंक के निर्माण के दौरान बनाई गई सीढ़ी हिल रही थी। बाद में कार्यदायी संस्था ने उसकी मरम्मत कराई थी।
ओवरहेड टैंक के नीचे रोजाना लगता था जमावड़ा
ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में अगर ग्रामीणों की सुनवाई गंभीरता से की गई होती तो यह घटना नहीं होती। ओवरहेड टैंक के नीचे रोजाना 25-30 लोगों का जमावड़ा रहता है। निकट ही धार्मिक स्थल है। वहां सोमवार को श्रद्धालुओं की भीड़ होती है। शाम का समय होने के कारण आसपास कम लोग थे अन्यथा बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।
वर्जन
लखनऊ से जांच के लिए दो टीमें आई हैं। मौके से छह आइटम के कुल 25 नमूने लिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ स्पष्ट हो सकेगा। एनसीसी व थर्ड पार्टी बीएलजी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। जल निगम के जेई को निलंबित किया गया है। एनसीसी कंपनी के एई व जेई को भी निलंबित किया गया है। - कुमकुम गंगवार, अधिशासी अभियंता, जल निगम ग्रामीण
18 साल पहले बने टैंक से शुरू नहीं हो सकी जलापूर्ति
सरदारनगर गांव में 18 साल पहले सरकारी योजना के तहत ओवरहेड टैंक तो बना दिया गया, लेकिन जलापूर्ति आज तक शुरू नहीं हो सकी। योजना कागजों तक ही सिमटकर रह गई। यह ओवरहेड टैंक घटनास्थल से महज 300 मीटर दूर है। ग्रामीण रामकुमार सिंह व महिलाओं ने बताया कि गांव में कई साल पहले ओवरहेड टैंक का निर्माण कराया गया था। लोगों के घरों तक पाइप लाइन भी बिछाई गई थी। बोरिंग के बावजूद जलापूर्ति शुरू नहीं की गई। उस समय टेस्टिंग के दौरान केवल दो-तीन घंटे तक ही पानी की सप्लाई हुई थी। तब से आज तक इस टैंक से एक बूंद पानी की आपूर्ति नहीं की गई है। अब यह टैंक भी जर्जर हालत में खड़ा है और कभी भी गिर सकता है।
सांसद नीरज मौर्य ने घायलों को बेहतर इलाज का दिया भरोसा
आंवला सांसद नीरज मौर्य ने मंगलवार को सिद्धि विनायक अस्पताल पहुंचकर टैंक हादसे में घायल वीरपाल, रविंद्र, डोरीलाल, अर्जुन और वेदपाल से मुलाकात की। उनके परिजनों को ढांढस बंधाया। विश्वास दिलाया कि संकट की इस घड़ी में वह उनके साथ खड़े हैं। सांसद ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों से बात कर घायलों के उपचार की जानकारी ली। कहा कि इलाज में कोई कमी न रहे। सांसद ने कहा कि महज 18 माह पूर्व बनी टंकी का इस तरह ध्वस्त हो जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने पीड़ित परिवारों को आश्वस्त किया कि वह शासन-प्रशासन के माध्यम से उचित मुआवजा और न्याय दिलाएंगे। इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार एनसीसी लिमिटेड और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। सांसद के साथ नरेंद्र गौतम, पीयूष वर्मा, सत्यवीर चौहान, शिवकुमार शाक्य, शगुन तोमर समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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लखनऊ से एक टेक्निकल ऑडिट टीम सोमवार देर रात तो दूसरी मंगलवार सुबह सात बजे घटनास्थल पर पहुंचीं। दोनों टीमों ने निर्माण संबंधी जानकारी जुटाई। कार्यदायी संस्था के इंजीनियर और ठेकेदार से पूछताछ की। ग्रामीणों के बयान भी दर्ज किए। टीम ने 18 बोरों में ईंट, सरिया, सीमेंट, रेत, चादर, कंक्रीट के सैंपल भरे। चादर की जांच कानपुर में जबकि अन्य नमूनों की गुणवत्ता की जांच लखनऊ स्थित पीडब्ल्यूडी की प्रयोगशाला में कराई जाएगी।
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दोपहर बाद टीमें महानगर स्थित जल निगम ग्रामीण के कार्यालय पहुंचीं। वहां अभिलेखों का मिलान किया। जांच शाम सात बजे के बाद तक जारी रही। टीम में सीनियर टेक्नीशियन एडवाइजर विश्व दीपक, एसडव्लूएसएम स्वच्छता मिशन के शशांक मिश्रा, वीके लिटोरिया, जल निगम मुरादाबाद जोन के अभियंता आरबी राय शामिल रहे। टेक्निकल ऑडिट टीम को 24 घंटे में अपनी जांच रिपोर्ट शासन को देनी है।
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ग्रामीणों ने साक्ष्य मिटाने का लगाया आरोप
टीम के सामने ही ग्रामीणों ने कार्यदायी संस्था के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए। ग्रामीणों ने कहा कि हादसे के बाद से ही कर्मचारी घटनास्थल से साक्ष्य मिटाने में जुटे हैं। सुभाष शर्मा, राजेश, अजय चौहान, टिंकू पंडित, रामकुमार सिंह ने बताया कि हादसे की प्रमुख वजह ओवरहेड टैंक का निर्माण तालाब किनारे रेतीली जगह पर किया जाना भी है। निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग करने पर उस समय ग्रामीणों ने विरोध किया था। तीन दिन तक निर्माण कार्य बंद था। ग्रामीणों की शिकायत पर उस दौरान मौके पर आए अधिकारियों ने सैंपल लिए थे। इसकी जांच रिपोर्ट आज तक ग्रामीणों के सामने नहीं आई। निर्माण के दौरान अनियमितताओं का विरोध करने पर कंपनी के अधिकारियों व कर्मचारियों ने ग्रामीणों को धमकाया था और काम में बाधा डालने की रिपोर्ट दर्ज कराने की धमकी भी दी थी। ओवरहेड टैंक के निर्माण के दौरान बनाई गई सीढ़ी हिल रही थी। बाद में कार्यदायी संस्था ने उसकी मरम्मत कराई थी।
ओवरहेड टैंक के नीचे रोजाना लगता था जमावड़ा
ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में अगर ग्रामीणों की सुनवाई गंभीरता से की गई होती तो यह घटना नहीं होती। ओवरहेड टैंक के नीचे रोजाना 25-30 लोगों का जमावड़ा रहता है। निकट ही धार्मिक स्थल है। वहां सोमवार को श्रद्धालुओं की भीड़ होती है। शाम का समय होने के कारण आसपास कम लोग थे अन्यथा बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।
वर्जन
लखनऊ से जांच के लिए दो टीमें आई हैं। मौके से छह आइटम के कुल 25 नमूने लिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ स्पष्ट हो सकेगा। एनसीसी व थर्ड पार्टी बीएलजी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। जल निगम के जेई को निलंबित किया गया है। एनसीसी कंपनी के एई व जेई को भी निलंबित किया गया है। - कुमकुम गंगवार, अधिशासी अभियंता, जल निगम ग्रामीण
18 साल पहले बने टैंक से शुरू नहीं हो सकी जलापूर्ति
सरदारनगर गांव में 18 साल पहले सरकारी योजना के तहत ओवरहेड टैंक तो बना दिया गया, लेकिन जलापूर्ति आज तक शुरू नहीं हो सकी। योजना कागजों तक ही सिमटकर रह गई। यह ओवरहेड टैंक घटनास्थल से महज 300 मीटर दूर है। ग्रामीण रामकुमार सिंह व महिलाओं ने बताया कि गांव में कई साल पहले ओवरहेड टैंक का निर्माण कराया गया था। लोगों के घरों तक पाइप लाइन भी बिछाई गई थी। बोरिंग के बावजूद जलापूर्ति शुरू नहीं की गई। उस समय टेस्टिंग के दौरान केवल दो-तीन घंटे तक ही पानी की सप्लाई हुई थी। तब से आज तक इस टैंक से एक बूंद पानी की आपूर्ति नहीं की गई है। अब यह टैंक भी जर्जर हालत में खड़ा है और कभी भी गिर सकता है।
सांसद नीरज मौर्य ने घायलों को बेहतर इलाज का दिया भरोसा
आंवला सांसद नीरज मौर्य ने मंगलवार को सिद्धि विनायक अस्पताल पहुंचकर टैंक हादसे में घायल वीरपाल, रविंद्र, डोरीलाल, अर्जुन और वेदपाल से मुलाकात की। उनके परिजनों को ढांढस बंधाया। विश्वास दिलाया कि संकट की इस घड़ी में वह उनके साथ खड़े हैं। सांसद ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों से बात कर घायलों के उपचार की जानकारी ली। कहा कि इलाज में कोई कमी न रहे। सांसद ने कहा कि महज 18 माह पूर्व बनी टंकी का इस तरह ध्वस्त हो जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने पीड़ित परिवारों को आश्वस्त किया कि वह शासन-प्रशासन के माध्यम से उचित मुआवजा और न्याय दिलाएंगे। इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार एनसीसी लिमिटेड और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। सांसद के साथ नरेंद्र गौतम, पीयूष वर्मा, सत्यवीर चौहान, शिवकुमार शाक्य, शगुन तोमर समेत अन्य लोग मौजूद रहे।