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कागजी खानापूरी में ढाई घंटे फंसी रही बच्चे की जान
बरेली
Updated Wed, 20 Jan 2016 01:10 AM IST
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बरेली। कागजी खानापूरी के फेर में एक ढाई साल के मासूम की जान फंसी रही। वह बेड पर खून का इंतजार कर रहा था और परिजन जिला अस्पताल से आईएमए और आईएमए से जिला अस्पताल की दौड़ लगा रहे थे। हुआ दरअसल यह कि जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ ने खून चढ़ने की जरूरत बताई। आईएमए ब्लड बैंक से पिता को खून मिल गया, लेकिन उसे जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने चढ़ाया ही नहीं। यहां डॉक्टर का तर्क था कि ब्लड पैक पर खून जारी करने की तारीख नहीं लिखी है, जबकि आईएमए का कहना था कि इसमें खून जारी करने की तारीख नहीं बल्कि रक्त कलेक्शन की तिथि लिखी जाती है जो लिखी है। तारीख लिखवाने के चक्कर में बच्चे के पिता को चार बार चक्कर लगाने पड़े। शुक्र है कोई अनहोनी नहीं हुई।
अलीगंज के शेखर और उसकी पत्नी आशा ने ढाई साल के बेटे हर्षित को 13 जनवरी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। हर्षित को खून की काफी कमी थी। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में बच्चों का खून नहीं मिलता इसलिए हर्षित के पिता ने आईएमए ब्लड बैंक से जाकर खून लिया। शेखर ने 13 जनवरी को आईएमए में ब्लड डोनेट किया था, जिससे उसके बच्चे के तीन पैकेट ब्लड तैयार कर दिए गए, ताकि जब कभी भी उसे जरूरत हो उसके पिता को दे दिया जाए। एक यूनिट रक्त चढ़ाने के बाद दूसरा यूनिट रक्त आईएमए ने 19 तारीख को दिया। जिला अस्पताल में डॉ. एसके सागर ने मना कर दिया। उनके मुताबिक ब्लड पैकेट पर 19 तारीख ही दर्ज होनी चाहिए। जबकि उसमें पिता द्वारा रक्तदान करने की कलेक्शन तिथि दर्ज थी। शेखर फिर आईएमए गया और तिथि लिखवाने की कोशिश की। काफी कहने पर वहां से तारीख लिख दी गई लेकिन गलती से 17 की तारीख पड़ गई। जिला अस्पताल पहुंचने पर फिर शेखर को लौटाया गया कि तारीख तो 19 ही होनी चाहिए। वह फिर आईएमए पहुंचा और 19 तारीख लिखवाकर लाया तब ब्लड चढ़ाया गया। इस कागजी दौड़ में करीब ढाई घंटे का वक्त लगा। डाक्टर भी कह रहे थे कि शुक्र है कि आपरेशन का केस नहीं था वरना कुछ भी हो सकता था।
‘बच्चों को खून एक साथ नहीं चढ़ता, इसलिए आईएमए ने उसके तीन पार्ट करके अपने पास रख लिया। जब आईएमए रक्त जारी करे तो उसमें रक्त जारी करने की तिथि लिखे। ऐसे में तो कोई भी ब्लड को कहीं भी रख कर ला सकता है। खून रिएक्शन होने का भी डर है।’
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डॉ. एसके सागर, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
‘हम लोग ब्लड पैकेट पर जारी तिथि नहीं बल्कि कलेक्शन तिथि लिखते हैं। यह कलेक्शन करने के 34 दिन तक काम आ सकता है। बच्चों के पैकेट 10 दिन के अंदर काम आने चाहिए। लेकिन जिला अस्पताल को हर बार जारी तिथि चाहिए। पूरे शहर के बच्चों को बिना जारी तिथि के ही ब्लड दिया जाता है। नियम में जारी तिथि का कोई मतलब नहीं है। मैंने इसकी शिकायत सीएमओ से भी की है।’
डॉ. अंजू उप्पल, निदेशक, आईएमए ब्लड बैंक
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अलीगंज के शेखर और उसकी पत्नी आशा ने ढाई साल के बेटे हर्षित को 13 जनवरी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। हर्षित को खून की काफी कमी थी। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में बच्चों का खून नहीं मिलता इसलिए हर्षित के पिता ने आईएमए ब्लड बैंक से जाकर खून लिया। शेखर ने 13 जनवरी को आईएमए में ब्लड डोनेट किया था, जिससे उसके बच्चे के तीन पैकेट ब्लड तैयार कर दिए गए, ताकि जब कभी भी उसे जरूरत हो उसके पिता को दे दिया जाए। एक यूनिट रक्त चढ़ाने के बाद दूसरा यूनिट रक्त आईएमए ने 19 तारीख को दिया। जिला अस्पताल में डॉ. एसके सागर ने मना कर दिया। उनके मुताबिक ब्लड पैकेट पर 19 तारीख ही दर्ज होनी चाहिए। जबकि उसमें पिता द्वारा रक्तदान करने की कलेक्शन तिथि दर्ज थी। शेखर फिर आईएमए गया और तिथि लिखवाने की कोशिश की। काफी कहने पर वहां से तारीख लिख दी गई लेकिन गलती से 17 की तारीख पड़ गई। जिला अस्पताल पहुंचने पर फिर शेखर को लौटाया गया कि तारीख तो 19 ही होनी चाहिए। वह फिर आईएमए पहुंचा और 19 तारीख लिखवाकर लाया तब ब्लड चढ़ाया गया। इस कागजी दौड़ में करीब ढाई घंटे का वक्त लगा। डाक्टर भी कह रहे थे कि शुक्र है कि आपरेशन का केस नहीं था वरना कुछ भी हो सकता था।
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‘बच्चों को खून एक साथ नहीं चढ़ता, इसलिए आईएमए ने उसके तीन पार्ट करके अपने पास रख लिया। जब आईएमए रक्त जारी करे तो उसमें रक्त जारी करने की तिथि लिखे। ऐसे में तो कोई भी ब्लड को कहीं भी रख कर ला सकता है। खून रिएक्शन होने का भी डर है।’
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डॉ. एसके सागर, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
‘हम लोग ब्लड पैकेट पर जारी तिथि नहीं बल्कि कलेक्शन तिथि लिखते हैं। यह कलेक्शन करने के 34 दिन तक काम आ सकता है। बच्चों के पैकेट 10 दिन के अंदर काम आने चाहिए। लेकिन जिला अस्पताल को हर बार जारी तिथि चाहिए। पूरे शहर के बच्चों को बिना जारी तिथि के ही ब्लड दिया जाता है। नियम में जारी तिथि का कोई मतलब नहीं है। मैंने इसकी शिकायत सीएमओ से भी की है।’
डॉ. अंजू उप्पल, निदेशक, आईएमए ब्लड बैंक