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इस साल पौने दो करोड़ से ज्यादा घाटे में विवि
बरेली।
Updated Sun, 05 Mar 2017 01:12 AM IST
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Twenty-two million this year University over losses
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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छात्रों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं बनाने में नाकाम साबित हो रहे एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय का पिछले तीन सालों में आय का ग्राफ भी धड़ाम हो गया। इस बार पौने दो करोड़ से ज्यादा का घाटा विश्वविद्यालय के खाते में गया और यह घाटा अगले साल कई गुना बढ़ने जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में करीब चौदह करोड़ रुपये की हानि होने का अनुमान लगाया गया है। विश्वविद्यालय में पेश हुए सालाना बजट की कुछ यही तस्वीर है। न सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दिया गया और न ही व्यवस्थाएं बढ़ाने पर। विश्वविद्यालय प्रशासन पूरे साल बजट के बंदरबांट से लेकर अधिकारियों के लिए गाड़ियां खरीदने में जुटा रहा। कैंपस की बदहाली बजट में इस बार नजर नहीं आई।
वित्तीय अधिकारी पीएस चौधरी ने कुलपति प्रोफेसर मुशाहिद हुसैन की अध्यक्षता में हुई वित्तीय समिति की बैठक में पिछले, मौजूदा और अगले वित्तीय वर्ष का बजट पेश किया। वित्तीय वर्ष 2015-16 में विश्वविद्यालय को 68 लाख से ज्यादा की आय हुई। पर अगले वित्तीय वर्ष में यह लाभ हानि में बदल गया। आय की तुलना में एक करोड़ 85 लाख से ज्यादा रुपये का व्यय हुआ। अब वित्तीय वर्ष में यह व्यय आय के सापेक्ष करीब चौदह करोड़ बढ़ने जा रहा है। बैठक में व्यय पर की भरपाई पर मंथन जरूर हुआ पर कोई कारगर कदम उठाने की जहमत नहीं उठाई गई। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि सातवें वेतन आयोग लागू होने से करीब 55 करोड़ का अतिरिक्त भार विश्वविद्यालय पर पड़ा है। विश्वविद्यालय ने आय बढ़ाने के स्रोत पर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। फीस या अन्य किसी आय के स्रोत में बढ़ोत्तरी नहीं की। पिछले वित्त वर्ष की मदों को ज्यों का त्यों रख दिया गया।
कैंपस की बदहाली पर नहीं दिया ध्यान
विश्वविद्यालय के हॉस्टल बदहाल हैं। गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं ने शुक्रवार को ही तमाम खामियाें को लेकर शिकायत की थी। कैंपस की साफ सफाई पर हर महीने लाखों रुपये कागजों पर ही खर्च होते हैं। वाईफाई और अन्य योजनाओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
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गाड़ियां खरीदने के लिए तो बजट है
पिछले साल विवि में 24 लाख रुपये की दो इनोवा गाड़ियां, एक कुलपति और एक वित्त अधिकारी के लिए खरीदी गई, जबकि कुलपति के पास दो गाड़ियां पहले से ही थीं। अब भी इनोवा के साथ उनके पास होंडा सिटी है। वित्तीय अधिकारी ने भी महंगी गाड़ी खरीदी। बजट में गाड़ियां खरीदने की गुंजाइश है पर छात्रों के लिए एक वेटिंग हाल बनाने का गुंजाइश नहीं।
कर्मचारियों के पंद्रह प्रस्ताव नहीं किए शामिल
वित्तीय समिति में कर्मचारियों ने पंद्रह प्रस्ताव लगाए थे, इसमें भत्तों में वृद्धि, नए मकान, मरम्मत समेत कई प्रस्ताव थे। वित्त समिति ने सभी प्रस्ताव को शामिल करने से मना कर दिया। इस बार विकास विभाग से भी एक भी प्रस्ताव शामिल नहीं हुआ। पिछले साल करीब 75 करोड़ के विकास विभाग के प्रस्ताव निरस्त किए थे।
पेंशन फंड अब 110 करोड़
विश्वविद्यालय का पेंशन फंड अब 110 करोड़ हो गया है। विश्वविद्यालय ने इस बार इसमें दस करोड़ रुपये जोड़े हैं। इसमें पहले से ही 100 करोड़ का फंड था। बता दें कि यह फंड पहले पचास करोड़ से भी कम था। अब इसको इतना बढ़ाया गया है।
बजट के आंकड़े
वित्तीय वर्ष 2015-16 में वास्तविक आय व व्यय
आय : 1501590562
व्यय : 816137074
लाभ : 685453488
वित्तीय वर्ष 2016-17 में प्रस्तावित आय व व्यय
आय : 1483290200
व्यय : 1501890000
हानि: 18599800
वित्तीय वर्ष 2017-18 में अनुमानित आय व्यय
आय : 1559868200
व्यय : 1698890000
हानि : 139021800
सातवें वेतन आयोग लागू होने से वेतन की मदों में ज्यादा वृद्धि हुई है। फीसों में कोई वृद्धि नहीं हुई इसलिए आय के स्रोत में भी इजाफा नहीं हुआ। इसलिए बजट में आय से ज्यादा व्यय बढ़ा है। पेंशन फंड 110 करोड़ हो गया है।
- पीएस चौधरी, वित्त अधिकारी रुहेलखंड विश्वविद्यालय
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वित्तीय अधिकारी पीएस चौधरी ने कुलपति प्रोफेसर मुशाहिद हुसैन की अध्यक्षता में हुई वित्तीय समिति की बैठक में पिछले, मौजूदा और अगले वित्तीय वर्ष का बजट पेश किया। वित्तीय वर्ष 2015-16 में विश्वविद्यालय को 68 लाख से ज्यादा की आय हुई। पर अगले वित्तीय वर्ष में यह लाभ हानि में बदल गया। आय की तुलना में एक करोड़ 85 लाख से ज्यादा रुपये का व्यय हुआ। अब वित्तीय वर्ष में यह व्यय आय के सापेक्ष करीब चौदह करोड़ बढ़ने जा रहा है। बैठक में व्यय पर की भरपाई पर मंथन जरूर हुआ पर कोई कारगर कदम उठाने की जहमत नहीं उठाई गई। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि सातवें वेतन आयोग लागू होने से करीब 55 करोड़ का अतिरिक्त भार विश्वविद्यालय पर पड़ा है। विश्वविद्यालय ने आय बढ़ाने के स्रोत पर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। फीस या अन्य किसी आय के स्रोत में बढ़ोत्तरी नहीं की। पिछले वित्त वर्ष की मदों को ज्यों का त्यों रख दिया गया।
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कैंपस की बदहाली पर नहीं दिया ध्यान
विश्वविद्यालय के हॉस्टल बदहाल हैं। गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं ने शुक्रवार को ही तमाम खामियाें को लेकर शिकायत की थी। कैंपस की साफ सफाई पर हर महीने लाखों रुपये कागजों पर ही खर्च होते हैं। वाईफाई और अन्य योजनाओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
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गाड़ियां खरीदने के लिए तो बजट है
पिछले साल विवि में 24 लाख रुपये की दो इनोवा गाड़ियां, एक कुलपति और एक वित्त अधिकारी के लिए खरीदी गई, जबकि कुलपति के पास दो गाड़ियां पहले से ही थीं। अब भी इनोवा के साथ उनके पास होंडा सिटी है। वित्तीय अधिकारी ने भी महंगी गाड़ी खरीदी। बजट में गाड़ियां खरीदने की गुंजाइश है पर छात्रों के लिए एक वेटिंग हाल बनाने का गुंजाइश नहीं।
कर्मचारियों के पंद्रह प्रस्ताव नहीं किए शामिल
वित्तीय समिति में कर्मचारियों ने पंद्रह प्रस्ताव लगाए थे, इसमें भत्तों में वृद्धि, नए मकान, मरम्मत समेत कई प्रस्ताव थे। वित्त समिति ने सभी प्रस्ताव को शामिल करने से मना कर दिया। इस बार विकास विभाग से भी एक भी प्रस्ताव शामिल नहीं हुआ। पिछले साल करीब 75 करोड़ के विकास विभाग के प्रस्ताव निरस्त किए थे।
पेंशन फंड अब 110 करोड़
विश्वविद्यालय का पेंशन फंड अब 110 करोड़ हो गया है। विश्वविद्यालय ने इस बार इसमें दस करोड़ रुपये जोड़े हैं। इसमें पहले से ही 100 करोड़ का फंड था। बता दें कि यह फंड पहले पचास करोड़ से भी कम था। अब इसको इतना बढ़ाया गया है।
बजट के आंकड़े
वित्तीय वर्ष 2015-16 में वास्तविक आय व व्यय
आय : 1501590562
व्यय : 816137074
लाभ : 685453488
वित्तीय वर्ष 2016-17 में प्रस्तावित आय व व्यय
आय : 1483290200
व्यय : 1501890000
हानि: 18599800
वित्तीय वर्ष 2017-18 में अनुमानित आय व्यय
आय : 1559868200
व्यय : 1698890000
हानि : 139021800
सातवें वेतन आयोग लागू होने से वेतन की मदों में ज्यादा वृद्धि हुई है। फीसों में कोई वृद्धि नहीं हुई इसलिए आय के स्रोत में भी इजाफा नहीं हुआ। इसलिए बजट में आय से ज्यादा व्यय बढ़ा है। पेंशन फंड 110 करोड़ हो गया है।
- पीएस चौधरी, वित्त अधिकारी रुहेलखंड विश्वविद्यालय