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त्रिशूल के पास गुपचुप बन सकते हैं धार्मिक स्थल

Mon, 01 Feb 2016 01:13 AM IST
बरेली
बरेली Updated Mon, 01 Feb 2016 01:13 AM IST
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बरेली। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में आशंका व्यक्त की गई है कि त्रिशूल एयरबेस के आसपास के आधा दर्जन गांवों के खेत और खुली जगह पर नए धार्मिक स्थल बनाए जा सकते हैं। इसीलिए प्रशासन और पुलिस को सतर्क कर दिया जाए कि वह अवैध तरीके से नए धार्मिक स्थलों का निर्माण न होने दें। इनका निर्माण कराने के पीछे वह लोग लगे हुए हैं जो कि 100 मीटर के दायरे में अवैध मकान बना चुके हैं। ये लोग आसपास की जमीन को किसानों से खरीदकर प्लाटिंग करने वाले भी हैं। ऐसे लोगों का मकसद है कि आगे धार्मिक स्थल बन जाएंगे तो पीछे अवैध तरीके से बने मकान ध्वस्त होने से बच सकते हैं।
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पिछले माह पठानकोट में एयरबेस पर आतंकी हमले के बाद केंद्रीय खुफिया एजेंसी आईबी ने त्रिशूल सहित देश के सभी एयरबेस का गोपनीय सर्वे कराया था। जिसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी गई है, जिसमें यह पुष्टि हुई है कि बरेली के त्रिशूल एयरबेस के आसपास के सात गांव हैं, जहां पर अवैध तरीके से धार्मिक स्थल निर्मित कराए जा सकते हैं। इन गांवों से त्रिशूल एयरबेस की बाउंड्रीवाल सटी हुई है और थोड़ी दूरी पर  ही भवन बने हुए हैं। कुछ भवन अवैध तरीके से बनाए जा रहे हैं, जिनके आगे कुछ धार्मिक स्थलों को बनाकर उनकी मटमेले रंग से पुताई भी करा दी गई है। जिससे कि वह पुराने दिखाई दें, भविष्य में भी नए धार्मिक स्थलों के बनाए जाने की आशंका है।
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त्रिशूल के आसपास के ये हैैं गांव
परतापुर चौधरी, कंजादासपुर, बिहारकला, हाजीपुर ब्रिज लाल, चबेर, एयरफोर्स लिंक मार्ग, मुड़िया अहमद।

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अब अपने इंजीनियरों की जांच कराएगा बीडीए
- डीएम के आदेश पर उप सचिव अजय सिंह करेंगे जांच
- त्रिशूल के आसपास अवैध निर्माण के जिम्मेदार तलाशेंगे
बरेली। त्रिशूल एयरबेस के आसपास परतापुर चौधरी से कंजादासपुर की ओर जाने वाले मोड़ पर लिंक रोड के सहारे एक स्कूल के निकट अभी हाल में पांच दुकानों का निर्माण हो गया। इतना ही नहीं गांवों में भी मकान बन गए हैं। प्रतिबंधित क्षेत्र में धड़ाधड़ हो रहे अवैध निर्माणों का मुद्दा अमर उजाला ने उठाया तो प्रशासन की नींद टूटी। अब जिलाधिकारी गौरव दयाल ने ने बीडीए के उपाध्यक्ष से पूछा है कि अवैध निर्माण कैसे हो गए। इसमें इंजीनियरों की क्या भूमिका रही है, इस प्रकरण की जांच कराई जाए।
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डीएम के निर्देश पर बरेली विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने इस पूरे प्रकरण की जांच बैठा दी है। यह जांच उप सचिव अजय सिंह को सौंपी गई है। इस निर्देश के बाद बीडीए के जांच अधिकारी तथा उनकी टीम ने स्थलीय निरीक्षण किया। साथ में यह पड़ताल की जा रही है कि पिछले सात साल के दौरान इस क्षेत्र में कौन - कौन जेई और एई तैनात थे। इन अभियंताओं के क्षेत्र में रहते अवैध निर्माण कैसे हो गए। निर्माण रुकवाने के लिए उनके स्तर से कि तने नोटिस जारी किए गए हैं। उन नोटिसों का अवैध निर्माण करने वालों ने जबाव दिया या नहीं। इन सभी का उल्लेख करते हुए स्पष्टीकरण मांगने का निर्णय लिया है।

बता दें कि पिछले दिनों कमिश्नर के निर्देश पर त्रिशूल के आसपास अवैध निर्माण का सर्वे हो रहा है। सर्वे के लिए परतापुर और कंजादासपुर में पहुंची बीडीए की टीम ने वहां निर्माणाधीन पांच दुकानों के मालिक से बात की और अपने सामने ही अंदर निर्माण होता रहा।
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