{"_id":"5df543818ebc3e878d5d6063","slug":"tree-of-life-bareilly-news-bly3880241175","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऊर्जा की बढ़ी खपत तो संरक्षण करना भी जरूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऊर्जा की बढ़ी खपत तो संरक्षण करना भी जरूरी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए अमर उजाला की मुहिम ‘ट्री ऑफ लाइफ’ के तहत आयोजित गोष्ठी में छात्र-छात्राओं को ऊर्जा संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया। खंडेलवाल कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट में आयोजित गोष्ठी में विशेषज्ञ अंकित गोयल ने ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों पर चर्चा की।
राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस पर आयोजित इस गोष्ठी में ऊर्जा संरक्षण, महत्व और जागरूकता पर चर्चा की गई। छात्र-छात्राओं को बताया गया कि ऊर्जा की खपत को कैसे कम किया जा सकता है। मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद अंकित गोयल ने बताया कि आज बिजली हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन गई है। घर से लेकर कार्यस्थल तक इस पर निर्भरता है और कहीं न कहीं यह भौतिकतावाद का प्रभाव भी है। घरों में तमाम ऐसे कार्यों में भी बिजली का उपभोग किया जा रहा हैं, जिन्हें हम बिजली के बिना भी आसानी से कर सकते हैं। ऐसे में हमें ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत सौर ऊर्जा और बायो गैस का भी प्रयोग करना चाहिए। प्राचार्य डॉ. आरके सिंह ने कहा, संतुलित जीवन के लिए हमें ऊर्जा की खपत कम करनी ही होगी। उन्होंने कहा कि मनुष्य ऐसा प्राणी है, जो सर्दी और गर्मी के मौसम के अनुरूप खुद को ढाल लेता है। ऐसे में हमें एसी और हीटर का प्रयोग कम से कम करना चाहिए। मौजूदा दौर में ऊर्जा की जरूरत बढ़ी है इसलिए हमें इसकी बचत भी करनी होगी। कार्यक्रम में राकेश चतुर्वेदी, सविता सक्सेना, कल्पना कटियार, शिव स्वरूप शर्मा समेत तमाम शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
विज्ञापन
राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस पर आयोजित इस गोष्ठी में ऊर्जा संरक्षण, महत्व और जागरूकता पर चर्चा की गई। छात्र-छात्राओं को बताया गया कि ऊर्जा की खपत को कैसे कम किया जा सकता है। मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद अंकित गोयल ने बताया कि आज बिजली हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन गई है। घर से लेकर कार्यस्थल तक इस पर निर्भरता है और कहीं न कहीं यह भौतिकतावाद का प्रभाव भी है। घरों में तमाम ऐसे कार्यों में भी बिजली का उपभोग किया जा रहा हैं, जिन्हें हम बिजली के बिना भी आसानी से कर सकते हैं। ऐसे में हमें ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत सौर ऊर्जा और बायो गैस का भी प्रयोग करना चाहिए। प्राचार्य डॉ. आरके सिंह ने कहा, संतुलित जीवन के लिए हमें ऊर्जा की खपत कम करनी ही होगी। उन्होंने कहा कि मनुष्य ऐसा प्राणी है, जो सर्दी और गर्मी के मौसम के अनुरूप खुद को ढाल लेता है। ऐसे में हमें एसी और हीटर का प्रयोग कम से कम करना चाहिए। मौजूदा दौर में ऊर्जा की जरूरत बढ़ी है इसलिए हमें इसकी बचत भी करनी होगी। कार्यक्रम में राकेश चतुर्वेदी, सविता सक्सेना, कल्पना कटियार, शिव स्वरूप शर्मा समेत तमाम शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
विज्ञापन