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तीन सौ गांव पानी से घिरे, बहेड़ी के 25 गांवों में गंभीर हुए हालात
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा करते डीएम और एसएसपी।
बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे पर निकले पुलिस-प्रशासन के अफसर
राहत शुरू, डीएम ने दिए सुरक्षा, भोजन, चिकित्सा सुविधा के निर्देश
बरेली। तीन दिन तक भारी बारिश के बाद रामगंगा और कोसी नदी में कालागढ़ बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने से जिले के करीब तीन सौ गांव पानी से घिर गए। रामगंगा के किनारे स्थित तमाम गांवों में लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों पर शरण लेने को मजबूर होना पड़ा है। जिला प्रशासन के मुताबिक बहेड़ी के करीब 25 गांवों में हालात गंभीर हैं। बुधवार को अफसरों ने प्रभावित गांवों का दौरा किया और तेजी से राहत और बचाव कार्य करने के निर्देश दिए।
डीएम नितीश कुमार और एसएसपी रोहित सिंह सजवाण बुधवार को बहेड़ी में प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने एसडीएम और तहसीलदार को टीमें बनाकर प्रभावित क्षेत्रों में भेजने और बारिश से होने वाले नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। डूडा शुमाली, कताई मिल, फिरोजपुर सहित कई प्रभावित गांवों के लोगों की समस्याएं सुनीं। जिन गांवों में बाढ़ का पानी भर गया है, वहां अस्थायी कैंप लगाकर राहत की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। बहेड़ी के अधिकारियों ने बताया कि करीब 25 गांव बाढ़ से से प्रभावित हुए हैं।
डीएम और एसएसपी ने बहगुल और नानकमत्ता जलाशय का भी निरीक्षण किया। जलाशयों की निगरानी कर रहे सिंचाई विभाग के अधिकारियों से पानी के स्तर की जानकारी ली। इसके बाद रात करीब आठ बजे डीएम ने मीरगंज के प्रभावित क्षेत्रों का भी निरीक्षण कर अधिकारियों को हालात से लगातार अवगत कराने को कहा। अंबरपुर, पंढेरा, पनवड़िया, मिर्जापुर और अकसौरा समेत कई प्रभावित गांवों का भी निरीक्षण किया।
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प्रभावित इलाकों में ऑनकॉल ड्यूटी करेगा मेडिकल स्टाफ
बहेड़ी के प्रभावित गांवों का निरीक्षण करने पहुंचे सीएमओ डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि बहेड़ी के कई गांवों में पानी घुस गया है। इससे यातायात भी बाधित हो गया है। जलभराव से संक्रामक रोग फैलने की आशंका है जिसे देखते हुए स्थानीय सीएचसी, पीएचसी और स्वास्थ्यकर्मियों को अलर्ट कर प्रभावित इलाकों में दवा वितरण, संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए कार्रवाई करने, दुर्घटना होने पर देर रात चिकित्सकों को ऑन कॉल उपलब्ध रहने को कहा गया है। किन्हीं कारणों से अगर स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों से संपर्क न हो तो जिला अस्पताल या दूसरे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से चिकित्सक भेजने को कहा है।
बाढ़ खंड विभाग के अधिकारियों का अता-पता नहीं
बाढ़ के हालात के बाद प्रशासन और पुलिस महकमा तो सक्रिय हो गया है लेकिन बाढ़ खंड विभाग के अधिकारियों का कोई अता-पता नहीं लग पा रहा है। विभागीय अधिकारी न फोन उठा रहे हैं और न कोई जवाब दे रहे हैं। उनकी गतिविधियों का भी पता नहीं लग पा रहा है। बताया जाता है कि एक्सईएन तो लखनऊ में शासन की बैठक में हिस्सा लेने गए हुए हैं। एई अमित किशोर को बाढ़ नियंत्रण का नोडल बनाया गया है जिन्हें कई बार कॉल की गई लेकिन उन्होंने न कॉल रिसीव की और न पलटकर कॉल किया। बताया जाता है कि रामगंगा का जलस्तर अब खतरे के निशान तक पहुंच गया है। अफसर इसी कारण संपर्क से बचने का प्रयास कर रहे हैं।
आईटीबीपी की दीवार ढही, पानी घुसा
तीन दिनों तक हुई जोरदार बारिश से हुए जलभराव की वजह से आईटीबीपी परिसर की सुरक्षा के लिए बनाई गई दीवार बुधवार देर शाम ढह गई और पानी परिसर में घुस गया। आईटीबीपी से मिली जानकारी के अनुसार जलभराव कम होने के बाद दीवार का पुनर्निर्माण कराया जाएगा।
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राहत शुरू, डीएम ने दिए सुरक्षा, भोजन, चिकित्सा सुविधा के निर्देश
बरेली। तीन दिन तक भारी बारिश के बाद रामगंगा और कोसी नदी में कालागढ़ बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने से जिले के करीब तीन सौ गांव पानी से घिर गए। रामगंगा के किनारे स्थित तमाम गांवों में लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों पर शरण लेने को मजबूर होना पड़ा है। जिला प्रशासन के मुताबिक बहेड़ी के करीब 25 गांवों में हालात गंभीर हैं। बुधवार को अफसरों ने प्रभावित गांवों का दौरा किया और तेजी से राहत और बचाव कार्य करने के निर्देश दिए।
डीएम नितीश कुमार और एसएसपी रोहित सिंह सजवाण बुधवार को बहेड़ी में प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने एसडीएम और तहसीलदार को टीमें बनाकर प्रभावित क्षेत्रों में भेजने और बारिश से होने वाले नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। डूडा शुमाली, कताई मिल, फिरोजपुर सहित कई प्रभावित गांवों के लोगों की समस्याएं सुनीं। जिन गांवों में बाढ़ का पानी भर गया है, वहां अस्थायी कैंप लगाकर राहत की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। बहेड़ी के अधिकारियों ने बताया कि करीब 25 गांव बाढ़ से से प्रभावित हुए हैं।
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डीएम और एसएसपी ने बहगुल और नानकमत्ता जलाशय का भी निरीक्षण किया। जलाशयों की निगरानी कर रहे सिंचाई विभाग के अधिकारियों से पानी के स्तर की जानकारी ली। इसके बाद रात करीब आठ बजे डीएम ने मीरगंज के प्रभावित क्षेत्रों का भी निरीक्षण कर अधिकारियों को हालात से लगातार अवगत कराने को कहा। अंबरपुर, पंढेरा, पनवड़िया, मिर्जापुर और अकसौरा समेत कई प्रभावित गांवों का भी निरीक्षण किया।
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प्रभावित इलाकों में ऑनकॉल ड्यूटी करेगा मेडिकल स्टाफ
बहेड़ी के प्रभावित गांवों का निरीक्षण करने पहुंचे सीएमओ डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि बहेड़ी के कई गांवों में पानी घुस गया है। इससे यातायात भी बाधित हो गया है। जलभराव से संक्रामक रोग फैलने की आशंका है जिसे देखते हुए स्थानीय सीएचसी, पीएचसी और स्वास्थ्यकर्मियों को अलर्ट कर प्रभावित इलाकों में दवा वितरण, संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए कार्रवाई करने, दुर्घटना होने पर देर रात चिकित्सकों को ऑन कॉल उपलब्ध रहने को कहा गया है। किन्हीं कारणों से अगर स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों से संपर्क न हो तो जिला अस्पताल या दूसरे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से चिकित्सक भेजने को कहा है।
बाढ़ खंड विभाग के अधिकारियों का अता-पता नहीं
बाढ़ के हालात के बाद प्रशासन और पुलिस महकमा तो सक्रिय हो गया है लेकिन बाढ़ खंड विभाग के अधिकारियों का कोई अता-पता नहीं लग पा रहा है। विभागीय अधिकारी न फोन उठा रहे हैं और न कोई जवाब दे रहे हैं। उनकी गतिविधियों का भी पता नहीं लग पा रहा है। बताया जाता है कि एक्सईएन तो लखनऊ में शासन की बैठक में हिस्सा लेने गए हुए हैं। एई अमित किशोर को बाढ़ नियंत्रण का नोडल बनाया गया है जिन्हें कई बार कॉल की गई लेकिन उन्होंने न कॉल रिसीव की और न पलटकर कॉल किया। बताया जाता है कि रामगंगा का जलस्तर अब खतरे के निशान तक पहुंच गया है। अफसर इसी कारण संपर्क से बचने का प्रयास कर रहे हैं।
आईटीबीपी की दीवार ढही, पानी घुसा
तीन दिनों तक हुई जोरदार बारिश से हुए जलभराव की वजह से आईटीबीपी परिसर की सुरक्षा के लिए बनाई गई दीवार बुधवार देर शाम ढह गई और पानी परिसर में घुस गया। आईटीबीपी से मिली जानकारी के अनुसार जलभराव कम होने के बाद दीवार का पुनर्निर्माण कराया जाएगा।